सियासत में पांव धरा चंद्रशेखर आजाद ने, आजाद समाज पार्टी बनाई

Samachar Jagat | Sunday, 15 Mar 2020 08:44:11 PM
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भीम आर्मी ने अब सियासत में कदम रख दिया. बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने सियासी पार्टी का एलान किया. नोएडा में उन्होंने इसका एलान किया. हालांकि पार्टी का एलान भी कम नाटकीय नहीं रहा. पार्टी एलान के दौरान भी पुलिस और समर्थकों की झड़प हुई. दरअसल कोरोना वायरस की वजह से प्रशासन ने सभी सार्वजनिक कार्यक्रमों पर पाबंदी लगा दी थी. आयोजन स्थल पर पुलिस ने ताला जड़ा तो समर्थकों से झड़प हुई. इस धक्कामुक्की के बीच ही भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी का एलान किया. उन्होंने पार्टी का नाम आजाद समाज पार्टी (एएसपी) रखा है. नोएडा के सेक्टर 70 स्थित बसई गांव में उन्होंने संविधान की शपथ ली और नई पार्टी का एलान किया.

नई पार्टी के नाम की घोषणा के दौरान भीम आर्मी के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे. बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 28 पूर्व विधायक और छह पूर्व सांसद भी पहुंचे थे. नोएडा पुलिस ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को गेस्ट हाउस में कार्यक्रम करने की अनुमति नहीं दी. इसके बावजूद भीम आर्मी के समर्थको ने कार्यक्रम स्थल का ताला तोड़कर गेस्ट हाउस के अंदर घुस गए. डीसीपी सेंट्रल जोन हरीश चंदर का कहना है कि भीम आर्मी को कार्यक्रम की कोई अनुमति नहीं दी गई. बावजूद लोगों ने जबरन गेट का ताला खोलकर कार्यक्रम किया. जो कि गैरकानूनी है इसलिए कार्यक्रम आयोजित करने वालों और इसमें शामिल होने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

नोएडा पुलिस ने कोरोना वायरस का हवाला देकर भीम आर्मी के कार्यक्रम पर रोक लगा दी. बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए देश के कई राज्यों से भीम आर्मी समर्थक आए थे. कार्यक्रम स्थगित होने के बाद चंद्रशेखर के समर्थक मायूस जरूर हुए लेकिन बाद में चंद्रशेखर आजाद ने पार्टी का एलान किया तो उनकी मायूसी दूर हुई. कांशीराम जयंती पर गौतमबुद्ध नगर में भीम आर्मी प्रमुख नई पार्टी की घोषणा की और सियासी पिच पर पारी की शुरुआत की. नई पार्टी का मेनिफेस्टो और पार्टी का मूलमंत्र भी घोषित किया. चंद्रशेखर आजाद दलितों की नई आवाज बन कर उभरे हैं.

पुलिस की प्रताड़ना के बावजूद वे लगातार दलितों और अल्पसंख्यकों के हक-हकूक की आवाज उठाते रहे हैं. दलित युवाओं में उनकी पकड़ है और देश भर में उनके समर्थकों की बड़ी तादाद है. जाहिर है कि वे सियासी सफर का आगाज 2022 में होने वाले उत्तर प्रदेश चुनाव से करेंगे. चंद्रशेखर के उदय को बसपा प्रमुख मायावती के लिए खतरा बताया जा रहा है. यूपी में चंद्रशेखर मायावती के लिए तो कड़ी चुनौती बनेंगे ही, समाजवादी पार्टी की परेशानी भी बढ़ाएंगे. कहा जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद बिहार विधानसभा चुनाव में भी अपने उम्मीदवार उतार सकते हैं लेकिन इसकी उम्मीद कम ही दिखती है क्योंकि वे पार्टी का आगाज दमदार तरीके से करना चाहेंगे और इसके लिए बिहार नहीं, उत्तर प्रदेश की जमीन उनके लिए ज्यादा माकूल है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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