तो अरविंद केजरीवाल के पास भी नहीं है जन्म प्रमाणपत्र

Samachar Jagat | Saturday, 14 Mar 2020 08:03:40 AM
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पास उनके जन्म का प्रमाणपत्र नहीं है और न ही उनके 61 विधायकों के पास भी उनके पैदाइश का सबूत नहीं है. अरविंद केजरीवाल के इस बयान ने केंद्र की भाजपा सरकार को असहज करने वाला तो ही है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दलीलों का भी जवाब है जो उन्होंने दिल्ली के दंगों के दौरान संसद में दिया था. अमित शाह ने राज्यसभा में एनपीआर और एनआरसी को जो कुछ भी कहा था, वह तथ्यों से परे था और देश व संसद को गुमराह करने वाला था. अरविंद केजरीवाल ने इसी का जवाब शुक्रवार को अपने अंदाज में दिया. दिल्ली विधानसभा में नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ.

अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में अध्यक्ष से कहा कि अपनी नागरिकता साबित करने के लिए मेरे पास भी जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. मेरी बीवी के पास भी नहीं है, मेरे मां-बाप के पास भी नहीं है. बस बच्चों के हैं. क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री और उनके परिवार को डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा. मेरी पूरी कैबिनेट के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है. अध्यक्ष महोदय आपके पास भी नहीं है. केजरीवाल ने यह बयान तो दिया दिल्ली विधानसभा में लेकिन इसकी गूंज दूर तक सुनाई दी और जाहिर है कि भाजपा इससे बेहद तिलमिलाई होगी. दिल्ली विधानसभा ने राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ शुक्रवार को प्रस्ताव पारित किया. एनपीआर और एनआरसी पर चर्चा के लिए बुलाए गए एक दिन के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र से इन्हें वापस लेने की अपील की.

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों से कहा कि वे बताएं कि क्या उनके पास सरकारी एजेंसियों के जारी जन्म प्रमाणपत्र हैं या नहीं. केजरीवाल ने विधानसभा में विधायकों से कहा कि उनके पास जन्म प्रमाणपत्र हैं, तो वे हाथ उठाएं. इसके बाद दिल्ली विधानसभा के सत्तर सदस्यों में से केवल नौ विधायकों ने हाथ उठाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में 61 सदस्यों के पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं हैं. क्या उन्हें डिटेंशन सेंटर भेजा जाएगा. दिल्ली विधानसभा में एनसीटी दिल्ली की बैठक हुई.

यह बैठक इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए की गई कि भारतीय संसद ने हाल ही में सीएए के माध्यम से नागरिकता अधिनियम, 1955 में कुछ संशोधन किए हैं, जिसे 12 दिसंबर, 2019 को राष्ट्रपति ने स्वीकार किया गया था. इस तथ्य पर आगे ध्यान देते हुए कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को शुरू करने की कवायद बहुत जल्द शुरू होने वाली है, जिसमें नौ नए बिंदुओं पर डेटा प्राप्त करने का प्रस्ताव है. इस तथ्य पर ध्यान देना होगा कि जनता में आम धारणा है कि भारत सरकार जनता से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए दस्तावेज मांगेगी और प्राप्त दस्तावेजों और नए एनपीआर के आधार पर एक नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) तैयार करेगी. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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