बड़बोलेपन से तो कोरोना से जंग नहीं लड़ी जा सकती नीतीश कुमार जी !

Samachar Jagat | Friday, 27 Mar 2020 01:09:18 AM
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दुनिया भर में कोरोना वायरस का खौफ पसरा है. देश में भी कोरोना से संक्रमित लोगों की तादाद बढ़ रही है. भारत में अब तक करीब सात सौ लोग इस संक्रमण का शिकार हो चुके हैं. इनमें तेरह लोगों की मौत हो गई है. इन तेरह में से एक मौत बिहार में भी हुई है. लेकिन बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं कितनी बेहतर हैं वह इस बात से ही पता चलता है कि सक्रमित व्यक्ति की मौत हो जाने के बाद उसकी रिपोर्ट आई. मरने वाले शख्स किडनी की बीमारी का इलाज करवा रहा था. मौत के बाद शव उसके परिजनों को सौंप दिया गया था. इसके बाद रिपोर्ट आई तो उसमें कोरोना वायरस पाया गया. यानी यह बात फिर सामने आई कि बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चमकी बुखार के दौरान हुई लापरवाही से भी कोई सबक नहीं सीखा और अस्पतालों को भगवान भरोसे ही छोड़ दिया है.



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सिर्फ लच्छेदार भाषणों और बयानों से स्वास्थ्य सेवाएं ठीक नहीं होतीं हैं, नीतीश कुमार अब तक यह नहीं समझ पाए. चमकी बुखार से सैकड़ों बच्चों की मौत के बाद भी नीतीश कुमार नहीं चेते. हालांकि दावे बड़े-बड़े किए गए थे. लेकिन कहानी जस की तस है. पिछले साल बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के खिलाफ राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने मुजफ्फरपुर से पटना तक की पदयात्रा भी की थी. लेकिन तब नीतीश कुमार और उनके सिपाहसालारों ने इसे सियासी स्टंट बताया था. लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप ने फिर से बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोली और नीतीश कुमार के बड़बोलेपन की भी.

बिहार में अबतक कोरोना से एक शख्स की मौत हो चुकी है जबकि चार पॉजेटिव केस पाए गए हैं. लेकिन कोरना वायरस के फैलते प्रकोप के बीच बिहार के डॉक्टरों ने अपनी दर्द का इजहार किया है. इससे बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं की दर्दनाक तस्वीर सामने तो आती ही है, सरकार के बड़बोलेपने की पोलपट्टी भी खुलती है. डाक्टरों ने जिस तरह की बातें लिखी है उससे तो बिहार में लोग भगवान भरोसे ही हैं. कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सरकार ने जो इंतजाम किए हैं उसकी पोल खुलती जा रही है. बिहार के दूसरे जिलों की बात जाने दें, सूबे के सबसे बड़ा अस्पताल यानी पीएमसीएच भी कोरोना से लड़ने के लिए कितना तैयार है वहां के डॉक्टर ही पूरी बात बता रहे हैं. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय चमकी बुखार के वक्त भी सभा-समारोहों में हिस्सा लेते रहे थे और उद्घाटन-सम्मान समारोह में फीता काटते रहे थे. अब भी वही कर रहे हैं. अब वे घंटी बजा कर कोरोना वायरस भगा रहे हैं. दावे भले वे कर रहे हों लेकिन इन दावों का सच्चाई से लेनादेना नहीं.

हालांकि बिहार सरकार ने कोरोना के संक्रमण के मद्देनजर एहतियातन कई सख्त कदम उठाने की बात तो की है, लेकिन अस्पतालों में जो इंतजाम सरकार ने किए हैं वह सरकार की व्यवस्था को सवालों में खड़ा करने वाला है. वैसे इसमें कोई दो राय नहीं कि डाक्टर अस्पतालों में बहुत ही मुस्तैदी से डटे हैं. उनके लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं, लेकिन जब डॉक्टर सुरक्षित न हों तो बिहार कोरोना के खिलाफ कैसे जंग जीत सकेगा. डॉक्टर सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा बयान कर रहे हैं. वे बता रहे हैं कि सरकार के इंतजामात नाकाफी हैं और उनके बीच वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि इन हालात में वे मरीज का इलाज कैसे कर सकेंगे. पटना मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल (पीएमसीएच) और कोरोना अस्‍पताल घोषित नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल (एनएमसीएच) में तो कोरोना से बचाव के सुरक्षा संबंधी उपकरण (पीपीई) ही उपलब्‍ध नहीं हैं. पीपीई की बजाय वे एचआइवी किट के सहारे इलाज कर रहे हैं.

पटना के पीएमसीएच की एक डॉक्टर ने फेसबुक पर पोस्ट लिख कर सरकार से गुहार लगाई है. डाक्टरों ने कहा कि अगर अस्पताल में कोरोना के लिए पीपीई किट के बदले हमें अगर आप एचआइवी किट देंगे तो हम कैसे इस बीमारी से खुद को सुरक्षित रख सकेंगे और कैसे किसी मरीज का इलाज कर सकेंगे. पीएमसीएच की रेसिडेंट डॉक्टर बिनीता चौधरी ने यह पोस्ट लिखा है और अपनी व अपने साथी डाक्टरों की परेशानी बताई है. उन्होंने लिखा है कि सुसाइड स्क्वॉड # इमरजेंसी में काम कर रहा है @ पटना मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल, बिहार . हमें पीपीई की जगह एचआईवी किट दी जा रही है. इससे हम कोरोना के रोगी का इलाज करने जा रहे हैं !! यह वास्तव में एक आत्महत्या है जिसे हमने खुद के लिए चुना है. एक बार जब हम संक्रमित हो जाते हैं, तो हम दूसरों को भी संक्रमित कर देंगे. कोई सुविधाएं नहीं, कोई उपकरण नहीं, कोई प्रक्षेपास्त्र नहीं खाली बोतलों से अधिक, जैसा कि आप तस्वीर में देख सकते हैं !! जहां अस्पताल अधीक्षक अपने दोपहर के भोजन के लिए बिहार के मुख्यमंत्री के साथ अधिक चिंतित हैं, तो हमें लगता है कि हम पर एफआईआर की धमकी दी जा रही है अगर हम इस स्थिति में ड्यूटी करने से इनकार करते हैं, तो अपना काम करते हुए खुशी से आत्महत्या कर लेते.

यही हाल नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भी है. एनएमसीएच के डॉक्टरों का कहना है कि हमारे अस्पताल को कोरोना अस्पताल घोषित किया गया है, लेकिन इस अस्पताल में कोई सुविधा अबतक नहीं दी गई है. हमारे पास पीपीई किट नहीं है और हमने जब इसकी मांग की तो अजीबोगरीब बात कही गई कि आप पॉजिटिव मरीज का इलाज नहीं कर रहे हैं तो आपको किट की चिंता क्यों है. डॉक्टर ने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि जब कोई मरीज जांच के लिए आता है, माना कि उसे सर्दी-जुकाम फ्लू ही हुआ है, पर किसी के चेहरे पर तो लिखा नहीं है कि वह कोरोना पॉजिटिव है या नहीं. हमारी पहली जिम्मेदारी बनती है कि उसकी जांच करें. उसका इलाज करें. हम डॉक्टर हैं और हम अपना फर्ज निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन अगर किसी सिपाही को बिना हथियार के जंग के मैदान में भेजेंगे तो वह कैसे लड़ाई लड़ेगा. उन्‍होंने कहा कि हमारी बस इतनी मांग है कि हमें किट मुहैया कराई जाए, क्योंकि हम भी इंसान हैं और हम भी कोरोना से संक्रमित हो सकते हैं. अस्पताल की जो बुनियादी जरूरते हैं उनपर सरकार को ध्यान देना चाहिए.

डॉक्टरों ने बताया कि हमने अस्पताल प्रबंधन से मांग भी की है कि हमें भी क्वारेंटाइन की अनुमति दी जानी चाहिए. इस संबंध में डॉक्टर्स एसोसिएशन ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भी लिखा है. पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल को कोरोना अस्पताल बना दिया गया है. बिहार में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है. एनएमसीएच में सिर्फ कोरोना संदिग्ध और इस बीमारी से पीड़ित मरीजों का ही इलाज होगा. अस्पताल में भर्ती दूसरे मरीजों को इलाज के लिए पटना के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में भेजा जाएगा. सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के साथ बैठक करने के बाद यह फैसला लिया गया है.

लेकिन जो हालात इन अस्पतालों के है इससे समझा जा सकता है कि इस बीमारी से लड़ने के लिए कितनी तैयारी की है नीतीश कुमार और उनके स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाणडे ने. बिहार का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह बीमार है और कोरोना वायरस ने उसकी पोल खोल कर रख दी है. अब पीएमसीएच और एनएमसीएच के डॉक्टरों ने गुहार लगाई है, सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस पर ध्यान देता है या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. लेकिन नीतीश कुमार जी, कोरोना से लड़ाई बड़बोलेपन से नहीं लड़ी जा सकती. आप जितनी जल्दी इस सच को समझ जाएंगे, बिहार के लोगों के साथ-साथ डाक्टरों के लिए उतना ही अच्छा होगा. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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