थोड़ी-थोड़ी नहीं, पूरी-पूरी पिया करें क्योंकि बिहार में बहार है और नीतीश कुमार हैं

Samachar Jagat | Monday, 24 Feb 2020 09:30:28 PM
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उर्दू शायरी में शराब पर बहुत कुछ लिखा गया. गालिब तो मस्जिद में शराब पीने की बात कहते थे. वैसे बिहार को लेकर वह पंक्तियां सही बैठती हैं कि हुई महंगी बहुत ही शराब कि थोड़ी-थोड़ी पिया करो. बिहार में शराब काफी महंगी है, इस सच के बावजूद के उसी शराब पर बिहार में पाबंदी है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शराब पर पाबंदी लगाने के लिए अपनी पीठ थपथपाते हैं. लेकिन उनकी पुलिस के ही सबसे बड़े अधिकारी उनकी बातों को झुटला कर मानते हैं कि बिहार में शराब पुलिस ही बेच रही है. घर-घर शराब दोगुने कीमतों में आसानी से मिल रही है और बिहार के लगभग हर गांव में शराब बनाई भी जा रही है. वैसे हाल ही में नीतीश कुमार ने दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि बिहार मद्य-निषेध अभियान के लिए पूरे देश में रोल मॉडल है. शराबबंदी का राजस्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. पूरे देश में शराबबंदी लागू होना चाहिए. यह सामाजिक, धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी आवश्यक है.

लेकिन नीतीश कुमार के दावे को सरकार ही के लोग झुटला रहे हैं. बिहार में पूर्ण रुप से शराबबंदी की जिम्मेदारी जिनके सिर है वही आए दिन शराब पीते और धंधे में संलिप्त नजर आ रहे हैं. औरंगाबाद समाहरणालय के नगर भवन में शांति सह निगरानी समिति की बैठक में बिहार पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडेय ने माना कि थाना के संरक्षण के बिना कोई भी एक बोतल शराब नहीं बेच सकता है. इसके साथ ही डीजीपी ने कहा कि जिस दिन थानेदार, चौकिदार और समाज के हर वर्ग के लोग जाग जाएंगे उसी दिन राज्य में शराब की तस्करी रुक जाएगी और सूबे में पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू हो सकेगी.

बैठक को संबोधित करते हुए डीजीपी ने सभी को चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी शराब से संबंधित मामले में संलिप्त होंगे वे सीधे जेल भेजे जाएंगे, चाहे वह पुलिस वाला हो या आम आदमी. डीजीपी साहब के इस ज्ञान के सामने आने के बाद नीतीश कुमार सकते में हैं. उन्होंने भी डीजीपी महोदय को ज्ञान दिया है कि ऐसा ज्ञान न दें. लेकिन तब तक तो मामला बिगड़ चुका था. पहले मीडिया ने इस बयान को चलाया फिर विपक्ष ने इसे लपका. बिहार अभी शराबी-शराबी हो रहा है क्योंकि नीतीश कुमार अपने ही अधिकारी की वजह से घिर गए हैं. ऐसे माहौल में जब बिहार में ही शराब नहीं बंद हुई है तो नीतीश कुमार का शराब पर ज्ञान बांटना अच्छा नहीं लगता. शराब को लेकर बिहार मॉडल की बात की तो विपक्ष को हंगामा करना ही था.

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कैसी शराबबंदी, अब तो लोगों के घर पर शराब की डिलेवरी हो रही है. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार में नीतीश कुमार का शराबबंदी कानून पूरी तरह से फेल हो गया है. आलम यह है कि शराबबंदी के बाद अब लोगों को उनके घर पर ही बैठे-बैठे शराब मिल जाती है. इस कानून के नाम पर नीतीश झूठ की प्रसिद्धि पाने की कोशिश कर रहे हैं. शराबबंदी के बावजूद बिहार में बड़ी संख्या में रसूखदार लोग शराब पी रहे हैं. उन्हें आसानी से शराब मिल जाती है और वे खूब पी भी रहे हैं. लेकिन उन्हें पकड़ने वाला कोई नहीं है. शराबबंदी के नाम पर सबसे ज्यादा गरीबों को पकड़ा जा रहा है. जेल में बंद नब्बे फीसद लोग गरीब तबके के ही हैं.

दूसरी तरफ जीतन राम मांझी ने कहा कि सरकार के मंत्रियों से लेकर अफसरों तक के यहां छापेमारी हो जाए तो इस कानून की सारी हकीकत सामने आ जाएगी. शराबबंदी कानून सिर्फ गरीब, दलित, पिछड़ों और आदिवासियों को प्रताड़ित करने के लिए बना है. जीतनराम मांझी ने नीतीश कुमार को चुनौती देते हुए कहा कि जिन्हें लगता है यहां शराबबंदी है, वे मंत्रियों और अधिकारियों के यहां छापेमारी करें. मंत्री और अधिकारियों के घर शराब नहीं मिली तो वे राजनीति छोड़ देंगे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार की तरह पूरे देश में शराबबंदी की बात करने पर राजद प्रमुख लालू यादव ने भी चुटकी ली है. लालू का साथ राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी दिया. लालू ने ट्वीट कर नीतीश पर हमला बोला. लालू ने लगातार दो ट्वीट किए. पहले ट्वीट में लालू ने नीतीश को नसीहत देते हुए लिखा कि शराबबंदी को पहले बिहार में ही ठीक से लागू करवा लें उसके बाद पूरे देश की बात करें.

दूसरे ट्वीट में लालू ने नीतीश के बयान में गांधी की चर्चा को मुद्दा बनाया और लिखा कि महात्मा गांधी ने सबसे बड़ा सामाजिक पाप सिद्धांत के बिना राजनीति को बताया था. लेकिन नीतीश भाजपा के साथ मिलकर पिछले पच्चीस सालों से विभाजनकारी राजनीति कर रहे हैं. उन्होनें लिखा कि गांधी जी के हत्यारों के साथ मिलकर उनकी बैसाखी पर विभाजनकारी राजनीति कर रहे कुर्सी कुमार शायद यह नहीं जानते कि सिद्धांत के बिना राजनीति को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सबसे बड़ा सामाजिक पापकर्म बताया था. 

प्रशांत किशोर ने भी शराबबंदी को लेकर बिहार के मुखिया नीतीश कुमार को आईना दिखाया है. प्रशांत किशोर ने भी कहा बिहार में शराब बंद नहीं हुई है. शराबबंदी के सवाल पर प्रशांत किशोर ने साफ कहा कि शराबबंदी की बात तो तब कि जाएगी न, जब बिहार में शराब बंद हो जाए. सब को पता है कि बिहार में शराब मिल रही है. इसलिए शराबबंदी पर बहस करना ही बेमानी होगी. वैसे बिहार में लोग तो अक्सर यह गुनगुनाते हुए मिल जाते हैं कि हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है, डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है. वैसे इसका जवाब तो नीतीश कुमार के पास भी नहीं है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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