बिहार में शिक्षा का हो रहा है बंटाधार, पर कुछ नहीं कर रहे हैं नीतीश कुमार

Samachar Jagat | Friday, 21 Feb 2020 09:02:51 AM
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लाख दावे करें लेकिन उनके राज में शिक्षा और स्वास्थ्य बदहाल हैं. पंद्रह साल में नीतीश कुमार ने बिहार पर ध्यान कम अपना चेहरा चमकाने पर ध्यान ज्यादा दिया. ठीक है कि सत्ता उन्हें मिलती रही लेकिन जमीनी हकीकत सामने है. शिक्षा का स्तर लगातार गिरता गया. स्कूलों में सुविधाएं खत्म होती गईं और निजी स्कूलों की पौबारह होती चली गई. लेकिन नीतीश कुमार को शिक्षा का स्तर सुधारना जरूरी नहीं लगा. दावे और वादे जरूर किए गए लेकिन हालात ऐसे हैं कि बिहार के सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर आप बहुत इतरा नहीं सकते. कैसे-कैसे छात्र नीतीश कुमार की मेहरबानी से टॉप करते रहे हैं, यह बात किसी से छुपी थोड़े ही है. लेकिन नीतीश कुमार का क्या है भाषण पिलाते रहते हैं और पोशाक व साइकिल बांट कर खुश होते हैं और अपनी पीठ थपथपाते हैं.

अब यह बात अलग है कि उनके इन स्कूलों में ही छात्रों को किताबें समय पर नहीं मिलतीं. परीक्षा से महज दो-तीन महीने पहले ही किताबें मिल पातीं हैं. लेकिन नीतीश कुमार को इसकी क्या फिक्र. बच्चे चकाचक साइकिल का पैडल मार रहे हैं, इतने भर से ये खुश हो लेते हैं. बिहार की बदहाल शिक्षा को लेकर रालोसपा तीन साल से लगातार आंदोलन कर रही है लेकिन नीतीश कुमार शिक्षा की सुध लेने की फुर्सत नहीं मिली. शिक्षकों का हाल भी बेहाल है.

लेकिन शिक्षकों ने सरकार से दो-दो हाथ करने का मन बना लिया है. बिहार में 17 फरवरी से मैट्रिक की परीक्षा हो रही है. इस दौरान ही शिक्षकों के कई संघ अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं. हड़ताल से हजारों स्कूलों में पढ़ाई ठप हो गई है. इतना ही नहीं शिक्षक मैट्रिक परीक्षा के दौरान भी ड्यूटी नहीं कर रहे हैं. हड़ताल पर जाने के एलान के बाद सरकार ने शिक्षकों को चेताया भी था. सरकार ने कहा था कि मैट्रिक परीक्षा केंद्रों से गायब और असहयोग करने वाले शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने यह भी कहा था कि ऐसे शिक्षकों की नौकरी भी जाएगी और उनको बर्खास्त करने का निर्देश दिया जाएगा. पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव ने इसे लेकर सभी डीएम को लिखा पत्र लिखा था.

पत्र में कहा गया था कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने शिक्षक संघों के नेताओं को भी चेतावनी दी थी और कहा था कि ड्यूटी पर आने वाले शिक्षकों को वे डराने की कोशिश करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. मैट्रिक परीक्षा के बीच बिहार के लगभग चार लाख नियोजित शिक्षक हड़ताल पर हैं. बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर शिक्षक ने स्कूलों में तालाबंदी कर दी है. नियोजित शिक्षकों के संयुक्त मोर्चा ने समान काम समान वेतन और सेवाशर्त की मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल पर डटे रहने का एलान किया है. शिक्षकों का कहना है कि सरकार चाहे लाख धमकी दे हम पीछे हटने वाले नहीं हैं.

इस बीच सरकार ने हड़ताली शिक्षकों पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन की अध्यक्षता में शिक्षकों की हड़ताल से उपजी स्थिति की समीक्षा को लेकर मैराथन बैठक हुई. जिसमें अपर मुख्य सचिव ने यह साफ कर दिया है कि लिखित सूचना देकर हड़ताल पर गए और अब तक उसमें शामिल शिक्षकों का वेतन अभी जारी नहीं किया जाए. उन्होंने कहा कि इस मामले पर बाद में निर्णय लिया जाएगा. जो शिक्षक हड़ताल पर नहीं गए हैं, उनका फरवरी का वेतन रिलीज किया जाएगा. हड़ताल में शामिल कई शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया, जबकि चार शिक्षकों पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. बैठक में अपर मुख्य सचिव ने बताया कि शिक्षा विभाग को राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि हड़ताल के लिए शिक्षकों को प्रेरित कर रहे लोगों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जाए.

शिक्षा विभाग ने जिलों के डीएम को पत्र लिखकर वैसे नियोजित शिक्षकों को बर्खास्त करने का निर्देश दिया जो मैट्रिक परीक्षा के दौरान हड़ताल में शामिल हैं. एग्जाम ड्यूटी नहीं करने पर बड़ी कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए गए हैं. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन की ओर से जारी पत्र के मुताबिक नियोजित शिक्षकों के ऊपर मनमानी करने को लेकर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. शिक्षा विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है. हड़ताल के समर्थक शिक्षक वीक्षण और मूल्यांकन कार्य से रोकते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया जाए. इस प्रकार की कानूनी कार्रवाई के अलावा शिक्षकों को उनके सेवा से बर्खास्त करने का निर्देश दिया गया है. उनके जगह पर नए शिक्षकों की नियुक्ति के भी आदेश दिए गए हैं.

हड़ताल पर जाने वाले शिक्षकों का कहना है कि शिक्षकों के विरोध से बिहार सरकार डर गई है और अनाप-शनाप बयानबाजी कर रही है. शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने की धमकी दे रही है इससे शिक्षक डरने वाले नहीं है.बिहार प्रदेश परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव आनंद मिश्रा ने कहा कि सरकार बार-बार मैट्रिक परीक्षा को लेकर बच्चों के भविष्य का हवाला दे रही है. उन्होनें कहा कि हमें अपने बच्चों के भविष्य का ख्याल है तभी तो हम सड़क पर उतर कर अपने लिए जायज वेतन की मांग कर रहे हैं ताकि परिवार के भरण-पोषण से निश्चिंत होकर बच्चों को बेहतर शिक्षा दे सकें. उन्होनें कहा कि हमारा कोई उदेश्य नहीं है कि मैट्रिक परीक्षा को हम बाधित करें. हमने मैट्रिक परीक्षा के दौरान असहयोग का एलान किया है और उसी पर डटे हैं. शिक्षकों के हड़ताल पर पूरा विपक्ष गोलबंद है. पूर्व केंद्रीय मानव संसाधान विकास राज्य मंत्री व रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश पर कड़ा एतराज जताया है. उन्होंने ट्वीट कर नीतीश कुमार पर तंज करते हुए कहा है कि इस तुगलकी फरमान को जारी करने से पहले रोलासपा के शिक्षा सुधार और शिक्षकों की समस्याओं से अवगत हो लेते तो मैट्रिक की परीक्षा दे रहे पंद्रह लाख छात्रों का भविष्य अधर में न लटका होता. वैसे सरकार की परेशानी अभी और बढ़ेगी. अगले हफ्ते से माध्यमिक स्कूलों के शिक्षक भी हड़ताल पर जा रहे हैं. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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