नीतीश कुमार की उड़ी नींद, बिहार बना फिसड्डी

Samachar Jagat | Friday, 21 Feb 2020 09:33:01 PM
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पीठ खूब थपथपाते हैं. विकास की बातें करते हुए वे अघाते नहीं हैं. आत्ममुग्धता भी उनमें दिखाई देती है. दावे करने में भी वे पीछे नहीं रहते हैं. लेकिन डबल इंजन की सरकार जमीन पर विकास नहीं कर पा रही है क्योंकि जमीनी हकीकत उसके उलट है. नीति आयोग ने बिहार सरकार के दावों की कलई भी खोली है और नीतीश सरकार को आईना भी दिखाया है. नीति आयोग ने देशभर के राज्यों में विकास को लेकर जो रैंकिंग जारी की है उसमें बिहार फिसड्डी साबित हुआ है. नीति आयोग की तरफ से टिकाऊ व स्वस्थ विकास के लक्ष्य यानी एसडीजी की दिशा में राज्यों के प्रदर्शन को लेकर एक रिपोर्ट जारी की गई है. इस रिपोर्ट में केरल पहले पायदान पर है और बिहार सबसे पीछे.

नीति आयोग की जारी की गई रैंकिंग में बिहार अट्ठाइसवें नंबर पर है. हालांकि पिछले साल के मुकाबले बिहार की रैंकिंग घटी है, 2018 में नीति आयोग की तरफ से जारी की गई एसडीजी रैंकिंग में बिहार को 48 अंक मिले थे जबकि इस साल 50 अंक उसे दिए गए हैं. यानी बिहार सरकार इसे लेकर अपनी पीठ फिर थपथपा सकती है. वैसे इस रैंकिंग में 70 अंकों के साथ केरल सबसे ऊपर है जबकि हिमाचल प्रदेश जैसा छोटा राज्य दूसरे नंबर पर. तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना 67 प्वाइंट के साथ तीसरे नंबर पर हैं. गुजरात और महाराष्ट्र के रैंकिंग में कोई सुधार नहीं हुआ है जबकि उत्तर प्रदेश, ओड़ीशा और सिक्किम जैसे राज्यों ने 2018 के तुलना में काफी सुधार किया है.

देश के राज्यों में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के संदर्भ में हुए विकास को आंकने के लिए नीति आयोग ने एसडीजी इंडिया इंडेक्स-2018 जारी किया है. इसके मुताबिक असम, बिहार और उत्तर प्रदेश विकास के मामले में सबसे फिसड्डी राज्य साबित हुए हैं. जबकि हिमाचल प्रदेश, केरल और तमिलनाडु का प्रदर्शन सबसे बेहतर है. रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य सेवा, भुखमरी दूर करने, लैंगिक समानता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देने के मामले में केरल का कोई सानी नहीं है.

हिमाचल स्वच्छ जल और साफ सफाई के मामले में सबसे अच्छा रहा. राज्य ने लैंगिक अंतर दूर करने और हिमालीय पर्यावरण को संरक्षित रखने में भी सबसे बेहतर काम किया है. केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में चंडीगढ़ सबसे बेहतर रहा है. यह उपलब्धि शहर प्रशासन की ओर से लोगों को साफ पेयजल और साफ-सफाई की वजह से मिला है. तो गरीबी उन्मूलन के मामले में आंध्र प्रदेश, केरल, मेघालय, मिजोरम और तमिलनाडु शीर्ष के राज्यों में शामिल हैं. शून्य मुखमरी के लक्ष्य को हासिल करने गोवा, केरल, मणिपुर, मिजोरम और नगालैंड में उल्लेखनीय काम किया है. 

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न संकेतकों पर किए गए का आकलन है. यह वास्तव में सहयोगात्मक व प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद का उदाहरण है. नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि एसडीजी इंडिया इंडेक्स हर राज्य और संघ शासित प्रदेशों के विकास का आकलन 62 मानकों पर करता है. यह वास्तविक तस्वीर पेश करता है. 

नीतीश कुमार नीति आयोग की रिपोर्ट से परेशान हैं तो दूसरी तरफ भाजपा भी बीच-बीच में उनके खिलाफ मोर्चा खोल लेती है. अब भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाया है कि कुछ बालू कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए जेपी सेतु जैसे महत्त्वपूर्ण पुल को बिहार सरकार (नीतीश सरकार) नष्ट करने पर तुली हुई है. अगर बालू लदे भारी वाहनों का इसी प्रकार सेतु से आना-जाना होता रहा तो छह माह में पुल क्षतिग्रस्त हो जाएगा.

उन्होंने पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक के उन्हें लिखे पत्र का हवाला देते हुए कहा कि रेल प्रशासन ने बिहार सरकार को सारी स्थिति से अवगत कराया है. इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही. रूडी ने कहा कि एक बार यह सेतु क्षतिग्रस्त हो गया तो मरम्मत में छह साल से कम समय नहीं लगेगा. बालू लदे ट्रकों व ट्रैक्टरों को आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि कुछ खास बालू व्यवसायियों को लाभ पहुंचाने के लिए गुजरने का बिहार सरकार ने आदेश दे रखा है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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