पटना हाई कोर्ट ने माना बिहार में नहीं है कानून का राज

Samachar Jagat | Saturday, 22 Feb 2020 02:56:55 PM
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गालिब साहब ने बरसों पहले लिखा था कि काबा किस मुंह जाओगे गालिब, शर्म तुमको मगर नहीं आती. बरसों बाद यह शेर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर फिट बैठता है. उनका कामकाज पर इस शेर को चस्पां कर दें लोग कहेंगे मौजूं हैं उनकी सरकार के लिए. अदलातों फटकार रहीं हैं. घोटाले हो रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार हैं कि उन पर कुछ असर ही नहीं होता. सृजन घोटाला से लेकर मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में बिहार सरकार को अदालत ने कितनी बार फटकारा होगा, नीतीश कुमार को भी गिनती याद नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने तो शेल्टर होम मामले में तो सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार फटकारा लेकिन नीतीश कुमार पर कोई असर नहीं पड़ा. अब एक बार फिर अदालत ने जो कहा है वह बिहार के लोगों को शर्मिंदा करने के लिए काफी है, वैसे इस पर भी नीतीश कुमार पर कुछ असर होगा लगता नहीं है.

बिहार में कानून का राज केवल नारा बनकर रह गया है और उस पर रत्ती भर भी अमल नहीं किया जाता. यह टिप्पणी पटना हाईकोर्ट ने नीतीश सरकार के कामकाज को लेकर की है. पटना हाईकोर्ट में राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक मामले पर सुनवाई हो रही थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की. पटना हाई कोर्ट ने राज्य में शिक्षा की बदतर स्थिति पर तल्ख टिपण्णी की. अदालत ने मुख्य सचिव से पूछा कि बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए, खासकर गरीबों के बच्चों के लिए, सरकार क्या कर रही है. अदालत ने सरकार को फटकारते हुए कहा कि राज्य में शिक्षा की ऐसी बदतर स्थिति इसलिए है क्योंकि सूबे के सरकारी अफसर अपने बच्चों को राज्य से बाहर पढ़ाते हैं.

अदालत ने कहा कि राज्य में शिक्षा को ऐसी बदतर स्थिति से तभी उबारा जा सकता है जब तमाम अफसरों को बाध्य किया जाए कि उनके बच्चे राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ें. ऐसा लगता है कि सूबे में कानून का राज एक नारा बन कर रह गया है जिस पर कोई अमल नही कर सकता. राज्य में शिक्षा सबसे खराब हालत में हैं फिर भी इसकी सुध किसी को नहीं. न्यायमूर्ति डॉक्टर अनिल कुमार उपाध्याय की एकलपीठ ने कौशल किशोर ठाकुर की याचिका को सुनते हुए मुख्य सचिव को खुद से हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि बिहार में बेपटरी हुई शिक्षा व्यवस्था को कैसे वापस पटरी पर लाया जाए ताकि राज्य के भविष्य जिन गरीबों के करोड़ों बच्चों के कंधों पर है उनको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके.

पूर्णिया में गेस्ट टीचरों को हटाए जाने के मामले पर तल्ख टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से जवाब तलब किया. इस मामले में 23 मार्च को अगली सुनवाई होगी. तब मुख्य सचिव को कोर्ट के सवालों के जवाब देना होगा. सूबे में अभी बिहार बोर्ड के मैट्रिक की परीक्षा चल रही है और राज्य के नियोजित शिक्षक अपनी मांगो के समर्थन में हड़ताल पर चले गए हैं. शिक्षकों की हड़ताल के बावजूद शिक्षा विभाग मैट्रिक की परीक्षा ले रहा है. वहीं राज्य के विभिन्न स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य बुरी तरह से प्रभावित है.

अदालत के रुख पर रालोसपा ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला है. पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट कर कहा कि लाखों गरीब बच्चों के लिए गुणलत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर पच्चीस सूत्री मांग पत्र के साथ चरणबद्ध आंदोलन कर पीठ पर लाठी भी खाई लेकिन ढीठ नीतीश कुमार जी ने तो मानो बर्बादी की कसम खा रखी है. अब हाई कोर्ट नहीं समूचे बिहार की फटकार इन्हें जरूरी है. अदालत की सख्त टिप्पणी के बाद भी नीतीश कुमार की अंतरात्मा जागेगी, लगता तो नहीं है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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