अफरातफरी के माहौल पर केंद्र सरकार की सफाई

Samachar Jagat | Monday, 30 Mar 2020 06:03:23 AM
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देश में अफरातफरी का माहौल है. केंद्र सरकार के लॉकडाउन के फैसले पर लोग सहमत तो हैं लेकिन सवाल भी उठ रहे हैं. सवला सरकार के गैरजिम्मेदाराना रवैये पर उठ रहे हैं. सड़कों पर लॉकडाउन के बाद जो हालात है उससे निपटने में न सिर्फ केंद्र सरकार नाकाम रही है, राज्य सरकारें भी नाकाम रही हैं. दरअसल केंद्र सरकार ने लॉकडाउन का एलान तो कर दिया लेकिन उसने उन गरीबों-मजदूरों के बारे में तनिक भी नहीं सोचा, जो दूर-दराज से रोजी-रोटी की तलाश में दिल्ली, पंजाब, गुजरात, राजस्थान हरियाणा व दूसरे प्रदेश गए थे. उनका संकट लॉकडाउन ने बढ़ाया और फिर अफवाहों का दौर भी बढ़ा. दिल्ली में हजारों की तादाद में लोग सड़कों पर उतर आए. दरअसल उत्तर प्रदेश की अदूरदर्शिता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ट्वीट ने सारा मामला गड़बड़ किया. कोरोना के बहाने सियासी चालें चलीं गईं और नतीजा सामने है. सरकार ने इन गरीबों के बारे में किसी तरह की सोच-विचार किए बिना, राज्य सरकारों से भी समन्वय स्थापित किए बिना लॉकडाउन का एलान कर अपनी पीठ थपथपाती रही. जबकि इससे जो नतीजे सामने आरहे हैं वह भायावह है.

यूपी और बिहार को जाने के लिए लोगों का रेला सड़कों पर दिखाई दिया. वैसे देश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं. भारत में इस वायरस से पीड़ित लोगों की तादाद एक हजार के पार कर गई है और मौत का आंकड़ा भी 25 तक पहुंच गया है. पिछले चौबीस घंटे में छह लोगों की मौत हुई. कोविड-19 की वजह से अब तक 19 लोगों की जान गई है. सरकार के लॉकडाउन लागू करने के बाद देश के कई भागों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा है. सरकार पर आरोप लगने लगे थे कि सरकार ने बिना पूरी तैयारी के लॉकडाउन कर दिया जिससे गरीबों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही यह भी सवाल उठने लगे थे कि कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार की तरफ से पहले सही कदम नहीं उठाए गए थे. 

इस मामले पर सरकार की तरफ से अब प्रतिक्रिया आई है. सूचना और प्रसारण मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की तरफ से सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने से पहले ही देश की सीमाओं पर कम्प्रीहेंसिव रिस्पॉन्स सिस्टम लागू कर दी थी. साथ ही मंत्रालय ने कहा है कि 30 जनवरी को भारत में कोरोनावायरस के पहले मामले का पता चलने से बहुत पहले 18 जनवरी से ही चीन और हांगकांग से आने वाले अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही थी. वहीं इटली और स्पेन जैसे देशों ने थर्मल स्क्रीनिंग की शुरुआत पहले केस आने के 25 और 39 दिनों बाद की थी. मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि देश के तीस एयरपोर्ट और बारह बंदरगाहों पर भी स्क्रीनिंग की जा रही थी. 

कोरोना वायरस खतरे को देखते हुए सरकार ने गुरुवार को 1.70 लाख करोड़ रुपए से अधिक के राहत पैकेज की घोषणा की जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस से अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए रेपो दर, सीआरआर में कटौती और बैंकों को कर्ज की किस्त पर वसूली से तीन महीने तक रोकने की अनुमति दी है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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