पति सीएए समर्थक, योगी सरकार ने पत्नी का किया क्लिनिक सील

Samachar Jagat | Saturday, 14 Mar 2020 07:33:49 AM
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लखनऊ में बदनामी के होर्डिंग लगाने जाने पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से फटकार मिलने के बाद भी योगी आदित्यनाथ सरकार नहीं चेती है. सीएए और एनआरसी के खिलाफ आंदोलन को सरकार अपने तरीके से निपटने में लगी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आंदोलनकारियों के साथ दमनकारी रवैया अपनाने में पीछे नहीं हैं. हद तो यह है कि योगी आदित्यनाथ आंदोलन करने वालों से अपराधियों की तरह सलूक करने में जुटे हैं. दमन के लिए योगी आदित्यनाथ अपनी पुलिस का इस्तेमाल भी कर रहे हैं. पुलिस की भूमिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए उन पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे जो दुकानों में लूटपाट या घरों के अंदर घुस कर लोगों को तंग करते वायरल वीडियो में नजर आए थे. इन सबके बीच ही इलाहाबाद में हुई कार्रवाई से योगी आदित्यनाथ सरकार पर बदले की कार्रवाई के आरोप लग रहे हैं.

योगी सरकार ने अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने के लिए बदले की कार्रवाई पर उतर आई है. प्रयागराज में डॉ. माधवी मित्तल के अलट्रासाउंड सेंटर को इसलिए सील कर दिया गया क्योंकि उनके पति डॉ. आशीष मित्तल सीएए के खिलाफ रोशनबाग में चल रहे प्रदर्शन का सक्रिय समर्थन कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि नोटिस देने के दूसरे ही दिन प्रशासन उनका क्लीनिक सील करने पहुंचा और ऐसा तब हुआ जब खुद डॉ. माधवी मित्तल शहर में मौजूद नहीं थीं. बताया जा रहा है शाम में प्रशासन ने डॉ. मित्तल की क्लीनिक पर धावा बोला. तीन दिनों के लिए शहर से बाहर जाने की वजह माधवी मित्तल तब क्लिनिक में मौजूद नहीं थीं. प्रशासन के इंस्पेक्शन रिकार्ड में भी इस बात का जिक्र है.

बताया जा रहा है कि प्रशासन पूरे दल-बल के साथ उनकी क्लीनिक पर पहुंचा. क्लिनिक के स्टाफ ने प्रशासन को सारे रिकार्ड दिखाए. इस सिलसिले में रोजाना के मरीजों के रजिस्ट्र से लेकर हर तरह के रिकार्ड उसके पास थे और बाकी जानकारी हासिल करने के लिए स्टाफ ने एसडीएम को माधवी मित्तल से फोन पर बात कराने की बात कही. लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि उन्हें क्लीनिक सील करने का आदेश मिला है. जबकि कानून में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है. प्रशासन के पास कोई वैध कारण नहीं था जिसके आधार पर इस तरह की कोई कार्रवाई की जा सके. लेकिन अपनी कार्रवाई को वैध ठहराने के लिए प्रशासन ने एक दूसरी रिपोर्ट बनाई और उसमें कुछ अनियमितताएं भी दिखा दीं. 

डॉ. माधवी मित्तल ने 1983 में एमबीबीएस किया था उसके बाद पीजी यानी एमडी की डिग्री उन्होंने 1986 में एम्स से ली थी. दरअसल माधवी के पति आशीष मित्तल जो खुद भी एक डॉक्टर हैं, इलाहाबाद के रोशन बाग में चल रहे सीएए विरोधी आंदोलन में सक्रिय हैं. डॉ. आशीष ऑल इंडिया किसान मजदूर सभा के महासचिव भी हैं. इस मामले में डॉ. आशीष ने बताया कि प्रशासन ने पहले जो रिपोर्ट दी थी उसमें कोई अनियमितता नहीं थी. लेकिन अब उसने अनियमितता दिखाकर नई रिपोर्ट पेश दी है. उनका कहना था कि क्लीनिक की मालिक शहर से बाहर हैं यह दोनों रिपोर्टों में दर्ज है. बावजूद इसके प्रशासन ने क्लीनिक सील कर दी. उन्होंने बताया कि प्रशासन की जब डॉ. माधवी मित्तल से बात करवाने की कोशिश की गई तो उसने बात करने से इनकार कर दिया. प्रशासन ने साफ कहा कि सील करने का निर्देश मिला है लिहाजा वो सील करके जाएंगे. 

डॉ. आशीष मित्तल के मुताबिक उनकी पत्नी माधवी का किसी भी राजनीतिक दल या गतिविधि से कुछ भी लेना-देना नहीं है. वे शुद्ध रूप से एक प्रोफेशनल डॉक्टर हैं. उन्होंने कहा कि वे राजनीति करते हैं और ऐसा करना गैरसंवैधानिक नहीं है. लिहाजा मेरी किसी गतिविधि का बदला अगर मेरी पत्नी से लिया जा रहा है तो यह पूरी तरह से न केवल गैरकानूनी और गैर संवैधानिक है बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी खुला उल्लंघन है. कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध किया है. प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिस्ट फोरम (पीएमएसएफ) ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया जताई. उसने कहा है कि योगी सरकार ने इस हरकत से खुद का स्तर और गिरा लिया है. हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील कमल कृष्ण राय ने जब प्रशासनिक अमले का नेतृत्व कर रहे एसडीएम से कार्रवाई का कानूनी आधार पूछा तो वे बगले झांकने लगे. उन्होंने कहा कि उन्हें सील करने का यह आदेश ऊपर से मिला है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).



 

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