कांग्रेस भी पहुंची सप्रीम कोर्ट, विधायको के अपहरण का लगाया आरोप

Samachar Jagat | Wednesday, 18 Mar 2020 07:12:33 AM
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मध्यप्रदेश का सियासी नाटक अब भोपाल की बजाय दिल्ली पहुंच गया है. सुप्रीम कोर्ट में सियासी जंग लड़ी जारही है. मेरे और तेरे विधायक का खेल कब तक चलेगा, यह देखना दिलचस्प है. इन कानूनी दांवपेच के बीच ही अपने-अपने विधायकों को बचाने का खेल भी चल रहा है. हालांकि बंगलूर ले जाए गए विधायकों ने मंगलवार को बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस की और बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री कमलनाथ से खतरा है. लेकिन कांग्रेस अभी भी मान रही है कि उसके विधायकों को बंधक बना कर रखा गया है और इसी अर्जी के साथ कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पहुंचे गई है. मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की.



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याचिका में कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने सोलह विधायकों को बंधाक बना रखा है. याचिका में कहा गया है कि सोलह विधायकों की अनुपस्थिति में बहुमत परीक्षण नहीं हो सकता. कांग्रेस पार्टी ने फ्लोर टेस्ट के लिए राज्यपाल के निर्देश पर भी सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि कमलनाथ सरकार पहले ही सदन में बहुमत खो चुकी है. कांग्रेस ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार को आदेश दे कि वह मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों को सोलह विधायकों से मिलने और बात करने की इजाजत दे जो कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं. इस तरह कांग्रेस के सोलह विधायकों को बंधक रखना गैरकानूनी, असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 और कानून के शासन के खिलाफ है. 

कांग्रेस ने अदालत से कहा कि मध्यप्रदेश विधान सभा के चल रहे बजट सत्र में भाग लेने के लिए विधायकों को सक्षम किया जाए और अनुमति दी जाए. सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करे कि विश्वास मत तभी हो सकता है जब मध्यप्रदेश विधानसभा के सभी निर्वाचित विधायक उपस्थित हों. सुप्रीम कोर्ट से आदेश मांगा गया है कि राज्यपाल के निर्देश को अवैध, असंवैधानिक घोषित किया जाए. कांग्रेस का कहना है कि अदालत आदेश जारी करे कि कांग्रेस के बाईस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है और फलस्वरूप उनकी सीटें खाली हो गई हैं, तो विश्वासमत तभी हो सकता है जब उक्त 22 निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व हो और यह कानून के मुताबिक खाली सीटों के लिए उपचुनाव करके हो सकता है.

सोमवार को मध्य प्रदेश में जारी सियासी उठापटक के बीच विधानसभा को कोरोना वायरस की वजह से 26 मार्च तक स्थगित कर दिया गया. फ्लोर टेस्ट की चुनौती झेल रहे मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए यह बड़ी राहत थी क्योंकि उनके बीस से ज्यादा विधायक अपना इस्तीफा दे चुके हैं. लेकिन अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है भाजपा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है, राज्यपाल ने कहा था कि कि 16 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराया जाए लेकिन विधानसभा अध्यक्ष फ्लोर टेस्ट नहीं करा रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान की ओर से सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई कि फ्लोर टेस्ट जल्दी कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की अर्जी पर कमलनाथ को नोटिस जारी कर 24 घंटों में जवाब देने को कहा है. माना जा रहा है कि बुधवार को इस मामले पर सुनवाई हो सकती है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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