कोरोना वायरस से खतरे में रोजगार और नौकरियां

Samachar Jagat | Monday, 23 Mar 2020 08:13:58 AM
4431994037616851

कोरोना वायरस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. धीरे-धीरे ही सही उसने दुनिया को पूरी तरह गिरफ्त में ले लिया है. चीन से शुरू हुआ यह संक्रमण भारत से लेकर खाड़ी देशों तक पसर गया है. दुनिया भर में इस वायरस की चपेट में करीब तीन लाख से ज्यादा लोग आ चुके हैं. भारत में भी खतरा लगातार बढ़ रहा है. कोरोना वायरस से तीन सौ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और पांच लोगों की मौत हो चुकी है. इस वायरस का असर अब रोजगार और नौकरियों पर भी पड़ा है.



loading...

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) भी इसे लेकर चिंतित है. आईएलओ का कहना है कि यह सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा श्रम और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा. आईएलओ की मानें तो कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में ढाई करोड़ नौकरियां ख़तरे में हैं. संस्था के मुताबिक़ अंडर एम्प्लॉयमेंट भी बड़े स्तर पर बढ़ सकता है, क्योंकि कोरोना की वजह से काम के घंटे कम किए जाएंगे और वेतन में कटौती होगी. विकासशील देशों में स्वरोजगार अक्सर इन बदलावों को कम करने का काम करते हैं, लेकिन सर्विस प्रोवाइडर और सामान की आवाजाही पर भी पाबंदी की वजह से इस बार वो भी मदद नहीं कर पाएगा.

भारत में भी एविएशन, ट्रैवल, होटल, रिटेल जैसे तमाम सेक्टरों पर कोरोना की वजह से असर पड़ा है. दुनिया भर की सरकारों ने कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए यात्रा पर पाबंदी लगा डाली है. सौ से ज़्यादा देशों में कोरोना की वजह से यात्राओं पर रोक लगा दी गई है. जिससे पर्यटन व ट्रैवल उद्योग को बहुत नुक़सान हुआ है. क्योंकि एयरलाइंसों को उड़ानें रद्द करनी पड़ रही हैं और लोग अपनी यात्राओं को भी रद्द कर घरों तक सीमित रह रहे हैं.

भारत ने फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, ग्रीस, इटली, स्पेन, आइसलैंड, हंगरी, पोलैंड, आयरलैंड, फिनलैंड ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गेरिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, नॉर्वे, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, रोमानिया समेत 36 देशों से किसी भी यात्री के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. रविवाय यानी 22 मार्च से अंतरराष्ट्रीय विमानों पर पाबंदी लगा दी गई है. इसलिए अब विदेश आना-जाना पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. वायरस के डर से और सरकार की सलाह को देखते हुए लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं. जिससे होटल और रेस्तरां का काम बुरी तरह प्रभावित हुआ है. राजधानी दिल्ली के साथ-साथ कई राज्यों में रेस्तरां बंद कर दिया गए हैं.

इन वजहों से जो भी नुक़सान हो रहा है, उसका सबसे ज़्यादा असर वहां काम करने वाले लोगों पर पड़ रहा है. फ़ेडरेशन फ़ॉर एसोसिएशन इन इंडियन टूरिज़म एंड हॉस्पिटैलिटी के अधिकारी आशीष गुप्ता के मुताबिक कोरोना से बचने के लिए लोगों को यात्रा नहीं करने के लिए कहा गया है. जिससे क़रीब पांच लाख करोड़ रुपए की लागत वाले इस उद्योग पर बुरा असर पड़ सकता है. पर्यटन उद्योग से किसी न किसी तरीक़े से क़रीब साढ़े पांच करोड़ लोग जुड़े हुए हैं, इनमें ट्रैवल एजेंट, टूर ऑपरेटर, होटल, टूरिस्ट टैक्सी, टूरिस्ट गाइड, हैंडलूम शॉप, रेस्तरां में काम करने वाले लोग शामिल हैं.

ऐसा ही चलता रहा तो करीब सत्तर फीसद लोगों की नौकरी जा सकती है. आशीष गुप्ता ने कहा कि इस संकट से निकालने की जिम्मेदारी सरकार की है. वे कहते हैं कि सरकार से हमारी अपील है कि जिन लोगों को हर महीने ईएमआई देनी होती है, उसे 12 महीने के लिए आगे बढ़ा दें. जिससे संभलने के लिए 12 महीने का समय मिल जाए. लोगों को बैंक से बिना इंटरेस्ट के वर्किंग कैपिटल लेने दें. इनकम टैक्स, जीएसटी, बार की एक्साइज़ परमिशन की फीस, लाइसेंस रिन्यू की फीस आदि को भी बारह महीने के लिए बढ़ा दें. सरकार एक फंड बनाए. ताकि जिन लोगों की नौकरी जाएगी. उन्हें हालात ठीक होने तक डायरेक्ट पैसा मिले. जीएसटी हॉलीडे घोषित कर दिया जाए. इससे जब भी हालात ठीक होने लगेंगे तो जीएसटी फ्री होने की वजह से लोग ज़्यादा घूमने निकलेंगे.

पहले से मुश्किल में चल रहे एविएशन सेक्टर पर कोरोना ने दोहरी मार की है. सेंटर फॉर एविएशन यानी सीएपीए ने हाल में जारी अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि एयर इंडिया समेत भारत की तमाम एयरलाइन को जनवरी-मार्च के क्वार्टर में 600 मिलियन डॉलर तक का नुक़सान हो सकता है. इंडिगो एयरलाइन ने गुरुवार को घोषणा की कि वह अपने वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन में कटौती करेगा. इंडिगो के सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने कहा है कि वे ख़ुद अपना वेतन 25 फीसद कम लेंगे और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बीस फीसद अपना वेतन कम लेंगें. वहीं वाइस प्रेसिडेंट और कॉकपिट क्रू अपना वेतन पंद्रह फीसद कम लेगें. कटौती की घोषणा करते हुए दत्ता ने कहा कि हमें ध्यान रखना होगा कि हमारा पैसा ख़त्म न हो जाए. दअसल सीएपीए के मुताबिक़ अगर सरकार एविएशन सेक्टर को बचाने के लिए ज़रूरी क़दम नहीं उठाती तो कई भारतीय एयरलाइन को कैश की कमी की वजह से मई या जून तक ऑपरेशन बंद करना पड़ेगा.

गो एयर ने अपने विदेशी पायलटों के करार रद्द कर दिया हैं. गो एयर ने घोषणा की कि वह अपने इंटरनेशनल ऑपरेशन को रोक रहा है और रोटोशन के आधार पर अपने स्टाफ को लीव विदाउट पे प्रोग्राम ऑफर कर रहा है. आईएलओ के मुताबिक़ कुछ समूहों पर नौकरियां जाने का बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे असमानता की खाई और बढ़ेगी. इनमें वे लोग शामिल होंगे जो पहले से कम सुरक्षित और कम वेतन पर काम करते हैं. इससे रोजगार और आमदनी कम होगी. इसी आशंका को देखते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश के नाम संबोधन में कहा था कि संकट के इस समय में मेरे देश के व्यापारी जगत, उच्च आय वर्ग से भी आग्रह है कि अगर संभव है तो आप जिन-जिन लोगों से सेवाएं लेते हैं, उनके आर्थिक हितों का ध्यान रखें. हो सकता है आने वाले कुछ दिनों में, ये लोग दफ्तर न आ पाएं, आपके घर न आ पाएं. ऐसे में उनका वेतन न काटें, पूरी मानवीयता के साथ, संवेदनशीलता के साथ फ़ैसला लें. हमेशा याद रखिएगा, उन्हें भी अपना परिवार चलाना है, अपने परिवार को बीमारी से बचाना है.

रोज़गार कम होगा तो लोगों के पास पैसा नहीं होगा. इससे लोग ज़रूरत का सामना नहीं ख़रीद पाएंगे. जिससे सामान और सर्विसेस की खपत कम हो जाएगी. इससे सीधे तौर पर कारोबार पर तो असर पड़ेगा ही, साथ ही अर्थव्यवस्था को भी भारी नुक़सान होने की संभावना है. अमेरीकी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग के मुताबिक़ कोरोना वायरस का संकट वैश्विक जीडीपी को नुक़सान पहुंचा रहा है. फिच रेटिंग्स ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को भी 5.6 फीसद से घटाकर 5.1 फीसद कर दिया. रेटिंग एजेंसी का कहना है कि कोरोना वायरस के प्रकोप से निवेश और निर्यात प्रभावित होगा. हालांकि आईएलओ का कहना है कि अगर 2008-09 के वैश्विक आर्थिक संकट की तरह ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पॉलिसी बनाई जाए तो वैश्विक बेरोज़गारी के असर को कम किया जा सकता है.

संस्था के मुताबिक़ कई तरह के क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है जिसमें सामाजिक सुरक्षा बढ़ाना, शॉर्ट-टाइम वर्क, पेड लीव और दूसरी सब्सिडी देना, साथी ही सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों को आर्थिक सहयोग और टैक्स में राहत देना शामिल है. इसके अलावा संस्था ने कुछ ख़ास सेक्टरों को आर्थिक समर्थन देने की सलाह भी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से उपज रही आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्री के नेतृत्व में सरकार ने एक कोविड-19 इकोनॉमिक रेस्पॉन्स टास्क फ़ोर्स के गठन का फैसला किया है. बहरहाल संकट अर्थव्यवस्था पर है और नोटबंदी व जीएसटी के बाद कोरोना लाखों लोगों की नौकरियां लील लेगी, यह बड़ा खतरा भी है और इससे निपटने के लिए सरकार ने किसी तरह का कदम नहीं उठाया है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


loading...


 
loading...

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!




Copyright @ 2020 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.