कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही दिया इस्तीफा, पर नाटक तो अब शुरू होगा

Samachar Jagat | Friday, 20 Mar 2020 08:53:05 PM
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मध्यप्रदेश में पंद्रह महीने पुरानी कमलनाथ सरकार को आखिरकार जाना पड़ा. जैसे कयास लगाए जा रहे थे. वैसा ही हुआ. फ्लोर टेस्ट से पहले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया. भाजपा अब फिर से सत्ता में आएगी लेकिन उसके लिए भी राह आसान नहीं होगी. सरकार गिराने और बचाने का खेल उसके बाद भी जारी रहेगा. कमलनाथ ने प्रेस कांफ्रेंस में इशारों-इशारों में इस बात के संकेत दिए भी हैं. कमलनाथ ने इस्तीफा देने से पहले कहा कि आज के बाद कल और कल के बाद परसों भी आएगा. इसके सियासी मतलब निकाले जा रहे हैं. मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए भी राह बहुत आसान नहीं होने वाली है. माना जा रहा है कि भाजपा की राह भी कांटों भरी है. सत्ता में उसकी वापसी तो हो गई लेकिन मुख्यमंत्री पद पर कौन काबिज होगा, इसे लेकर भाजपा में भी कम सर फुट्टवल नहीं है. भाजपा के नेताओं की मानें तो शिवराज सिंह चौहान का मुख्यमंत्री बनना तय नहीं है. कोई नया चेहरा मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा सामने ला सकती है. वैसे भी सरकार बना तो लेगी भाजपा लेकिन बहुमत इतना बड़ा नहीं है और इसे बचाए रखने की चुनौती भाजपा के सामने भी होगी.



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पंद्रह महीनों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के बाद कमलनाथ ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफे दे दिया. सुप्रीम कोर्ट ने दो दिनों तक चली सुनवाई के बाद कमलनाथ सरकार को शुक्रवार को शाम पांच बजे तक फ्लोर टेस्ट के आदेश दिए हैं. लेकिन कमलनाथ ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कहा था कि मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र फिर से बुलाया जाए और कमलनाथ सरकार शुक्रवार शाम पांच बजे बहुमत हासिल करे. हालांकि, रात एक बजे तक विधानसभा की कार्यसूची जारी नहीं हुई थी, नाटकीय घटनाक्रम में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव देर रात विधानसभा पहुंचे और अध्यक्ष की मेज पर अपनी चिठ्ठी और फैसले की प्रति रखकर आए थे.

शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कमलनाथ ने कहा कि जनता ने पांच साल का मौका दिया था ताकि प्रदेश को सही रास्ते पर लाया जा सके. इसकी नई पहचान बने. मध्य प्रदेश की तुलना बड़े राज्यों से हो. पंद्रह साल भाजपा को मिले और मुझे पंद्रह महीने मिले. इन पंद्रह महीनों में प्रदेश की जनता गवाह है कि मेरे किए गए काम भाजपा को रास नहीं आए. जब सरकार बनी तो पहले ही दिन से साजिश शुरू कर दी थी भाजपा ने.

उन्होंने कहा कि आज हमारे 22 विधायकों को कर्नाटक में बंधक बनाने का काम किया गया. करोड़ो रुपए खर्च कर खेल खेला गया. एक महाराज और भाजपा ने लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की. प्रदेश के साथ धोखा करने वाले लोभियों और बागियों को जनता माफ नहीं करेगी. कई बार हमने विधानसभा में बहुमत साबित किया है. कमलनाथ ने कहा कि मेरे साथ विश्वासघात किया गया मध्य प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात किया गया है. पंद्रह महीनों में हमने किसानों का कर्ज माफ किया. भाजपा ने हमारी सरकार के साथ साजिश करके किसानों को धोखा दिया है.

कमलनाथ ने कहा कि देश के लोग देख सकते हैं कि बंगलुरु में बंधक बनाए गए विधायकों के पीछे सच्चाई क्या है. सच सामने आएगा. लोग माफ नहीं करेंगे. मेरी कोशिश रही कि कांग्रेस महल में नहीं बल्कि महल कांग्रेस के अंदर आए. लेकिन आज के बाद कल और कल के बाद परसों भी होगा, इसका इंतजार लोगों को करना होगा. दरअसल ऐसा कर उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भी निशाना साधा और भाजपा पर भी. कमलनाथ ने कहा कि भाजपा नेता सोचते हैं कि मेरे प्रदेश को हराकर वे जीत जाएंगे, वे ऐसा कभी नहीं कर सकते. मैंने राजनीतिक जीवन में कुछ मूल्यों का पालन किया है और उन मूल्यों का पालन करते रहेंगे. मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि वे कभी सफल नहीं होंगे.

कमलनाथ ने यह भी कहा कि हमारी सरकार पर भ्रष्टाचार पर आरोप नहीं है. हमने प्रदेश को माफिया मुक्त कराने का प्रयास किया. भाजपा नहीं चाहती थी कि माफिया खत्म हो. हमने किसानों का कर्ज माफ किया. भाजपा ने हमारी सरकार के साथ साजिश करके किसानों को धोखा दिया है. मैंने गोमाता के लिए गोशालाएं खोलीं वह भाजपा को रास नहीं आईं. सच तो यह है कि भाजपा ने लोकतंत्र की हत्या की है. मध्यप्रदेश में जारी एक नाटक का पटाक्षेप तो हो गया लेकिन अभी कई और नाटक देखने को मिलेंगे. भाजपा के अंदर से भी और भाजपा के बाहर से भी. सिंधिया भले राज्यसभा के सदस्य बना डाले गए हों लेकिन चुनौती उनके लिए भी है और शिवराज सिंह चौहान के लिए भी. इंतजार करें नए नाटक का. देर-सवेर वह भी शुरू ही होने वाला है. (राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर सटीक विश्लेशण के लिए पढ़ें और फॉलो करें).


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