Rajya Sabha में उठी आंगनवाड़ी और आशा कर्मियों का मानदेय बढ़ाने की मांग

Samachar Jagat | Wednesday, 23 Sep 2020 02:30:02 PM
Demand raised for honorarium for Anganwadi and Asha workers in Rajya Sabha

नयी दिल्ली।  राज्यसभा में बीजू जनता दल के एक सदस्य ने आंगनवाड़ी और आशा कर्मियों के मानदेय में वृद्धि करने की मांग करते हुए बुधवार को कहा कि इन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भी निरंतर कार्य किया है। बीजद के सुभाष चंद्र सिह ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान लगातार सुरक्षित दूरी बनाने, हाथ धोते रहने और मास्क पहनने का परामर्श दिया जा रहा है। इस दौरान आंगनवाड़ी और आशा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार काम किया है।

सिह ने कहा ''यह विडंबना ही है कि संकट के समय में भी अथक परिश्रम करने वाली आंगनवाड़ी कर्मियों को मात्र 4,5०० रुपये और आशा कर्मियों को केवल 2,5०० रुपये का मानदेय मिलता है जो महंगाई और उनकी सेवाओं को देखते हुए बहुत ही कम है।’’
बीजद सदस्य ने कहा कि ओडिशा में राज्य सरकार ने इन कर्मियों को कुछ राहत दी है लेकिन यह राहत पर्याप्त नहीं कही जा सकती।

उन्होंने सरकार से मांग की कि आंगनवाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ा कर 15,००० रुपये और आशा कर्मियों का मानदेय बढ़ा कर 1०,००० रुपये किया जाए। उन्होंने कहा ''केंद्र सरकार को आंगनवाड़ी कर्मियों और आशा कर्मियों के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा भी करनी चाहिए।’’ उल्लेखनीय है कि ज्यादातर विपक्षी दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे। सदन में रविवार को हुए हंगामे को लेकर आठ विपक्षी सदस्यों के निलंबन के विरोध में विपक्ष के कई दलों के सदस्य सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर रहे हैं।

शून्यकाल में ही असम गण परिषद के वीरेंद्र प्रसाद वैश्य ने भारत-म्यामां-थाईलैंड त्रिपक्षीय अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना अगर समय पर पूरी हो जाएगी तो पूर्वोत्तर के राज्यों का म्यामां, थाईलैंड, सिगापुर और दक्षिण एशियाई देशों के साथ सीधा संपर्क होगा और इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में यहां के लोगों को लाभ मिलेगा।

वैश्य ने यह भी कहा कि सीमा पर चीन के साथ आज जो हालात हैं उन्हें देखते हुए भारत को अपने अन्य पड़ोसी देशों के साथ ज्यादा गहरे रिश्ते रखने चाहिए और मारत-म्यामां-थाईलैंड त्रिपक्षीय अंतरराष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना इस सामरिक नजरिये से भी अहम होगी। उन्होंने सरकार से यह परियोजना समय पर पूरी करने की मांग की।

शून्यकाल में ही बीजद की ममता मोहंती ने कुर्मी महंत समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा करने से इस समाज के लोगों का पिछड़ापन दूर कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी। भाजपा के डी पी वत्स ने अदालतों में मुकदमा चलने की वजह से परियोजनाओं, खास कर रेल और सड़क परियोजनाओं के वर्षों तक लंबित रहने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा ''एक परियोजना तो 45 साल से अटकी हुई है। इसकी लागत बढ़ कर अब तो न जाने क्या हो चुकी होगी।’’

उन्होंने मांग कि ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए कि परियोजनाएं तय समय-सीमा में पूरी हो जाएं ताकि उनकी लागत पर भी अतिरिक्त भार न पड़े और विकास कार्य भी आगे बढ़े। पीडीपी के नजीर अहमद लावे ने जम्मू कश्मीर में सरकारी नौकरियों में लंबे समय से अनुबंध पर काम करने वाले लोगों का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि इन लोगों को नियमित किया जाए और इनके वेतन में भी समुचित वृद्धि की जाए।

भाजपा सदस्य के सी राममूर्ति ने कर्नाटक में पिछले तीन साल से लगातार बाढ़ आने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसलें इस साल बाढ़ से खराब हो गईं और 61 लोगों की जान चली गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की। इसके बाद आसन की अनुमति से विशेष उल्लेख के जरिये भाजपा के सतीश चंद्र दुबे, डॉ विकास महात्मे, कैलाश सोनी, कामाख्या प्रसाद तासा, मनोनीत डॉ सोनल मानसिह और शिवसेना के अनिल देसाई ने लोक महत्व से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए। (एजेंसी)



 

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