IAS-RAS Success Story : चार प्रयास विफल साबित हुए तो लोगों ने दूसरी नौकरी करने की सलाह तक दे डाली, आखिर में पांचवें प्रयास में सिविल सर्विसेज में लाए 797वीं रैंक, अब आरएएस में टॉप-10 में बनाई जगह, मिलिये RAS 2018 में छठी रैंक लाने वाले यशवंत मीणा से..!

Samachar Jagat | Friday, 23 Jul 2021 07:11:22 PM
IAS-RAS Success Story: If four attempts proved to be unsuccessful, people even gave advice to do second job, finally in fifth attempt brought 797th rank in civil services, now made place in top-10 in RAS, meet sixth in RAS 2018. From Yashwant Meena, who brought the rank..!

इंटरनेट डेस्क। सक्सेज स्टोरी की आज की स्टोरी में हम जयपुर के 2019 बैच के आईएएस यशवंत मीणा की कहानी से रू-ब-रू होंगे। यशवंत मीणा ने 2019 में यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में 797 वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को पूरा किया। लेकिन उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए जीत तोड़ मेहनत की। आखिरकार उन्हें सफलता का इनाम आईएएस के रूप में मिला। यूपीएससी में सफलता प्राप्त करने वाले कुछ लोगों का धैर्य जानकर आप हैरान रह जाएंगे। इतना ही नहीं सफलता जब कदम चूमती है तो लगातार इंसान सफलता होता जाता है। आईएएस की ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने हाल ही में जारी हुए आरएएस 2018 परीक्षा में टॉप-10 में जगह बनाई है। उन्होंने ओवरआल छठी रैंक मिली है। 

यशवंत मीना को पढ़ाई के साथ पेंटिंग और गार्डिनिंग का भी शौक रहा है। लेकिन वो अपने लक्ष्य को लेकर अडिग रहे। उनके माता-पिता ने बताया कि RAS में बार-बार इंटरव्यू की डेट बदलने से उसे हैदराबाद से आना पड़ता था। यशवंत अभी हैदराबाद में इंडियन रेलवे अकाउंट सर्विस की ट्रेंनिग ले रहे हैं। माता पिता ने बताया कि आरपीएससी द्वारा आरएएस इंटरव्यू की तारीख कोरोना के कारण बार-बार चेंज हो रही थी। ऐसे में यशवंत ने पहले तो इंटरव्यू देने आने से ही मना कर दिया। लेकिन उनके माता-पिता ने दवाब बनाया तब वो आए और टॉप-10 में अपनी जगह बनाई। यशवंत अब आईएएस छोड़कर आरएएस जॉइन करेंगे। 

इस परीक्षा में मेहनत के साथ धैर्य की भी परीक्षा होती है। यशवंत को यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता पांचवें प्रयास में मिली। यहां तक पहुंचने के दौरान उनके कई लोगों के ताने तक सुनने पड़े। कई लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया था कि आईएएस तुम्हारे बस की बात नहीं है। कोई और छोटी-मोटी नौकरी की तैयारी करो जल्दी नौकरी मिल जाएगी। वरना आईएएस के चक्कर में जिंदगी पर मेहनत ही करते रह जाओगे। इतना कुछ होने के बाद भी यशवंत अपने फैसले से हटे नहीं। उन्होंने आईएएस के अलावा किसी से समझौता नहीं किया। 

उन्हें यकीन था कि वे अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत जल्द ही सफलता हासिल कर लेंगे। लेकिन कुछ गलतियां उनसे हुईं जिसकी वजह से सफलता के करीब जाकर भी यशवंत फेल हो गए। 4 प्रयासों में उन्हें असफलता मिली। लेकिन यहां सबसे बड़ी चीज उनका धैर्य था जिसे उन्होंने हमेशा बनाए रखा।  वे मानते हैं कि आप किसी भी चीज को कितना भी अच्छी तरीके से पढ़ लें, लेकिन जब तक आप उसे अच्छी तरह से लिखना नहीं सीख जाएंगे तब तक आप अच्छे नंबर नहीं ला सकते। इसलिए हर कैंडिडेट को ज्यादा से ज्यादा आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस करनी चाहिए। 

 



 

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