एलजीबीटीक्यू लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार व्यथित करता है: कंबार

Samachar Jagat | Friday, 28 Feb 2020 05:22:31 PM
Inhuman dealings with LGBTQ people: Kambar

नयी दिल्ली। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने कहा है कि एलजीबीटीक्यू लोगों के साथ किए जाने वाला अमानवीय व्यवहार उन्हें व्यथित करता है और सामाजिक तौर पर इन्हें पूरी तरह स्वीकार करना होगा तभी एक संतुलित समाज की कल्पना की जा सकेगी।

साहित्य अकादेमी ने गुरुवार को पहली बार एलजीबीटीक्यू कवि सम्मलेन का आयोजन किया जिसकी कविता पाठ करने आये लोगों ने खूब सराहना की। कवि सम्मलेन के मुख्य अतिथि एवं अंग्रे•ाी के प्रख्यात कवि होशांग मर्चेंट ने अपनी तीन कविताओं का इस दौरान पाठ किया, जिनमें एक कविता प्रख्यात गणितज्ञ रामानुजम की मृत्यु पर केंद्रित थी और उसका शीर्षक ‘रोशनी’ था। एलजीबीटीक्यू लोगों को होने वाली परेशानियों पर केंद्रित कविता में उन्होंने मंजनू को पत्थर मारने का प्रतीक प्रयुक्त किया।

साहित्य अकादमी के सचिव के. श्रीनिवासराव ने इस मौके पर कहा, ‘‘ हम लोग भारत के सभी कवियों का बिना भेदभाव के सम्मान करते हैं और उन्हें मंच प्रदान करते हैं।’’ अंग्रेजी के प्रख्यात लेखक आर. राज राव ने कहा, ‘‘ करीब 17 महीने पहले स्थितियां दूसरी थी और यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि हमारे प्रतिनिधि इस तरह किसी सार्वजनिक मंच पर अपनी अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत कर सकेंगे।’’ उन्होंने कई विदेशी कानूनों की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी लड़ाई अभी भी जारी है।
रायपुर से आये एक्टिविस्ट कवि आकाश ने यूनीवार्ता से कहा, ‘‘भारत सरकार ने हमें ये मंच दिया, इस पर हमें अच्छा महसूस हो रहा है, अगर समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकार इस तरह के आयोजन करायें तो हमारा उत्साह बढ़ेगा, इसके अलावा सरकार को हमारे समुदाय का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में अभी का$फी काम करने गुंजाइश है।’’


‘‘दुख के पाठ पढक़र और निर्मल हुई मैं, पाकर तिरस्कार तुम्हारा अनजाने में सबल हुई मैं’’, कविता का पाठ करने वाली रवीना बारिहा ने कहा, ‘‘इस तरह के कार्यक्रम निरंतर हों, जिससे हमारे विमर्श के द्वार खुलें। हम कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं और परेशानियों को सामने लेकर आते हैं।’’ उन्होंने कहा कि सेक्सुअल माइनॉरिटी की भावनाओं को बाहर लाने का ये बेहतर मंच है। सुश्री बारिहा पिछले छह महीने से दिल्ली में हैं। यहां हुई हालिया घटनाओं पर उन्होंने यूनीवार्ता से कहा, ‘‘ हमें अपना मत जताने के लिये कई प्लेटफार्म दिये गये हैं, हमारी कोशिश हो कि हम उसका शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल करे, भहसा के लिये कहीं कोई जगह नहीं होनी चाहिए।’’


गौरतलब है कि साहित्य अकादमी ने इस सम्मेलन का आयोजन करके लिखने-पढऩे में रुचि रखने वाले एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों को अपनी बात कहने का एक मंच दिया है। इससे पहले पिछले साल ट्रांसजेंडरों के लिये कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था1 सभी कविताओं का मूल स्वर उनके प्रति उपेक्षा से भरा सामाजिक व्यवहार था। देश के विभिन्न हिस्सों से आये एलजीबीटीक्यू समुदाय की अदिति आंगिरस, चाँदिनी, गिरीश, शांता खुराई, रेशमा प्रसाद, अब्दुल रहीम, आकाश (राय) दत्त चौधरी, तोशी पांडेय, विशाल भपजाणी, अलगू जगन और डेनियल मेंडोंका ने इस कार्यक्रम में अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं।



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
ताज़ा खबर

Copyright @ 2020 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.