मुलायम के इटावा में आज भी शिद्दत से याद किये जाते हैं कांशीराम

Samachar Jagat | Saturday, 14 Mar 2020 12:05:12 PM
Kanshi Ram is still remembered fondly in Mulayam's Etawah

इटावा। दलितों की राजनीति की बदौलत देश के लोकप्रिय नेताओं में शुमार रहे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) संस्थापक कांशीराम को आज भी समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिह यादव के गृह जिले इटावा में पूरे आदर भाव के साथ याद किया जाता है। इटावा के लोगो ने पहली बार कांशीराम को वर्ष 1991 के चुनाव मे जितवा कर संसद की दहलीज के पार पहुंचाया था। इसी वजह से कांशीराम को इटावा से खासा लगाव रहा है। यहां गौर करने वाली बात है कि इटावा लोकसभा क्षेत्र की अनारक्षित सीट पर हुये उस उपचुनाव में बसपा प्रत्याशी कांशीराम समेत कुल 48 प्रत्याशी मैदान में थे। श्री कांशीराम को एक लाख 44 हजार 29० मत मिले जबकि उनके समकक्ष भाजपा प्रत्याशी लाल सिह वर्मा को 22 हजार 466 मत कम मिले थे।



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पंजाब के रोपड जिले में 15 मार्च, 1934 को जन्मे कांशीराम ने दलितों को एकजुट करके उन्हें राजनीतिक ताकत बनाने का अभियान 197० के दशक में शुरू किया, कई वर्षों के कठिन परिश्रम और प्रभावशाली संगठन क्षमता का परिचय देते हुए उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को सत्ता के गलियारों तक पहुँचा दिया।
विज्ञान स्नातक कांशीराम ने दलित राजनीति की शुरूआत बामसेफ नाम के अपने कर्मचारी संगठन के जरिए की, उन्होंने दलित कामगारों को एक सूत्र में बाँधा और उनके निर्विवाद रूप से उनके सबसे बडे नेता रहे। पुणे में डिफेंस प्रोडक्शन डिपार्टमेंट में साइंटिफिक असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके कांशीराम ने नौकरी छोडकर दलित राजनीति का बीडा उठाया।

बामसेफ के बाद उन्होंने दलित-शोषित मंच डीएस-फोर का गठन 198० के दशक में किया और 1984 में बहुजन समाज पार्टी बनाकर चुनावी राजनीति में उतरे। 199० के दशक तक आते-आते बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में निर्णायक भूमिका हासिल कर ली। कांशीराम ने हमेशा खुलकर कहा कि उनकी पार्टी सत्ता की राजनीति करती है और उसे किसी भी तरह से सत्ता में आना चाहिए क्योंकि यह दलितों के आत्मसम्मान और आत्मबल के लिए जरूरी है। 

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