लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि पूरी दुनिया इस समय कोरोना की महामारी से जूझ रही है

Samachar Jagat | Friday, 20 Mar 2020 04:03:13 PM
Lok Sabha Speaker Om Birla said that the whole world is in Corona at this time Battling an epidemic

 नई  दिल्ली ,प्रधानमंत्री ने गुरुवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में सावधान रहने की बात कही थी जिसे देखते हुए लोगों को डरना नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री ने 22 मार्च रविवार को 'जनता कफ्र्यू’ की बात कही है वह सामाजिक दूरी बनाने की एक प्रकिया है और संसद सरकार के संकल्प के साथ है। सभी दल इससे सहमत हैं। संकट के समय पूरा देश एक हो जाता है और यही भारतीय लोकतंत्र की खूबी है।



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कांग्रेस के हिबी इडेन ने कहा कि कोरोना से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। इसे देखते हुए केन्द्र सरकार को आम आदमी को राहत देने के कदम उठाने चाहिये थे, लेकिन इसकी बजाय केन्द्र सरकार ने पेट्रोल तथा डीजल पर करों एवं शुल्कों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि कर उन पर और बोझ डाल दिया है। इससे पहले मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी पेट्रोल-डीजल पर कई बार उत्पाद शुल्क बढ़ाये गये। उन्होंने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की माँग करते हुए उन पर उत्पाद शुल्क हटाने की माँग की।

कांग्रेस के ही ए. बसंतकुमार ने कोरोना वायरस 'कोविड-19’ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की माँग करते की। उन्होंने कहा कि कोरोना के मद्देनजर सरकार को छोटे कारोबारियों के बारे में उचित योजना बनानी चाहिये। बैंकों से लिये गये ऋण का पुनर्गठन किया जाना चाहिये। गरीब परिवारों को दो-दो हजार रुपये की दर से सहायता देनी चाहिये क्योंकि इस बीमारी की वजह से बाजार बंद रहने से ऐसे लोगों को कोई काम नहीं मिलेगा।

उन्हें टोकते हुए श्री जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री लगातार मामले पर नजर रखे हुए हैं और उन्होंने देशवासियों को कोरोना के बारे में सावधानी बरतने की सलाह दी थी। कोविड-19 को लेकर आर्थिक कार्यबल का गठन किया जा चुका है तथा विपक्ष को चाहिये कि वह पैनिक बटन न दबाये।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम के डाè के. वीरासामी ने कहा कि इस समय फिलीपींस में हजारों भारतीय छात्र फँसे हुए हैं और कोरोना वायरस के चलते वहाँ के शैक्षिक संस्थान, होटल और हॉस्टल बंद हैं। बैंकों के बंद होने के कारण छात्र काफी परेशान हैं। इसे देखते हुए विदेश मंत्रालय और केन्द्र सरकार को तत्काल उनकी मदद करनी चाहिए।
कांग्रेस के मनीष तिवारी ने सफदरजंग अस्पताल में कोरोना के संदिग्ध मरीज तनवीर सिह की आत्महत्या के मसले को उठाते हुए कहा कि गृह मंत्रालय को इस मामले की जाँच करानी चाहिए कि आखिर एक मरीज को यह कदम क्यों उठाना पड़ा। वह अपनी माँ के साथ सिडनी से भारत आया था और 18 मार्च को उसे हवाई अड्डे से बुखार की हालत में अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।

 उसके परिजनों को बताया गया कि उसे राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया है और बाद में फिर सफदरजंग अस्पताल लाया गया। उन्होंने कहा कि तनवीर ने कथित तौर पर रात साढèे नौ बजे छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी और रात ढाई बजे तक उसका शव वहीं पड़ा रहा और गुरुवार तक पोस्टमार्टम नहीं हो सका था। काफी भागदौड़ के बाद आज उसका पोस्टमार्टम हो सका है। उन्होंने इस पूरे मामले की जाँच कराये जाने की माँग करते हुए कहा कि यह घटना इस बात


द्रमुक सांसद कनिमोझी ने कहा कि कोरोना से सबसे अधिक असर असंगठित क्षेत्र पर पड़ेगा क्योंकि प्रधानमंत्री ने जिस ''सामाजिक दूरी’’ की बात कही है उसका सबसे अधिक असर ऑटो चालकों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य श्रमिकों पर पड़ेगा और इस दौरान उन्हें कोई काम नहीं मिलेगा। इसे देखते हुए इन वर्गों के कल्याण की कोई योजना बनाई जाए।

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