Maharashtra : मराठा वीर शासक शिवाजी महाराज की वीर गाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने वाले मशहूर इतिहासकार और दिग्गज़ लेखक बालासाहेब पुरुंदरे का 99 वर्ष की आयु में निधन, शिवाजी पर लेखन के बाद मिली शिवशहर की उपाधि, लेखन के जरिये छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का भी लगा था आरोप

Samachar Jagat | Monday, 15 Nov 2021 09:35:44 AM
Maharashtra  : Balasaheb Purundare, a famous historian and veteran writer who took the heroic stories of Maratha heroic ruler Shivaji Maharaj to the masses, died at the age of 99, got the title of Shivshahar after writing on Shivaji, tarnishing the reputation of Chhatrapati Shivaji Maharaj through writing was also accused of

इंटरनेट डेस्क। महाराष्ट्र के मराठा साम्राज्य के वीर प्रतापी शासक रहे वीर शिवाजी की गाथा और उनके योगदान व उनकी जीवनी पर कई संस्मरण व किताबें लिखने वाले लेखक व मशहूर इतिहासकार शिवशहर बालासाहेब पुरुंदरे का आज सोमवार सुबह निधन हो गया। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते उन्हें श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने लिखा कि शिवशहर बाबासाहेब पुरंदरे मजाकिया, बुद्धिमान और भारतीय इतिहास का समृद्ध ज्ञान रखते थे। वर्षों से मुझे उनके साथ बहुत निकटता से बातचीत करने का सम्मान मिला है। कुछ महीने पहले उन्होंने अपने शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम को संबोधित किया था।

एएनआई न्यूज एजेंसी के अनुसार, महाराष्ट्र के दिग्गज़ व शीर्ष इतिहासकारों में से एक रहे शिवशहर बालासाहेब का पूरा नाम बलवंत मोरेश्वर पुरुंदरे था। उन्होंने 99 वर्ष की आयु में महाराष्ट्र के पुणे स्थिति दीनानाथ मंगेसरकर मेमोरियल अस्पताल में आज सुबह तड़के दम तोड़ दिया। वर्ष 2019 में मोदी सरकार की ओर से पुरुंदरे को उनके ऐतिहासिक योगदान व राज्य के शीर्ष महापुरुषों की जीवनी को किताब का रूप देने के लिए जाना जाता है। वीर शिवाजी पर उन्होंने कई किताबी लिखीं। शिवाजी की जीवनी को लेकर ही उनका ज्यादातर लेखन रहा। यही वजह थी कि उन्हें शिव शहर नाम उपाधि स्वरूप मिला। 

2015 में बालासाहेब पुरुंदरे को महाराष्ट्र सरकार का सर्वोच्च नागरिक सम्मान महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड भी मिल चुका था। उन्होंने अपना ज्यादातर लेखन मराठी भाषा में ही किया था। हालांकि उनके लेखन को हिन्दी, अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में अन्य लेखकों द्वारा अनुवाद भी किया गया था। हालांकि महाराष्ट्र के वीर शिवाजी की जीवनी को लेकर लिखे गए उनके कुछ अंशों को लेकर महाराष्ट्र के ही राजनीतिक लोगों ने उनका विरोध भी किया था। कई राजनीतिक पार्टियों के नेताओं का कहना था कि उन्होंने अपने लेखन से मराठा योद्धा राजा छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है। यही वजह थी कि जब उन्होंने महाराष्ट्र के सर्वोच्च सम्मान से 2015 में नवाजा गया तो कई पार्टियों ने उनका विरोध भी किया। 



 
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