Gadkari: उपग्रह आधारित टॉल वसूली की तैयारी

Samachar Jagat | Wednesday, 03 Aug 2022 02:12:36 PM
Preparation for satellite based toll collection

नयी दिल्ली |  देश में उपग्रह आधारित वाहन के नंबर प्लेट के माध्यम से टॉल वसूली की प्रक्रिया शुरू किये जाने की तैयारी हो रही है और वर्ष 2024 से पहले देश में 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे शुरू कर दिये जायेंगे जिससे सड़क के मामले में भारत अमेरिका से पीछे नहीं रहेगा। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने आज राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी देते हुये कहा कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से टॉल वसूली के सुधार की पूरी गुंजाइश है। इससे कोई व्यक्ति न तो टॉल की चारी कर सकता है और न ही कोई बच सकता है।

उन्होंने कहा कि अब तक टॉल नहीं देने पर सजा का प्रावधान नहीं है। इसके मद्देनजर इस नयी प्रौद्योगिकी को क्रियान्वित करने के लिए संसद में एक विधेयक लाने की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद छह महीने के भीतर देश में यह व्यवस्था लागू करने की पूरी कोशिश की जा रही जिससे न तो टॉल बनाने की जरूरत होगी और न ही कोई व्यक्ति बगैर टॉल दिये जा सकेगा। इससे बचने की कोशिश करने वालों को सजा का प्रावधान किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि वाहन निर्माताओं से वाहनों में जीपीआरएस की सुविधा देने के लिए कहा गया है ताकि इससे टॉल वूसली में आसानी होगी और लोगों को भी राहत मिलेगी। अभी कोई व्यक्ति 10 किलोमीटर टॉल रोड का उपयोग करता है लेकिन उसे 75 किलोमीटर का टॉल चुकाना होता है लेकिन जीपीआरएस आधारित टॉल वसूली प्रक्रिया शुरू होने पर जहां से वाहन टॉल में प्रवेश करेगा और जब उससे उतरेगा वहीं तक का टॉल लगेगा। इससे उपभोक्ताओं को भी बचत होगी।

उन्होंने कहा कि देश में अभी 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे बनाने का काम जोरशोर से जारी है। वर्ष 2024 तक देश में ये 26 ग्रीन एक्सप्रेस हाईवे शुरू होने के बाद सड़क के मामले में भारत अमेरिका से पीछे नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पास कोई वित्तीय संकट नहीं है। हर वर्ष देश में पांच लाख करोड़ रुपये की लागत से सड़क निर्माण की क्षमता है। बैंक सड़क निर्माण के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

श्री गडकरी ने कहा कि देश में वाहनों में टॉल वसूली के लिए फास्टैग लगाने के बावजूद इससे वसूली पूरी नहीं हो पा रही है। अभी प्रतिदिन इससे 120 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पा रही है क्योंकि 97 प्रतिशत लोग इस फास्टैग का उपयोग कर रहे हैं लेकिन 67 प्रतिशत ही इसके माध्यम से टॉल चुका रहे हैं। शेष लोग नकदी में दोगुना टॉल चुका रहे हैं। इसमें क्या घालमेल है समझ नहीं आ रहा है।



 

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