RAS Success Story : 10 साल की उम्र में उठा पिता का साया, मां ने दिन-रात मेहनत करके पढ़ाया, 6 बार लगी सरकारी नौकरी, RAS 2015 में इस तरह हासिल की तीसरी रैंक?

Samachar Jagat | Friday, 23 Jul 2021 09:18:47 PM
RAS Success Story: Rajendra singh shekhawat got third rank in RAS 2015? now posted sdm dudu in jaipur rajasthan

इंटरनेट डेस्क। सफलता के रास्ते में अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। संघर्ष से ही सफलता तय की जाती है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा की आरएएस 2018 परीक्षा का हाल ही में परिणाम जारी हुआ है। कई लोगों की प्रेरणादायक कहानियां सोशल मीडिया पर लगातार शेयर की जा रही हैं। आज हम आपको 2015 आरएएस में तीसरी रैंक लाने वाले राजेन्द्र सिंह शेखावत के जीवन संघर्ष के बारे में बताएंगे। राजेन्द्र ने तमाम परिस्थितियों का सामना डटकर किया। वर्तमान में राजेन्द्र जयपुर जिले के दूदू में उपखंड अधिकारी के पद पर तैनात हैं। राजेन्द्र सिंह की पूरी लाइफ सरकारी नौकरियों से भरी पड़ी है। आरएएस बनने से पहले राजेन्द्र का 6 बार सरकारी सेवा के लिए चयन हो चुका है। उन्होंने अपने चौथे प्रयास में आरएएस जैसे कठिन परीक्षा को न केवल पास किया बल्कि टॉप-3 में जगह बनाई। 

राजेन्द्र सीकर जिले के के शिश्यू-रानोली गांव के निवासी हैं। राजेन्द्र के लिए सफलता इसलिये भी मायने रखती हैं क्योंकि राजेन्द्र जब 10 साल के थे तो उनके सिर से पिता का साया उठ चुका था। उनकी मां ने ही शेखावत को सिलाई-कढ़ाई का काम करके बेहतर से बेहतर शिक्षा दी। बचपन से ही संघर्ष उनके जीवन का हिस्सा बन गया। वे बताते हैं कि कई बार मेहनत करने के बाद भी जब उनका चयन नहीं हुआ तो वे निराश हो बैठते थे लेकिन इस दौरान उनकी मां उनका हौसला बढ़ाती थी। जिसके बाद सबकुछ भूलकर फिर से मेहनत में जुट जाते थे। 

घर खर्च चलाने के लिए 5 स्कूलों में पढ़ाते थे, शादी के बाद पत्नी को पढ़ाकर बनाया सेंकड ग्रेड टीचर

आरएएस बनने से पहले शेखावत बाड़मेर जिले में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में हैडमास्टर के पद पर कार्यरत थे। उनकी पत्नी भी सरकारी  स्कूल में अंग्रेजी की सीनियर टीचर हैं। राजेन्द्र सिंह कितनी मेहनत करते थे इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जब वे आरएएस की तैयारी कर रहे थे तो परिवार में कमाने वाली एकमात्र उनकी मां ही थी। वहीं उनकी दो बहनें भी थी। इसलिये वे एक नहीं दो नहीं, बल्कि 5 स्कूलों में पढ़ाने जाते थे। इसके बाद घर आकर खुद पढ़ते थे। 2006 में इनकी शादी सूरतगढ़ की राजेश कंवर से हुई। शादी के बाद खुद भी पढ़ते थे और अपनी पत्नी को भी पढ़ाते थे। नतीजा ये हुआ कि इनकी पत्नी का भी सेकंड ग्रेड में सलेक्शन हो गया। इतना ही नहीं खुद जब सरकारी नौकरी हासिल कर बैठे तो घर पर ही युवाओं को सरकारी नौकरी की तैयारी कराने लग गए। इनके द्वारा पढ़ाए गए  करीब 30 से ज्यादा युवा अभी सरकारी नौकरी कर रहे हैं। 

राजेन्द्र सिंह शेखावत की इतनी सरकारी नौकरी लगी...

2005- पहली बार सरकारी सेवा में चयन। थर्ड ग्रेड शिक्षक बने। 

2010- राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर चयन। दो साल तक जोधपुर में ट्रेनिंग की। फिर नौकरी छोड़ दी। 

2012 - सेंकड ग्रेड टीचर बने। सीकर जिले के पिपराली गांव में पहली पोस्टिंग मिली। 

2012 - आरएएस में चयन हुआ। 708वीं रैंक होने के कारण अधिनस्थ सेवा मिली। ज्वॉइन नहीं किया। 

2013- स्कूल व्याख्यात के पद पर चयन। हिस्ट्री के लेक्चरर के रूप में बाड़मेर में एचएम के पद पर नियुक्ति मिली। 

2015- आरएएस में ओवरआल पुरुष वर्ग में तीसरी रैंक हासिल की। 



 

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