Uttrakhand : चिपको आंदोलन के प्रणेता और प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना से निधन, पीएम मोदी का ट्वीट -उनकी सादगी और करुणा की भावना हमेशा जीवित रहेगी

Samachar Jagat | Friday, 21 May 2021 02:41:28 PM
Sunderlal Bahuguna, the founder of the Chipko movement and a symbol of nature and environmental protection, died from Corona, PM Modi's tweet - His sense of simplicity and compassion will always live on

इंटरनेट डेस्क। कोरोना वायरस ने चिपको आंदोलन के प्रणेता और प्रतीक रहे प्रख्‍यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा को आज छीन लिया है। ऋषिकेश स्थित एम्‍स में आज शुक्रवार को उनका निधन हो गया। 8 मई से बहुगुणा एम्‍स में भर्ती थे। उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने उनके निधन पर शोक व्‍यक्‍त किया है।

 

"He manifested our centuries old ethos of living in harmony with nature. His simplicity and spirit of compassion will never be forgotten," tweets PM Modi on the demise of Chipko movement leader Sunderlal Bahuguna pic.twitter.com/YvKw6WlHaR

— ANI (@ANI) May 21, 2021

वहीं पीएम मोदी ने भी उन्हें ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी। मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को प्रकट किया। उनकी सादगी और करुणा की भावना को कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। 

 

चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित हैं। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है। pic.twitter.com/j85HWCs80k

— Tirath Singh Rawat (@TIRATHSRAWAT) May 21, 2021

रावत ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा कि चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला है। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित है। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। पर्यावरण संरक्षण के मैदान में श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। 

 



 

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