Uttrakhand Update : ऋषिगंगा परियोजना की साइट से चार और शव और बरामद, 40 पहुंचा मृतकों का आंकड़ा, 206 लोग अभी भी लापता, राहत और बचाव कार्य जारी

Samachar Jagat | Wednesday, 10 Feb 2021 10:57:02 AM
Uttrakhand: Four more bodies and recovered from the site of Rishiganga project, figure of 40 reached dead, 206 still missing, relief and rescue work going on

इंटरनेट डेस्क। उत्तराखंड के चमोली जिले की ऋषिगंगा में रविवार को आई जल प्रलय ने भारी तबाही मचाई है। हादसे में अब भी 206 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें से बिजली परियोजना की सुरंग में फंसे हुए करीब 25-35 मजदूरों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। मंगलवार को रैणी गांव स्थित ऋषिगंगा परियोजना की साइट से चार और शव मिले। मरने वालों की संख्या 40 तक पहुंच गई है।

 

#Uttarakhand | A joint team of ITBP, NDRF, SDRF & other agencies entered into the Tapovan tunnel this morning. The tunnel is still approachable up to about 120 meters; more slush and water coming from inside the tunnel making the way ahead difficult: ITBP pic.twitter.com/OMcZWBf35J

— ANI (@ANI) February 10, 2021

चमोली जिले के रैणी गांव से लापता लोगों की संख्या बढ़ गई है। मंगलवार तक जहां मात्र 3 लोगों की लापता बताए जा रहे थे वहीं बुधवार को यह आंकड़ा 30 के पार पहुंच चुका है। वहीं बाढ़ के बाद गांव में तबाही का मंजर देखा जा सकता है।

 

#WATCH | The rescue operation at the 2.5 km long Tapovan tunnel in Chamoli district of Uttarakhand continued on Tuesday night; teams worked to remove slush and debris in the tunnel. Around 30 people are feared trapped in the tunnel

(source: SDRF) pic.twitter.com/huubhDUGI2

— ANI (@ANI) February 10, 2021

रैणी-तपोवन त्रासदी में बिजली परियोजना की टनल में तीन दिन से फंसे लोगों को रेस्क्यू करना मुश्किल होता जा रहा है। टनल के अंदर मौजूद टनों मलबा बचाव कार्य में बाधा बन रहा है। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटी है। लेकिन टनल के अंदर के हालात ऐसे हैं कि फंसे लोगों तक पहुंचना चुनौती बना हुआ है।

बचाव अभियान की अगुवाई कर रहे एसडीआरएफ कमाडेंट नवनीत भुल्लर के मुताबिक जितनी सफाई हो रही है उतनी ही तेजी से मलबा पीछे से आ रहा है। यही कारण है कि घटना के पहले ही दिन टनल 70 मीटर तक खोल दी गई थी, जबकि इसके शेष दो दिन में कुल और 80 मीटर ही सफाई हो पाई है। जवान लकड़ी के फट्टे बिछाकर रास्ता बना रहे हैं।



 

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