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महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में स्थित प्रवचन पाण्डाल में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि संसार में सभी शांति चाहते है किन्तु आज तक शांति मिली नहीं जबकि निरन्तर प्रयत्नशील रहते है शांति को पाने के लिए।
महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में स्थित प्रवचन पाण्डाल में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिसके पास पाप रुपी शत्रु है तो उसे बाहर के शत्रुओं की क्या आवश्यकता और जिसके पास पुण्य रुपी मित्र है तो बाहर के मित्र बनाने की क्या आवश्यकता। जब हमारा चित्त पवित्र होता है, तो हर कोई हमारा मित्र होता है।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में धर्मसभा में कहा कि मन को जो जीत लेता है वह महावीर बन जाता है, मन को जितना बड़ा मुश्किल होता है।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म की शरण में आने वाला व्यक्ति नर से नारायण, इंसान से भगवान बन जाता है।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि हमें ये चार दिन की जिंदगी मिली है, इन चार दिनों में हम चाहें तो चारों पुरुषार्थों को करके पंचमगति को प्राप्त कर सकते हैं, चतुर्गति के भ्रमण से बच सकते हैं और चाहें तो केवल अर्थ व काम पुरुषार्थों में ही जीवन को गंवा कर दुर्गति को प्राप्त कर सकते हैं। 
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि हमें यदि कोई शुभ कार्य करने का अवसर प्राप्त हो तो उस कार्य को अपने जीवन का अंतिम पुण्य कार्य मानकर उत्साह, उमंग और भक्ति के साथ करें क्योंकि जीवन क्षणभंगुर जल की बूंद की तरह है, पता नहीं कब नष्ट हो जाए।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में सुख-शांति को प्राप्त करने के लिए सम्यक् पुरुषार्थ के बिना सम्यक् लक्ष्य की प्राप्ति नहीं हो सकती।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि ‘आत्मा’ की शक्ति अपार है, ये शब्द कई बार सुना, पढ़ा, कहा है लेकिन आज तक अनुभव नहीं किया, बिना अनुभव किए उस आत्म शक्ति को जान नहीं सकते, जब हम अनंत शक्तिशाली राजा है तो दीन होकर भीख क्यों मांग रहे हैं क्योंकि अभी तक हम उस शक्ति को पहचान नहीं पाए।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जी महाराज ने कहा कि आपने अपने जीवन में पापों को छोड़ दिया है तो भौतिक सम्पत्ति का क्या प्रयोजन और यदि पुण्य का आस्रव हो रहा है तो भौतिक सम्पत्ति से क्या प्रयोजन।
महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में स्थित प्रवचन पाण्डाल में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि आचरण का मंगलमय होना ही मंगलाचरण है।

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