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महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज जी ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिस परिवार में संगठन होता है उस घर में कही कोई परेशानी नहीं होती है।
मुनि पुंंगव सुधा सागर महाराज ने कहा कि किसी भी धर्म जाति, सम्प्रदाय, देश की जीवंतता उसके इतिहास, संस्कृति, शास्त्र, शिल्प आदि पर आधारित होती है।
महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज जी ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस संसार में जीवन जीने का सबसे समझदारी भरा तरीका है - हमेशा भक्ति की अवस्था में रहना।
महाअतिशयकारी ज्ञानोदय तीर्थ क्षेत्र नारेली में परम पूज्य मुनि पुंगव सुधासागर महाराज जी ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस संसार में कुछ विश्वास के योग्य नहीं। तन धन सम्पति आदि तो सिर्फ उपयोग के योग्य है विश्वास योग्य नहीं।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि संसार उसी का नाम है जहां संयोग वियोग हो, सुख दुख-धूप-छाव है। मोह का नाम भी संसार है, अनादिकाल से प्राणी मोह रूपी मदिरा को पीकर अपने स्वरूप को न समझते हुए, पर को अपना मानता है।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि वह व्यक्ति जो स्वयं को नहीं पहचानता वह अपने साथ शत्रु सा व्यवहार करता है। बहुत जन्मों के बीज लेकर आए हर जन्म में ऐसा ही किया तो कर्मों की श्रृंखला कभी खत्म नहीं होगी।
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर जर महाराज ने कहा कि हमें यदि कोई शुभ कार्य करने का अवसर प्राप्त हो तो उस कार्य को अपने जीवन का अंतिम पुण्य कार्य मानकर उत्साह, उमंग और भक्ति के साथ करना चाहिए। 
मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज जी ने कहा कि सत्पुरुषार्थ करने वालों के लिए चार दिनों की जिंदगी ही काफी है और ना करने वालों के लिए 40 हजार वर्षों का समय भी बेकार है।

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