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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि 2019 के आम चुनाव में जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट देकर फिर सत्ता में भेजेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी शौचालयों का निर्माण , सभी को बैंक खाते और गैस कनेक्शन जैसी अपनी प्रमुख योजनाओं के जरिए आम आदमी की मूलभूत समस्याओं के समाधान पेश कर रहे हैं।
दक्षिण  अफ्रीका में समय-समय पर महात्मा गांधी की स्मृति में समारोह आयोजित होते रहे हैं। लेकिन इस बार एक घटना के सवा सौ साल पूरे होने पर गांधी को याद किया गया। यह घटना वही थी, जहां से गांधी के गांधी बनने की शुरुआत हुई।
संम्पदा निदेशालय ने महकमा बागान के तहत आने वाले बागों के अलावा उद्यान भवनों के बागों के प्रति भी रूचि दिखाई थी। जयपुर के बागों की तहरीर (लेखा) भी तैयार की गई, पर हरियाली के इन केन्द्रों को संजोकर नहीं रखा जा सका।
जितनी तेजी से सुविधाओं का आविष्कार हो रहा है उतनी ही तेजी से दुविधाओं का जाल इस सुंदर धरती पर फैलता जा रहा है। धीरे-धीरे दुनिया नित नए आविष्कृत चीजों, उपकरणों, मशीनों या फिर अन्य सामानों से अटती जा रही है, भरती जा रही है।

सख्ती का रास्ता

Friday, 08 Jun 2018 01:25:50 PM
चार साल से भी ज्यादा समय के बाद ब्याज दरें बढ़ाने के अपने फैसले के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक ने किसी को चौंकाया नहीं है। बाजार में यह राय बनने लगी थी कि देश के और वैश्विक माहौल को देखते हुए कुछ कड़े कदम उठाए ही जाएंगे।
देशभर के किसानों ने फसलों के सही दाम सहित तमाम मांगों को लेकर 1 जून 2017 के दिन आंदोलन की शुरूआत की। देखते ही देखते मंदसौर में विरोध प्रदर्शन ने भयावह रूप धारण कर लिया और यहां हुई गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हो गई।
भारत के लोकतन्त्र की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि चुनाव के समय मतदाता ही बादशाह होता है। इस समय राजनेताओं के भाग्य का फैसला करने का अधिकार उसी को होता है। हमने यह बात सत्तर वर्षीय लोकतंत्र के जीवन में एक बार नहीं, बल्कि अनेक बार देखी है। जब-जब इन मतदाताओं को नजरअंदाज किया गया, राजनैतिक दलों को मुंह की खानी पड़ी है।
नई दिल्ली। वित्त सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि मार्च महीने में जीएसटी प्राप्ति अधिक रही है। यह वित्त वर्ष का आखिरी महीना था, इसलिए इसमें अप्रैल के मुकाबले अधिक प्राप्ति हुई।
पाक सीमा पर बंदूके थम गई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि दोनों देशों की सेना ने तय किया है कि चाहे जो कारण हो, आपस में गोली नहीं चलेगी।
सात राष्ट्रीय दलों को 2016-17 में अज्ञात स्रोतों से 710.80 करोड़ रुपये का चंदा मिला है। वहीं इस दौरान पार्टियों द्वारा घोषित चंदा (20,000 रुपये से अधिक राशि में) 589.38 करोड़ रुपये रहा है।

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