बजट में जीएसटी की दरों में कमी तथा उसके नियमों में संशोधन

Samachar Jagat | Monday, 12 Feb 2018 03:14:07 PM
Amortization of GST rates in the budget and its rules

जयपुर। राजस्थान सरकार ने वर्ष 2018-19 के बजट प्रस्ताव में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कमी तथा इसके कानून तथा नियमों में संशोधन किया है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने वित्त मंत्री के रुप में सोमवार को विधानसभा में बजट प्रस्ताव पेश करते हुए बताया कि मार्बल , ग्रेनाइट, जैम्स तथा ज्वैलरी, हैण्डीक्राफ्ट, टैक्सटाइल, होटल, पर्यटन कृषि आदि से संबंधित वस्तुओं पर कर दरों में कमी की है। इसमें स्प्रिंक्लर एवं बूंद बूंद सिचाई पद्बति तथा इससे संबंधित नोजल, ट्रैक्टर के कलपुर्जे, रासायिनक खाद पर 18 से पांच प्रतिशत तक की कमी का प्रस्ताव किया गया है।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री जन आवास योजना अफाँर्डेबल आवासीय योजनाओं के लिए उपयोग में आने वाली भूमि के मूल्य के लिए एक तिहाई छूट प्रदान करते हुए प्रभावी कर दर को आठ प्रतिशत माना गया है तथा कोटा स्टोन टाईल्स् तथा मार्बल से बनी देवी-देवताओं की मूर्तियों पर जीएसटी कर दर में कमी के लिए प्रयास किये जा रहे है।

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बजट प्रस्ताव में कम्पोजिशन का विकल्प लेने वाले करदाताओं के लिए टर्नओवर सीमा को पचास लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया गया है तथा जीएसटी काउन्सिल द्बारा संशोधन के पश्चात यह टर्नओवर सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर डेढ करोड रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इसी तरह डेढ करोड़ से कम टर्नओवर वाले करदाताओं के लिए रिटर्न त्रैमासिक आधार पर प्रस्तुत करने की सुविधा प्रदान की गई है।

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राजे ने बताया कि बजट में जीएसटी के तहत 181000 नये करदाताओं को पंजीकृत किया गया जिसके परिणामस्वरुप वैट प्रणाली की अपेक्षा जीएसटी के कर आधार में 35 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी तथा आम आदमी एवं किसानों के उपयोग की लगभग 90 प्रतिशत वस्तुओं का कर भार , पूर्व कर भार (राजस्थान वैट और केन्द्रीय उत्पाद शुल्क) की अपेक्षा कम हुआ है।

आम आदमी पर कर भार में कमी आने के साथ साथ जीएसटी के तहत राज्य के राजस्व में वृद्बि हुई है। वर्ष 2015-16 को आधार वर्ष मानते हुए वैट राजस्व में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के आधार पर राज्य को गत वर्ष अक्टूबर तक की अवधि के लिए 1911 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति के रुप में प्राप्त हुए है तथा नवम्बर-दिसम्बर 2017 के लिए लगभग 715 करोड़ रुपए प्राप्त होना अपेक्षित है।

जीएसटी लागू होने पर निरसित अधिनियमों से संबंधित बकाया मांग के प्रकरणों के निस्तारण के लिए संबंधित अधिनियमों में अपेक्षित संशोधन होने पर एमनेस्टी योजना लाई जायेगी।एजेंसी



 

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