दिवाली बाजार से गायब होता 'Made in China'

Samachar Jagat | Sunday, 04 Nov 2018 01:32:52 PM
Made in China disappeared from Diwali Market

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नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों से चीन से आयातित सस्ते उत्पादों से पटे रहने वाले दीपावली के बाजार में इस बार स्वदेशी उत्पादों की धूम है। खरीदारों के साथ-साथ दुकानदारों में स्वदेशी सामान को बढावा देने की भावना से चीनी सामान की बाजार हिस्सेदारी घटकर करीब 20 फीसदी रह गयी है। हर साल की तरह इस बार भी दिवाली से पहले बाजार दीपक, कंदील, फूल, रंगोली, रंग-बिरंगी लड़यिों, परदे, बंदनवार,लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों तथा अन्य साजो-सामान से सजे हैं लेकिन चीनी सामान की घटती धमक की छाप पूरे बाजार पर है।


खरीदार भी अब सामान लेने से पहले देश में निर्मित सामान दिखाने की मांग करते हैं। पिछले कई साल से अन्य त्योहारों की तरह इस पर्व पर भी 'मेड इन चाइना' का कब्जा रहा था और बाजार में चीन की लड़ियां, गिफ्ट आइटम, मूर्तियों, सजावटी सामान की धूम रहती थी। लेकिन, स्वदेशी सामान को बढ़ावा देने तथा पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण चीन के सामान के बहिष्कार के बारे में सोशल मीडिया पर जारी चर्चाओं ने बाजार को पूरी तरह बदल दिया है। दिल्ली में लाल किला के सामने भागीरथ पैलेस का इलेक्ट्रॉनिक बाजार इस परिवर्तन का सबसे बड़ा गवाह है।

खरीदार अब सस्ते सामान की अपेक्षा गुणवत्ता पर ध्यान देने लगे हैं और सरकार ने भी अपने नियम सख्त कर दिये हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक बाजार पर इस साल नया चीनी माल नहीं आने का भी असर है। रेहड़ी और पटरी पर जो चीनी माल दिखायी देता है वह पिछले साल का बचा हुआ है। यहां सामान बेचने वाले संजय ने बताया कि इस बार चीन से नया माल नहीं आया है जिससे पिछले साल का बचा माल महंगा बिक रहा है।

ग्राहकों की रूचि भी अब चीन के सामान में ज्यादा नहीं दिखायी देती। कुछ खरीदार सस्ता चीनी सामान लेने यहां आते भी हैं तो माल महंगा देखकर या तो वापस लौट जाते हैं या बहुत कम खरीदारी कर रहे हैं। भागीरथ पैलेस में दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव रविंदर कुमार गुप्ता ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि इलेक्ट्रॉनिक बाजार पर पहले पूरी तरह चीनी सामान हावी था लेकिन सरकार ने गुणवत्ता को लेकर मानक सख्त कर दिये हैं।

दरअसल पहले चीन के माल पर बीएसई मानक का स्टीकर लग जाता था लेकिन सरकार ने अब आयातित माल पर इसकी खुदाई करने का निर्देश दिया है। इस बार इलेक्ट्रॉनिक बाजार में बिक्री 50 फीसदी घट गयी है। गिफ्ट आइटम के बाजार पर भी 'ड्रैगन' की पकड़ खत्म हो गयी है। बाजार में अब गिफ्ट आइटम कम ही दिख रहे हैं। अब अधिकतर गिफ्ट आइटम की खरीदारी ऑनलाइन हो रही है। बाजार में अब इंडोनेशिया से आयातित माल अधिक है लेकिन वहां से आया माल महंगा होता है, जिसके कारण इसकी पकड़ उतनी नहीं है।

सदर बाजार में गिफ्ट आइटम बेचने वाली आकांक्षा बताती हैं कि उनकी बिक्री पिछले साल की तुलना में इस बार 60 फीसदी घट गयी है और इसी कारण वह अब अपनी दुकान में सजावटी सामान भी बेचने लगी हैं। उन्होंने कहा कि अधिकतर ग्राहक खरीदारी से पहले पूछते हैं कि क्या यह माल चीन का है और यह बताने पर कि अमूक सामान देश में निर्मित है तब ही वे उसे लेने में दिलचस्पी दिखाते हैं। किनारी बाजार में बंदनवार और अन्य सजावटी सामान बेचने वाली प्रीति ने बताया कि उनकी दुकान में सिर्फ राजस्थान का माल है।

एक अन्य दुकानदार पूर्णिमा गुप्ता ने बताया कि वह राजस्थान के अलवर से माल लायी हैं और ग्राहकी अच्छी चल रही है। मालीवाड़ा में दीये, मूर्तियां और बंदनवार की दुकान लगाये करण ने कहा कि उन्होंने कोलकाता और लखनऊ से माल मंगाया है। खरीदारों को चीन के सस्ते सामान में अब रुचि नहीं रही। वे कम खरीदारी करना चाहते हैं लेकिन माल अच्छा चाहते हैं। पोस्टर के बाजार में भी चीन सिमट कर रह गया है। चुभनदा पोस्टर बेचने वाले ही चीन का माल रखते हैं। पोस्टर बेचने वाले सोनू कुमार ने बताया कि अब चीन का माल महंगा हो गया है।

बड़ा पोस्टर पहले वहां से 44-45 रुपये का पड़ता था लेकिन अब वह 47-48 रुपये का पडऩे लगा है। हम उसे बाजार में 60 रुपये का बेचते हैं। हर दिन अभी 20 से 25 हजार की बिक्री है लेकिन यह पिछले साल से 20 फीसदी कम है। अखिल भारतीय व्यापारी महासंघ (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि उनका संगठन गत दो साल से चीन के माल के बहिष्कार को लेकर अभियान चला रहा है और बाजार में इस अभियान का असर दिखने लगा है।

उन्होंने कहा कि दुकानदारों में राष्ट्रीय भावना प्रबल हो रही है और इसी कारण चीन से माल मंगाने वाले आयातक पहले से 50 से 60 फीसदी कम माल मंगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले गिफ्ट आइटम बाजार पर एक तरह से चीन का एकाधिकार था लेकिन अब यह पूरा बाजार परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और लोग परंपरागत तरीके से दिवाली मनाना चाह रहे हैं। - एजेंसी

 

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