चीनी उद्योग के लिए बेलआउट पैकेज वास्तव में मात्र 4,000 करोड़ रुपए का : पवार

Samachar Jagat | Sunday, 10 Jun 2018 11:36:47 AM
The bailout package for sugar industry is in fact just Rs 4,000 crore: Pawar

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मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख और पूर्व कृषि मंत्री शरद पवार का कहना है कि चीनी उद्योग के लिए केंद्र सरकार द्बारा हाल में घोषित बेलआउट पैकेज वास्तव में केवल 4,047 करोड़ रुपए का है ना कि 8,500 करोड़ रुपए का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में पवार ने गन्ना किसानों का 22,000 करोड़ रुपए का बकाया चुकाने में नकदी के संकट से जूझ रही चीनी मिलों की तत्काल मदद के लिए और कदम उठाने की जरूरत पर बल दिया है।

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पवार ने मिल से चीनी की निकासी की कीमत बढ़ा कर 29 रुपए प्रति किलोग्राम करने, 80 लाख टन चीनी के निर्यात करने की नीति लागू करने, गन्ना किसानों के लिए उत्पादन से जुड़ी सब्सिडी को दोगुना कर 11 रुपए प्रति क्विंटल करने और एथेनॉल की कीमत बढ़ाकर 53 रुपए प्रति लीटर करने की मांग की। साथ ही पुराने ऋणों का पुनर्गठन करने की भी बात अपने पत्र में कही है। 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने छह जून को चीनी उद्योग के लिए 8,500 करोड़ रुपए के बेलआउट पैकेज की घोषणा की थी। इसमें चीनी का बफर स्टॉक बनाया जाना, एथेनॉल उत्पादन की क्षमता बढ़ाया जाना और मिलों के घाटे को कम करने के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करना शामिल है। इसके अलावा इसमें 1,540 करोड़ रुपए की उत्पादन आधारित सब्सिडी भी शामिल है जिसे पिछले महीने गन्ना किसानों को राहत पहुंचाने के लिए घोषित किया गया था। 

चीनी मिलें इस समय बुरे दौर से गुजर रही हैं, क्योंकि चीनी की कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे आ गई हैं जबकि 2017-18 के सितंबर में समाप्त होने वाले चीनी उत्पादन वर्ष में रिकॉर्ड 3.15 करोड़ टन चीनी का उत्पादन होने का अनुमान है। जबकि देश में चीनी की सालाना खपत करीब 2.5 करोड़ टन है। 

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पवार ने अपने पत्र में कहा कि बेलआउट पैकेज को पहले 8,500 करोड़ रुपए का बताया गया , बाद में यह 7,000 करोड़ रुपए रहा। इसने भ्रम और अस्पष्टता की स्थिति पैदा की है। उन्होंने कहा कि यदि इस पैकेज के प्रत्येक बिंदु पर अलग - अलग विचार किया जाए तो वास्तव में यह बेलआउट पैकेज 4,047 करोड़ रुपए का होता है।

क्योंकि इसमें 1,540 करोड़ रुपए गन्ना पर प्रोत्साहन राशि, 1,175 करोड़ रुपए 30 लाख टन के बफर स्टॉक के निर्माण के लिए और 1,332 करोड़ रुपए एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश पर मिलों के ब्याज सहायाता के तौर पर मंजूर किए गए हैं । यह सब कुछ मिलाकर 4,047 करोड़ रुपए ही बनते हैं। पवार ने कहा कि ऐसे में सरकार की ओर से शुद्ध 4,047 करोड़ रुपए ही जारी हो रहे हैं जो इसे 8,500 करोड़ रुपए या 7,000 करोड़ रुपए का बताया जाना तथ्यात्मक तौर पर गलत है। -एजेंसी  

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