व्यापारिक समझौतों के तहत उत्पादकों को काली मिर्च शुल्कों पर पुनर्विचार की अपेक्षा

Samachar Jagat | Thursday, 09 Aug 2018 04:48:31 PM
Under the Trade Agreements, the producers expect reconsideration of the black money tariffs.

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नई दिल्ली। कालीमिर्च के उत्पादकों ने मांग की है कि सरकार को घरेलू उत्पादकों को संरक्षित करने के लिए साफ्टा और आईएसएलएफटीए जैसे व्यापार समझौतों के तहत आयात शुल्क घटाने की संरचना पर फिर से गौर करना चाहिए। साफ्टा (दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार समझौता) के तहत मसालों पर आठ प्रतिशत का रियायती शुल्क है, जबकि आईएसएलएफटीए (श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौता) के तहत वहां से 2,500 टन तक काली मिर्च का आयात शून्य शुल्क पर किया जाता है।

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दूसरी तरफ, आशियान क्षेत्र के लिए काली मिर्च पर आयात शुल्क 52 प्रतिशत और ब्राजील तथा अन्य देशों के लिए 70 प्रतिशत अधिक रखा गया है। कालीमिर्च उत्पादक संगठन कंसोटयम (सीबीपीजीओ) के समन्वयक विश्वनाथ केके ने पीटीआई-भाषा को बताया, "ऐसी आशंका है कि चूंकि अधिकांश कालीमिर्च उत्पादक देश आसियान क्षेत्र में हैं, इसलिए साफ्टा और आईएसएलएफटीए के तहत कम शुल्कों का लाभ लेते हुए इसे श्रीलंका के रास्ते से हमारे यहां काली मिर्च भेजा लाया जा रहा है।"

उन्होंने कहा कि इसकी वजह से घरेलू कालीमिर्च की कीमतों पर दबाव बना है, जो मौजूदा समय में 300 रुपये प्रति किग्रा तक नीचे चला गया है। उन्होंने सरकार से शुल्क ढांचे पर पुनॢवचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कृषि, वाणिज्य और वित्त मंत्रालय के मंत्रालयों के समक्ष एक प्रस्तुति (प्रेजेन्टेशन) दी गई है। सीबीपीजीओ ने कहा है कि भारत की कामिर्च उच्च गुणवत्ता की है और घरेलू कीमत हमेशा वियतनामी मिर्च की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक होती है।

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लेकिन घरेलू कालीमिर्च की कीमतें 341 रुपये प्रति किलो की उत्पादन लागत से भी नीचे गिर गई हैं। हालांकि 500 रुपये प्रति किलो के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) तय करने से कुछ हद तक आयात पर अंकुश लगाने में मदद मिली है, फिर भी स्थानीय कीमतें अभी भी कम हैं। इस उत्पादक निकाय के अनुसार वर्ष 2017-18 के दौरान भारत का काली मिर्च उत्पादन 58,000 टन था, जबकि खपत 72,000 टन थी।- एजेंसी

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