बाबुल के अंगना में अब बेफिक्र हो फुदक रही है असना

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Mar 2018 02:00:28 PM
Now asna is playing At the threshold

जयपुर। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही अठारह माह की असना अब बेफ्रिकी से अपने बाबुल के आंगन में चहकने लगी है, कभी हसंते हुए तो कभी चंद कदम चलकर बेफ्रिकी की जिंदगी जीने लगी है। बेबी असना की जिंदगी में यह परिवर्तन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाईल हैल्थ टीम के प्रयासों से आया है जिसने गत दिनों चौमू के आंगनवाड़ी केंद्र में स्क्रीनिंग के दौरान बेबी असना बानो की जन्मजात ह्रदय में छेद की बीमारी के विषय में पता लगाया और उसका जयपुर के फोर्टिज अस्पताल में उपचार करवाया।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा़ नरोतम शर्मा ने बताया कि जन्मजात ह्रदय रोग की बीमारी का बोझ लिए जी रही असना को देख मोबाईल हैल्थ टीम की पलकें भी नम हो आईं और टीम ने बिना देर किए उसे ईलाज के लिए मालवीय नगर स्थित फोर्टिस अस्पताल रैफर कर दिया।

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उन्होंने बताया कि बेबी असना बानो के पिता अब्दुल सलाम को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने अपनी फूल सी बच्ची के ईलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए लेकिन बात नहीं बन सकी। पेशे से अकाउंटेंट अब्दुल सलाम ने बताया कि असना उनकी इकलौती बच्ची है और बीमारी के चलते दूसरे बच्चों की तरह सामान्य बचपन नहीं जी रही थी।

शर्मा ने बताया कि फोर्टिस अस्पताल में पहुँचते ही चिकित्सकों ने तुरंत बेबी असना को भर्ती कर ऑपरेशन की तैयारियां शुरू कर दिया और गत 20 फरवरी को डॉ. सुनील कुमार कौशल और उनकी टीम ने सफल ऑपरेशन कर उसे नई जिंदगी दी। ऑपरेशन के बाद कुछ दिन चिकित्सकों की देखरेख में रहने के बाद उसे अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब वह अपने बाबुल के अंगने में चहकने लगी है।

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डॉ. शर्मा ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 वर्ष की उम्र तक के बच्चों का उपचार किया जाता है। आरबीएसके की मोबाइल हैल्थ टीम विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों और शिक्षण संस्थानों पर जाकर लगभग 38 बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के उपचार में मदद करती है। एजेंसी

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