म्यामां में रॉयटर के 2 पत्रकारों को 7-7 वर्ष की सजा

Samachar Jagat | Tuesday, 04 Sep 2018 12:25:55 PM
Reuters journalists punish 7-7 years in Myanm

यंगून। रोहिंग्या मुस्लिमों के नरसंहार की रिपोर्टिंग के दौरान म्यामां के सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने के आरोपी संवाद समिति रॉयटर के 2 पत्रकारों को सोमवार को 7-7 वर्ष जेल की सजा सुनाई गई। इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर एक हमले के तौर पर देखा जा रहा है और उन्हें तत्काल रिहा करने की अपील की गई है।

गत साल दिसम्बर में गिरफ्तार किए जाने के बाद वा लोने (32) और क्याव सो ओ (28) यंगून की इनसीन जेल में बंद हैं। उन पर गोपनीयता कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था, जिसमें अधिकतम 14 वर्ष की सजा का प्रावधान है।

इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आक्रोश व्याप्त हो गया है क्योंकि इसे पिछले साल रखाइन प्रांत में मुस्लिम रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ म्यामां के सुरक्षा बलों द्बारा की गई कार्रवाई की रिपोर्टिग को रोकने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

सेना की अगुवाई में अभियान चलाया गया था जिसमें 700,000 रोहिंग्या बांग्लादेश चले गए थे। इनके साथ बलात्कार, हत्या और आगजनी जैसे अत्याचारों की घटनाओं को अंजाम दिया गया था। मीडिया ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कहा कि उन्हें तब गिरफ्तार किया गया।

जब उन्होंने गत वर्ष सितम्बर में रखाइन प्रांत के इन्न डीन गांव में 10 रोहिंग्या मुस्लिमों की न्यायेत्तर हत्या का खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि यंगून में पुलिस ने उन्हें भोजन पर आमंत्रित किया और उन्हें दस्तावेज सौंपे और बाद में गिरफ्तार कर लिया।

जैसे ही वे रेस्त्रां से जाने लगे गोपनीय दस्तावेज रखने के लिए उन्हें हिरासत में ले लिया गया। न्यायाधीश ये ल्वीन पर उनकी गवाही का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यंगून की अदालत में न्यायाधीश ने कहा कि यह पाया गया है कि अपराधियों का देश के हितों को नुकसान पहुंचाने का इरादा था।

ऐसे में वे गोपनीयता कानून के तहत दोषी पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों को सात-सात साल जेल की सजा सुनायी जाती है। रॉयटर्स के एडिटर इन चीफ स्टीफन जे एडलर ने एक बयान में कहा कि आज म्यामां और हर जगह प्रेस के लिए एक दुखद दिन है। उन्होंने कहा कि यह 'उनकी रिपोर्टिंग को चुप करने और प्रेस को डराने के लिए’ रचा गया है। 



 

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