जानिए! क्या है कुंभ की कथा, क्यों इन चार ही जगहों पर किया जाता है कुंभ मेले का आयोजन

Samachar Jagat | Monday, 07 Jan 2019 01:24:13 PM
Learn! What is the story of Kumbh, why Kumbh Mela is organized in these four places

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धर्म डेस्क। हिंदू धर्म में कुंभ स्नान की बहुत मान्यता है, ये माना जाता है कि जो कुंभ का स्नान करता है उसके सभी पाप धुल जाते हैं। साल 2019 का कुंभ मेला प्रयाग में 14 जनवरी यानि मकर संक्रांति से शुरू होगा और ये 4 मार्च यानि महाशिवरात्री को समाप्त होगा। 12 साल में एक बार पड़ने वाले कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में किया जाता है। 


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हिंदू शास्त्रों के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ तो उसमें से अनेक बेसकीमती चीजें निकलीं, मंथन में से निकले अमृत कलश को लेने के लिए देवताओं और दानवों में होड़ सी मच गई, अमृत कलश की प्राप्ति के लिए दोनों के बीच 12 दिनों तक युद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान अमृत की चार बूंदे पृथ्वी पर अलग - अलग जगहों पर गिरीं। 

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शास्त्रों के अनुसार, अमृत की पहली बूंद प्रयाग में गिरी, दूसरी बूंद हरिद्वार में गिरी, तीसरी बूंद उज्जैन में गिरी और चौथी अमृत की बूंद नासिक में जाकर गिरी। इसी कारण इन चार जगहों पर ही कुंभ का आयोजन किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार 12 कुंभ होते हैं जिनमें से चार कुंभ पृथ्वी पर मानवों के लिए होते हैं और आठ कुंभ का आयोजन देवलोक में किया जाता है। 

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

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