महाभारत की इस महिला ने अपने पति और पुत्र के लिए जो किया, वो किसी भी महिला के लिए कर पाना है मुश्किल

Samachar Jagat | Friday, 22 Feb 2019 05:48:07 PM
The story of Mahabharatas main female character Gandhari

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धर्म डेस्क। महाभारत की एक प्रमुख महिला पात्र के जीवन के बारे में भले ही ज्यादा चर्चा न हो लेकिन उसकी महानता के आगे सभी नतमस्तक होते नजर आते हैं, अपने त्याग और बलिदान से उसने इतनी शक्ति प्राप्त कर ली थी कि उसके सामने बड़े से बड़ा योद्धा टिक नहीं सकता था। ये महान महिला थी गांधारी, आपको बता दें कि गांधारी जन्म से अंधी नहीं थी उसका विवाह जब धृतराष्ट्र से हुआ जो जन्म से ही अंधे थे तो अपने पति का मान रखने के लिए उसने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली और जीवन भर पति का साथ दिया। 

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अपने इसी त्याग के कारण गांधारी को ऐसी शक्ति प्राप्त हुई कि वह जब भी पट्टी खोलकर किसी को देखेगी तो उसकी तेज दृष्टि से व्यक्ति वर्ज सा कठोर हो जाएगा। जब महाभारत का युद्ध हुआ तो गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन को वर्ज सा कठोर बनाने के लिए अपने आंखों से पट्टी हटाने का निर्णय लिया और दुर्योधन को नग्नावस्था में अपने समक्ष आने को कहा। 

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जब दुर्योधन मां गांधारी के सामने जा रहे थे तब उन्हें बीच में श्री कृष्ण मिले और उन्होंने इस तरह से माता के समक्ष जाने से दुर्योधन को रोका और लंगोट बांधकर जाने को कहा। क्योंकि कृष्ण जानते थे कि अगर दुर्योधन का पूरा शरीर वर्ज सा कठोर हो गया तो इसे युद्ध में हराना मुश्किल हो जाएगा, इसी वजह से चातुर्य पूर्वक कृष्ण ने दुर्योधन को ये सलाह दी और दुर्योधन ने कृष्ण की सलाह मान ली। 

जैसे ही दुर्योधन गांधारी के समक्ष गया तो गांधारी ने अपने आंखों की पट्टी खोली और लंगोट वाली जगह को छोड़कर दुर्योधन का सारा शरीर वज्र के समान कठोर हो गया। महाभारत के युद्ध के दौरान भीम ने दुर्योधन की जंघा पर वार किया जो लंगोट के कारण वर्ज के समान कठोर नहीं हो पाई थी और इसी वजह से दुर्योधन की मृत्यु हुई। भले ही युद्ध का परिणाम दुर्योधन के पक्ष में न रहा हो लेकिन गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन और पति धृतराष्ट्र के लिए जो किया उसके बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। 

(ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।)

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