2017 Special : किसानों और महिलाओं के मुद्दों ने बटोरी सुर्खियां

Samachar Jagat | Sunday, 17 Dec 2017 12:31:51 PM
2017 Special: Issues of farmers and womens headlines

भोपाल। मंदसौर में छह आंदोलनकारी किसानों की गोलीकांड में मौत, भोपाल में प्रशासनिक सेवा की तैयारी में जुटी एक छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म, दुष्कर्मों के मामले में देश भर में सबसे ऊपर, निर्वाचन आयोग की ओर से प्रदेश के कद्दावर मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का चुनाव शून्य घोषित किया जाना और दूसरे मंत्री लालसिंह आर्य के खिलाफ हत्या के एक मामले में वारंट जारी होने समेत राज्य में वर्ष 2017 के दौरान ऐसे अनेक मामले सामने आए, जिनके चलते मध्यप्रदेश देश भर में सुर्खियों में बना रहा।

इसी साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत की प्रदेश की सात दिवसीय यात्रा और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की तीन दिन तक राजधानी भोपाल में चली मैराथन बैठकों ने भी सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इसी बीच किसानों के लिए भावांतर भुगतान योजना, 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को मृत्युदंड प्रस्तावित करने वाला देश में अपनी तरह का पहला विधेयक, गुजरात चुनाव और कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी की ताजपोशी के दौरान ही कांग्रेस के कद्दावर महासचिव दिग्विजय भसह की नर्मदा परिक्रमा भी देश भर में चर्चा का विषय बनी रही।

1- किसान आंदोलन :-

अपनी मांगों के समर्थन में प्रदेश में एक जून से शुरु हुए किसानों के आंदोलन ने कुछ ही दिनों में उग्र रुप ले लिया। प्रदेश के कई हिस्सों में आंदोलनकारियों ने न केवल दूध-सब्जियां सड़कों पर फेंक दीं, बल्कि प्रदेश के सबसे व्यस्त माने जाने वाले इंदौर-भोपाल राजमार्ग पर लग्जरी बसों को भी आग लगा कर दहशत फैलाने की कोशिश की। छह जून को मंदसौर में हिंसक आंदोलनकारियों पर गोलीबारी में छह किसानों की मौत के बाद इस आंदोलन ने देश भर में बहस छेड़ दी। 

प्रदेश सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगने के बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश में शांति बहाली की अपील करते हुए अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे। कई किसान संगठनों और मंदसौर गोलीकांड में मारे गए आंदोलनकारियों के परिजन से मुलाकात के बाद अगले दिन चौहान ने मृतकों के परिजन को एक करोड़ रुपए के मुआवजे और मृतक के एक परिजन को शासकीय नौकरी के आश्वासन के साथ अपना उपवास तोड़ा।

किसानों की मौत और प्रदेश के मुखिया के उपवास ने प्रदेश में राजनीति का दौर भी गर्म कर दिया। मुख्यमंत्री के उपवास के फौरन बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य भसधिया ने राजधानी में तीन दिवसीय सत्याग्रह किया। कांग्रेस की प्रदेश इकाई के लगभग सभी दिग्गज इस दौरान सिंधिया के साथ एक मंच पर नजर आए। मंदसौर की घटना से देश भर में हुई फजीहत के बीच ही मुख्यमंत्री चौहान ने इस साल सितंबर से किसानों के लिए देश में पहली भावांतर भुगतान योजना शुरु की। सरकार ने दावा किया कि इससे बिचौलियों का काम खत्म होगा और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा।

2- 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान :-

वहीं अक्टूबर की 31 तारीख को राजधानी भोपाल के एक अतिव्यस्त क्षेत्र में एक कॉलेज छात्रा के साथ चार युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद उस छात्रा को प्राथमिकी दर्ज कराने में अलग-अलग थानों के बीच चक्कर लगवाए जाने की घटना ने प्रदेश के नाम पर एक और दाग दर्ज कर दिया। छात्रा को परेशान किए जाने का मुद्दा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि उसकी गलत मेडिकल रिपोर्ट सामने आ गई। इसके अगले ही दिन राजधानी भोपाल में 12 साल की एक बच्ची के साथ लंबे समय से सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद उसके गर्भवती होने की घटना ने राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के दावों की कलई खोल दी।

साल के आखिरी महीने में गृह विभाग की ओर से जारी की गई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में दुष्कर्म के मामलों में प्रदेश के सबसे ऊंचे पायदान पर रहने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार पर हमला बोलने का एक और मौका मिल गया। इसी दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा में दंड विधि (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया गया। देश में अपनी तरह के पहले इस विधेयक में 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी की सजा का प्रावधान है। अब इसे केंद्र को भेजा जाएगा।

3- रानी पद्मिनी को राष्ट्रमाता का दर्जा :-

वहीं महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों को लेकर लगातार हो रही किरकिरी के दौरान ही संजय लीला भंसाली की फिल्म पद़्मावती को प्रदर्शन के पहले ही प्रदेश में प्रतिबंधित किए जाने और रानी पद्मिनी का स्मारक बनाए जाने की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा भी देश में सुर्खियों का सबब बनी। देश के कई हिस्सों में फिल्म पद्मावती पर उठे विवाद के दौरान मुख्यमंत्री चौहान ने फिल्म के प्रदेश में प्रदर्शन पर रोक लगा दी। उन्होंने रानी पद्मिनी को राष्ट्रमाता का दर्जा देते हुए प्रदेश में उनका स्मारक बनाने की घोषणा की।

4- राजनीतिक हलकों में सरगर्मी :-

प्रदेश में भाजपा सरकार के 14 और मुख्यमंत्री चौहान के कार्यकाल के 12 साल पूरे होने वाले इस वर्ष में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और सर संघचालक भागवत की दो बार की प्रदेश यात्रा ने राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बनाए रखी। भागवत फरवरी और अक्टूबर में भोपाल आए। वहीं शाह की अगस्त में हुई तीन दिन की यात्रा के दौरान पूरी पार्टी अलर्ट मोड में दिखाई दी। अपनी यात्रा के दौरान शाह ने पार्टी में टिकट बंटवारे में उम्र का कोई क्राइटेरिया नहीं होने का बयान दिया, जिसके बाद पिछले साल चौहान के मंत्रिमंडल से हटाए गए दो उम्रदराज मंत्रियों बाबूलाल गौर और सरताज सिंह को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं शुरु हो गईं। इसी साल दो मंत्रियों को लेकर प्रदेश सरकार को विपक्ष ने घेरने की कोशिश की। निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के संसदीय कार्य और जनसंपर्क मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का पेड न्यूज से जुड़े एक मामले में निर्वाचन शून्य घोषित करते हुए उनके अगले तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी।

डॉ मिश्रा को राष्ट्रपति चुनाव मतदान के लिए भी अयोग्य घोषित कर दिया गया, हालांकि बाद में उच्चतम न्यायालय ने उन्हें राहत प्रदान करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय को इस मामले की सुनवाई के निर्देश दिए। वहीं सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ भिंड जिले की एक अदालत द्वारा हत्या के एक मामले में वारंट जारी करने और कई दिन तक पुलिस की छानबीन के बाद भी मंत्री आर्य के पुलिस के हत्थे नहीं चढऩे से विपक्ष को एक और मौका मिल गया। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने अब केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर एक आपराधिक पुन: निरीक्षण याचिका की सुनवाई करते हुए भिंड सत्र न्यायालय द्वारा किए जा रहे विचारण पर अंतरिम रोक लगा दी है।

5- नर्मदा को लेकर प्रदेश चर्चा में :-

इसी साल देश की प्रमुख नदियों में से एक नर्मदा को लेकर भी प्रदेश चर्चा का विषय बना रहा। मुख्यमंत्री चौहान की पिछले साल शुरु हुई नर्मदा सेवा यात्रा का इस साल मई में समापन हुआ। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। वहीं कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की अपनी पत्नी अमृता राय के साथ नर्मदा परिक्रमा भी राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अटकलों का विषय रही। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सितंबर में अपने जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध देश को समर्पित करने के पहले नर्मदा किनारे के प्रदेश के हिस्सों में इसका पुरजोर विरोध हुआ।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की मेधा पाटकर ने जुलाई के अंत में बांध प्रभावित लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर धार जिले में भूख हड़ताल की। स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन ने उन्हें इंदौर अस्पताल में भर्ती कराया। हालत ठीक होने के बाद पाटकर ने दोबारा धार जाने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पाटकर ने इसके बाद सितंबर में बांध लोकार्पण के ऐन पहले बड़वानी में आंदोलन के बहुत से कार्यकर्ताओं के साथ जल सत्याग्रह भी किया।-एजेंसी 



 

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