महबूबा मुफ्ती बोलीं, PDP को तोडऩे के प्रयासों के ‘बेहद खतरनाक’ परिणाम होंगे 

Samachar Jagat | Friday, 13 Jul 2018 01:52:26 PM
Mehbooba Mufti, PDP will be extremely dangerous results of the efforts to break 

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आई पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी को तोडऩे के केंद्र के किसी भी प्रयास के बेहद खतरनाक परिणाम होंगे। भाजपा राज्य में पीडीपी के गठबंधन से अलग हो गई थी और उसने महबूबा की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिसके बाद 19 जून को उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

उन्होंने यहां मीडिया से कहा कि मेरी पार्टी मजबूत है। मतभेद हैं जिन्हें सुलझा लिया जाएगा। यदि पीडीपी को तोडऩे के प्रयास हुए , जैसा 1987 में हुआ था जब लोगों के वोटों पर डाका डाला गया था और एमयूएफ (मुस्लिम यूनाइटेड फ्रंट) को कुचलने के प्रयास हुए थे , तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक होंगे।

महबूबा ने साल 1987 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए उस घटनाक्रम का याद किया जिसके चलते प्रतिबंधित हिज्बुल मुजाहिदीन का सुप्रीमो सैयद सलाउद्दीन और जेकेएलएफ प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक ‘‘उभरे’’ थे। सलाउद्दीन अब पाकिस्तान में है। महबूबा ने कहा कि जिस तरह हर परिवार में मतभेद होते हैं उसी तरह हर दल में भी मतभेद होते हैं जिन्हें सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के दखल के बगैर कोई दरार नहीं आ सकती।

वर्ष 1987 में लोगों के वोटों पर डाका डाला गया तो उससे एक सलाउद्दीन और एक यासीन मलिक तैयार हुआ। नक्शबंद साहिब में शहीदों के कब्रिस्तान में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद महबूबा ने मीडिया से बात की। यहां उन लोगों को दफनाया गया है जिन्हें वर्ष 1931 में इसी दिन डोगरा महाराजा हरि सिंह के निरंकुश शासन के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए सैनिकों ने मौत के घाट उतार दिया था।

राज्य सरकार के गिरने के बाद पीडीपी के कई विधायक महबूबा के नेतृत्व के खिलाफ मुखर हो गए थे और उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रहने के दौरान महबूबा ने भाई-भतीजावाद और पक्षपात किया। महबूबा के बयान पर प्रतिक्रिया में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पीडीपी टूट भी जाती है तो इससे कश्मीरी लोगों को कोई फर्क नहीं पडऩे वाला।

उन्होंने ट्वीट किया , ‘‘ मैं इस तरह बताता हूं , ताकि सब याद रखें कि पीडीपी के टूटने से एक भी नया आतंकी तैयार नहीं होगा। कश्मीरी लोगों के मतों को विभाजित करने की खातिर ही दिल्ली में बनाई गई पार्टी के अंत का लोगों को कोई दुख नहीं होगा। 



 

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