फंसे कर्ज पर रिजर्व बैंक के नए नियम रिण नहीं चुकाने वालों को ‘नींद से जगाने वाले’: सरकार

Samachar Jagat | Wednesday, 14 Feb 2018 10:27:31 AM
Reserve Bank of India new rules on trapped loans

नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ने फंसे कर्ज की समस्या के त्वरित समाधान के लिए नियमों को और कड़ा किया है, जिसमें उसने बैंकों को ऐसे खातों की पहचान करने और इस तरह के कर्ज की वसूली पर लगातार जोर देने को कहा है। सरकार ने केन्द्रीय बैंक के इन नियमों को कर्ज नहीं चुकाने वालों के लिए नींद से जगाने वाला बताया है।

रिजर्व बैंक ने कल देर रात आधा दर्जन से ज्यादा मौजूदा रिण पुनर्गठन प्रणालियों को समाप्त करते हुए नए सख्त नियमों को जारी किया। केन्द्रीय बैंक ने बैंकों से कहा है कि वह फंसे कर्ज के समाधान की योजना पर 180 दिन की समयसीमा के भीतर सहमत हों या फिर उस खाते को दिवाला प्रक्रिया में भेजें। वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार ने इन नियमों पर गौर करने के बाद कहा कि ये नियम कर्ज नहीं चुकाने वालों के लिये ‘‘नींद से जगाने’’ वाले हैं।

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कुमार ने पीटीआई-भाषा से कहा कि सरकार एक बार में ही चीजों को स्पष्ट करना चाहती है और इसे आगे के लिए लटकाना नहीं चाहती। पुराने फंसे कर्ज के समाधान के लिए यह अधिक पारदर्शी प्रणाली है। रिजर्व बैंक के नये नियमों में कहा गया है कि 2,000 करोड़ रुपए और इससे अधिक के फंसे कर्ज मामले में यदि समाधान प्रक्रिया को 180 दिन के भीतर लागू नहीं किया जाता है तो मामले को दिवाला प्रक्रिया के तहत लाना होगा।

रिजर्व बैंक ने कहा है कि जो बैंक दिशानिर्देशों का पालन करने में असफल रहेंगे उनके खिलाफ जुर्माना लगाया जाएगा। वित्तीय मामलों के सिचव ने हालांकि, कहा कि इन नये नियमों का बैंकों के प्रावधान नियमों पर कोई ज्यादा असर नहीं होगा।

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रिजर्व बैंक के नये नियम ढांचे में दबाव वाले कर्जों की पहचान के लिए विशिष्ट नियम, समाधान योजना के क्रियान्वयन के लिये समयसीमा और तय समयसीमा का पालन नहीं करने पर बैंकों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने मौजूदा प्रणालियों, कंपनी रिण पुनर्गठन योजना, रणनीति रिण पुनर्गठन योजना और दबाव वाली संपत्तियों का टिकाऊ पुनर्गठन जैसी योजनाओं को वापस ले लिया गया है।



 

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