प्रधानमंत्री फसल बीमा में बदलाव की तैयारी में सांसदों से मांगे सुझाव

Samachar Jagat | Wednesday, 17 Jul 2019 04:50:49 PM
Suggestions from MPs in preparation for change in prime crop insurance

नई दिल्ली। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को और प्रभावी एवं लाभप्रद बनाने के लिये इस योजना में कुछ बदलाव करने का संकेत देते हुए सांसदों से चार..पांच दिनों के भीतर सुझाव मांगा है । 

लोकसभा में ‘वर्ष 2019-20 के लिए ग्रामीण विकास तथा कृषि और किसान कल्याण मंत्रालयों के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों’ पर चर्चा का जवाब देते हुए तोमर ने कहा, ‘‘ किसानों को मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करना हमारी सरकार का लक्ष्य है । सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को और प्रभावी एवं लाभप्रद बनाना चाहती है । ’’

उन्होंने कहा कि पीएम फसल बीमा योजना का पहले भी पुनर्गठन किया गया और यह प्रयास किया गया किसानों को कम प्रीमियम देना पड़े । तोमर ने कहा, ‘‘ मैं और प्रधानमंत्री दोनों इस बीमा योजना को भी पूर्ण नहीं मानते हैं । कई सदस्यों ने इस योजना के बारे में सुझाव दिये हैं । इस फसल योजना को और उपयोगी और लाभप्रद बनाया जाए, इस बारे में सदस्य दो..तीन दिनों में सुझाव दे सकते हैं । हम दखेंगे कि इस योजना और सरल एवं प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है। ’’

उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले की अवधि की तुलना में मोदी सरकार के पांच वर्षो के कार्यकाल में इस योजना के तहत अधिक किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ मिला है और अधिक राशि जारी की गई है । 

किसानों को रिण के संबंध में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए तोमर ने कहा कि पिछले पांच वर्षो में किसानों को बड़े पैमाने पर रिण दिये गए हैं । 2015..16 में 8.5 लाख करोड़ रूपये रिण देने का लक्ष्य था और 9 लाख करोड़ रूपये से अधिक राशि दी गई । 2016..17 में 9 लाख करोड़ रूपये का रिण देने का लक्ष्य था और 10.65 लाख करोड़ रूपये दिये गये। 2017..18 में 10 लाख करोड़ रूपये का लक्ष्य था और 11.68 लाख करोड़ रूपये दिये गये। इसी प्रकार से 2018..19 में 11 लाख करोड़ रूपये का लक्ष्य था और इससे अधिक राशि दी गई । 

तोमर ने कहा कि गांव समृद्ध बनेगा तभी देश समृद्ध बनेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद हम पहले दिन से इस कार्य में लग गए । उन्होंने कहा कि आज कृषि क्षेत्र में 13 योजनाएं और 18 उपयोजनाएं चल रही हैं । आईसीएआर के तहत वैज्ञानिक भी शोध कार्य में लगे हैं । शोध कार्य के लिये 8,078 करोड़ रूपये आवंटित किये गए हैं । देश खाद्यान्न की दृष्टि से आत्मनिर्भर बना है । बागवानी और दुग्ध उत्पादन भी काफी बढ़ा है । 

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की आमदनी दोगुनी होनी चाहिए, इस दृष्टि से सरकार काम कर रही है लेकिन इसका परिणाम अचानक नहीं आ सकता है । इस दृष्टि से उत्पादकता बढ़ाना, कृषि विविधिकरण करना, प्रौद्योगिकी का उपयोग जैसे कार्यो को बढ़ाया जा रहा है । 

तोमर ने कहा कि खेती के लिये खेतों की तबियत जानना जरूरी है । इसे ध्यान में रखते हुए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के कार्य को आगे बढ़ाया गया । पहले चरण में 10 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाये गए, दूसरे चरण के तहत 9.82 करोड़ कार्ड बनाने का कार्य चल रहा है । इस उद्देश्य के लिये 10 हजार प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं । 

उन्होंने कहा कि मनरेगा की राशि का उपयोग जल संरक्षण के कार्य के लिये भी किया जायेगा । उन्होंने कहा कि अभी 5.92 करोड़ लोगों को किसान क्रेडिट कार्य मिला है और प्रधानमंत्री का कहना है कि हर किसान को किसान क्रेडिट कार्य मिले । 

तोमर ने कहा कि मोदी सरकार ने स्वामिनाथन समिति के सुझाव के आधार पर किसानों को उनकी लागत का डेढ गुना मूल्य देने का निर्णय किया । 2014 के बाद समर्थन मूल्य के आधार पर सर्वाधिक खरीद की गई । मंत्री ने कहा कि हमें रासायनिक उर्वरकों के उपयोग का कम करना होगा और इस उद्देश्य के लिये जैविक खेती और शून्य बजट कृषि की ओर बढऩा होगा । भारत सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है । 

उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षो में कृषि क्षेत्र का सम्मान बढ़ा है और किसानों का खेती की तरफ आकर्षण बढ़ा है और प्रौद्योगिकी का उपयोग हो रहा है । मंत्री के जवाब के बाद आरएसपी के एन के प्रेमचंदन ने अपना कटौती प्रस्ताव वापस ले लिया और सदन ने मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दिया।  -(एजेंसी)



 

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