परिवार के लिए मकान बुनियादी इंसानी चाहत है: उच्चतम न्यायालय

Samachar Jagat | Friday, 10 Aug 2018 10:40:33 AM
The basic human life for the family is like: Supreme Court

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नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि परिवार के लिए मकान होना ‘‘बुनियादी इंसानी चाहत’’ है जिसमें सिर पर एक अदद छत हासिल करने की उम्मीद लिए लोग अपनी गाढ़ी कमाई से निवेश करते हैं।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी उस फैसले में की जिसमें शीर्ष न्यायालय ने जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ प्रस्ताव की प्रक्रिया फिर से शुरू करने के आदेश दिए और कंपनी, इसकी होल्डिंग कंपनी और उनके प्रमोटरों को ताजा निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लेने से रोक दिया। 

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान आम राय थी कि जेआईएल के विघटन से मकान खरीदारों के हितों का नुकसान नहीं होगा।

पीठ ने कहा मकान खरीदारों ने अपने सिर पर छत हासिल करने की उम्मीद लिए अपनी गाढ़ी कमाई से बेशकीमती निवेश किए हैं। परिवार के लिए घर एक बुनियादी इंसानी चाहत है।

न्यायालय ने कहा व्यापक संदर्भ में इस अदालत ने (मकान होने को) जीवन के अधिकार का हिस्सा करार दिया है जो मौलिक संवैधानिक गारंटी के तौर पर शामिल है।  एजेंसी

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