कठुआ बलात्कार एवं हत्या मामले में तीन को आजीवन कारावास, तीन अन्य को पांच वर्ष की कैद

Samachar Jagat | Tuesday, 11 Jun 2019 07:08:00 AM
Three imprisoned for life imprisonment in Kathua rape and murder case, three others imprisoned for five years

पंजाब। जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय खानाबदोश लडक़ी से सामूहिक बलात्कार और उसकी हत्या के सनसनीखेज मामले में तीन मुख्य आरोपियों को सोमवार को यहाँ की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई जबकि साक्ष्यों को नष्ट करने के लिए तीन अन्य को पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई। करीब 17 महीने पहले हुई इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।

अदालत में पीडि़ता के परिवार का प्रतिनिधित्व करने वाले मुबिन फारूकी के मुताबिक, करीब एक वर्ष तक मुकदमा चलने के बाद अदालत ने मामले में छह को दोषी करार दिया जबकि मुख्य षड्यंत्रकर्ता सांजी राम के बेटे विशाल जंगोतरा को ‘संदेह का लाभ’ देते हुए बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष के वकील संतोख सिंह ने कहा कि जिस देवस्थानम (मंदिर) में अपराध हुआ था वहाँ की देखभाल करने वाले सांजी राम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और एक अन्य आरोपी परवेश कुमार को रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) के तहत आपराधिक साजिश, हत्या, अपहरण, सामूहिक बलात्कार, साक्ष्यों को नष्ट करने, पीडि़ता को नशीला पदार्थ खिलाने और समान आशय के तहत अपराध को अंजाम देने का दोषी करार दिया गया।

अभियोजन ने उन्हें फांसी की सजा देने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष के वकील ने बताया कि तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और आपराधिक षड्यंत्र एवं हत्या के लिए उन पर एक- एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। उन्होंने कहा कि आजीवन कारावास की सजा का मतलब है कि नैसिगक मृत्यु होने तक वे जेल में रहेंगे।

उन्होंने बताया कि उन्हें आरपीसी के तहत विभिन्न अपराधों के लिए जेल की अलग अलग अवधि की सजा भी सुनाई गई जो आजीवन कारावास की सजा के साथ चलेगी। उन्होंने बताया कि तीन सह अपराधियों पुलिस उपनिरीक्षक आनंद दत्ता, मुख्य आरक्षक तिलक राज और विशेष पुलिस अधिकारी सुरेन्दर वर्मा को साक्ष्य नष्ट करने के लिए पांच वर्ष कैद की सजा सुनाई गई और प्रत्येक पर 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया।

उन्होंने कहा कि अगर वे जुर्माना नहीं भरते हैं तो उन्हें जेल में अतिरिक्त छह महीने कैद की सजा भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष के वकीलों की टीम में जे के चोपड़ा, एस एस बसरा, हरमिंदर सिंह और भूपिंदर सिंह शामिल थे। उन्होंने मुख्य आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की और विशाल को बरी किए जाने के खिलाफ वे अपील करेंगे।

बयान में कहा गया है, ‘‘हत्या और सामूहिक बलात्कार के लिए दोषी ठहराए गए सभी तीनों आरोपियों के लिए हमने फांसी की सजा की मांग की। यह हम सभी की कड़ी मेहनत और जांच एवं कानूनी समझ का नतीजा है। हमें 99 फीसदी परिणाम हासिल हुआ है।’’

अदालत कक्ष में सातों आरोपी मौजूद थे जहाँ मीडिया को जाने से रोक दिया गया था। अदालत कक्ष के अंदर मौजूद लोगों के मुताबिक फैसला सुनाए जाते ही राम और खजुरिया स्तब्ध रह गए। दोनों के परिवार के कुछ सदस्य उन्हें जेल भेजे जाने की खबर सुनकर अदालत परिसर के अंदर ही बेहोश हो गए।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा ने एक किशोर सहित आठ लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। किशोर के खिलाफ अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है क्योंकि उसकी उम्र तय करने की याचिका पर जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।

पिछले वर्ष अप्रैल में दायर 15 पन्नों के आरोपपत्र के मुताबिक, लडक़ी का अपहरण पिछले वर्ष दस जनवरी को हुआ और गांव के एक छोटे मंदिर में उसे चार दिनों तक नशीला पदार्थ देकर उससे बलात्कार किया गया। मंदिर की देखरेख सांजी राम करता था। बाद में लडक़ी की हत्या कर दी गई।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने सजा का स्वागत किया लेकिन कहा कि वह सभी छह दोषियों को फांसी की सजा दिए जाने की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को ऊपरी अदालत में अपील करनी चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने सात मई 2018 को आदेश दिया था कि मामले को जम्मू-कश्मीर के बाहर भेजा जाए जिसके बाद इसे जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से करीब 30 किलोमीटर दूर पंजाब के पठानकोट के जिला एवं सत्र न्यायालय में पिछले वर्ष जुलाई के पहले हफ्ते में भेजा गया। मामले की अदालत में रोजाना सुनवाई हुई। -(एजेंसी)



 

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