केंद्र किसानों को बड़ी राहत देने की तैयारी में

Samachar Jagat | Monday, 07 Jan 2019 03:14:08 PM
Center prepares to give great relief to farmers

कांग्रेस द्वारा तीन राज्यों में सरकार बनाने के बाद त्वरित कार्रवाई कर किसानों का कर्ज माफ दिए जाने के बाद भाजपानीत केंद्र सरकार भी किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं किए जाने की तैयारी में है। कृषि मंत्रालय के सूत्रों की माने तो सरकार इसी साल होने जा रहे लोकसभा के आम चुनावों को ध्यान में रखकर कई अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी, फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, कम ब्याज पर ऋण समेत समर्थन मूल्य न मिलने पर अंतर का भुगतान आदि योजनाओं पर विचार विमर्श चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों को राहत देने के मसले पर बीते सप्ताह बुधवार रात वित्तमंत्री अरुण जेटली, कृषि मंत्री राधामोहन सिंह और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ बैठक की।

सरकार ने 2019 के आम चुनाव के मद्देनजर देश भर के किसानों को बड़ी राहत देने के लिए विचार विमर्श किया। फिलहाल सरकार के पास चार विकल्प है, जिन पर किसानों को राहत देने पर गंभीरता से कार्य किया जा रहा है। विपक्षों दलों ने पिछले कुछ दिनों के दौरान किसानों को राहत देने की मांग जोर शोर से उठाई है। प्रधानमंत्री मोदी की देर रात को इस विषय पर की गई बैठक से स्पष्ट है कि वे इसके प्रति गंभीर है। 

सूत्रों के अनुसार बुधवार देर रात प्रधानमंत्री की भाजपा अध्यक्ष और अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ करीब दो घंटे तक बैठक चली। इसके अगले दिन गुरुवार को भी संबंधित मंत्रालयों एवं नीति आयोग में आंतरिक बैठकों का जोर जारी रहा। इन बैठकों से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि सरकार ऐसे विकल्पों पर आगे बढ़ना चाहती है, जो आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से सहज हो। सरकार के पास किसानों को राहत देने के चार विकल्प है। जिनमेें से किसी एक पर वह आगे बढ़ सकती है। सूत्रों के अनुसार पहले विकल्प के तहत सरकार ने किसानों को कर्ज माफी से पूरी तरह इंकार नहीं किया, लेकिन ऐसा आमतौर पर इसलिए संभव नहीं है, क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसी की मांग करते रहे हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि कई राज्य पहले ही किसानों की कर्ज माफी की घोषणा कर चुके हैं।

दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि सरकार राष्ट्रीय स्तर पर भूमि धारक किसानों के लिए प्रत्यक्ष आय बढ़ाने वाली योजना ला सकती है। ऐसी एक योजना तेलंगाना में जारी है। 21 दिसंबर को झारखंड में ऐसी ही योजना की घोषणा की गई है। यह ऐसी योजना है, जिसमें बुवाई के मौसम से पहले ही सीधे किसानों के खाते में नकद राशि पहुंचाई जाएगी। तीसरा विकल्प एक रुपए की प्रीमियम पर फसल बीमा का हो सकता है। चौथा विकल्प फसल के बाद प्रत्येक किसान को 2000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से राशि देने का हो सकता है। ताकि फसल की बिक्री में नुकसान होने पर उसकी भरपाई हो सके। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार अगर सरकार पहले विकल्प पर जाती है तो 2.8 लाख करोड़ रुपए का भार आएगा। वहीं तेलंगाना की योजना जैसा विकल्प भी अच्छा हो सकता है, लेकिन यह किसान की समस्या का स्थाई समाधान नहीं होगा। इसके अलावा केंद्र सरकार कृषि कर्ज समय पर चुकाने वाले किसानों को ब्याज माफी समेत कई तोहफे देने की तैयारी कर रही है। ब्याज छूट से सरकारी खजाने पर 15 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। किसानों को तत्काल राहत देने के बारे में एक प्रस्ताव यह है कि सही समय पर कृषि ऋण चुकाने वाले किसानों पर चार प्रतिशत ब्याज का भार पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए। अभी किसानों को 3 लाख रुपए तक का ऋण सात प्रतिशत की ब्याज दर से दिया जाता है। 

समय पर कर्ज चुकाने वाले किसानों को सरकार की तरफ से पहले ही 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट दी जा रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार कृषि बीमा का प्रीमियम भरने से भी किसानों को मुक्ति दिला सकती है। इसके अलावा बागवानी फसलों के बीमा प्रीमियम को भी कम किया जा सकता है। अभी किसानों को खरीफ फसलों पर दो प्रतिशत, रबी फसलों पर डेढ़ प्रतिशत और बागवानी एवं व्यावसायिक फसलों पर 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र सरकार तथा संबंधित राज्य सरकारें आधा-आधा करती है।

किसान अभी खरीफ तथा रबी फसलों पर करीब 5 हजार करोड़ रुपए का प्रीमियम भर रहे हैं। सरकार के स्तर पर ऐसी योजनाओं पर चर्चा रही है, जिससे किसान लाभान्वित हो तथा वे धीरे-धीरे सशक्त हो, दूसरे सभी किसानों को फायदा मिले। जो कर्जदार है उन्हें भी और जो नहीं है उन्हें भी। इसलिए फसलों का ज्यादा मूल्य, ब्याज मुक्त कर्ज, एमएसपी पर बिक्री सुनिश्चित करना, कम दाम पर सरकार द्वारा भरपाई, फसलों का ज्यादा उत्पादन और निर्यात पर प्रोत्साहन राशि।



 

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