तुलना स्वयं से करें

Samachar Jagat | Tuesday, 13 Feb 2018 10:12:51 AM
Compare yourself

आमतौर पर देखा जाता है कि व्यक्ति अपने बच्चों की तुलना दूसरों के बच्चों से, परिवार के बच्चों से, मित्रों के बच्चों से या फिर अपने रिश्तेदारों के बच्चों से करता है। ऐसी तुलना बच्चों को बहुत संकीर्ण बना देती है उनके मन मस्तिष्क को बहुत छोटा और कमजोर कर देती है यहां तक कि उनकी सोच को बहुत ही सीमित बना देती है। वे तंग खानों में बटने लगते है, टुकड़ों में जीने लगते है और छोटे जीवन को तेयार करने में लगते है।

ऐसा करना प्राकृतिक नियमों के खिलाफ है, मानव जीवन के विपरीत है। यह कितना दुखद है कि जब कोई यह कहता है कि बेटा तेरे अंक तेरे चाचा के बेटे से कम नहीं आने चाहिए, तेरे मेरिट आनी ही चाहिए और तू टॉपर बनना ही चाहिए।
यह कितनी छोटी और संकीर्ण बाते हैं कि एक पिता अपने बेटे को सारी दुनिया की अच्छाईयों से दूर कर रहा है, उसके  हौसलों को कमजोर कर रहा है, उसकी क्षमताओं को नजर अंदाज कर रहा है और उसके दायरे को भी सीमित कर रहा है।

 माता पिता को चाहिए तो यह कि वे अपने बच्चों से कहें कि बेटी तू तेरी तुलना स्वयं से कर तू तेरी तुलना कल की अच्छाईयों से कर, तू तेरी तुलना स्वयं के संकल्पों से कर, स्वयं की योग्यताओं को बढ़ाने के रूप में कर और अपने बीते जीवन को और अच्छा बनाने के लिए कर। यही सही मायने में सरल, सच्चा और सार्थक जीवन है। लेकिन ऐसा होता नहीं है। व्यक्ति ताजिंदगी दूसरों से अंधी हौड़ में उलझा रहता है, दूसरों की कामयाबियों के पीछे दौड़ता रहता है और स्वयं को नाकाम मानता रहता है और अपनी नाकामी को सफल करने के लिए दूसरों के पीछे पड़ा रहता है। चलने की तो बात दूर है वह खड़ा भी नहीं हो सकता है हर बात में अपनी तुलना दूसरों से करने वाला।

प्रेरणा बिन्दु:-  
हिम्मत वाले होकर
कोरी बात करते हो
अपने ही कदमों की
तुम मात करते हो
हौंसले पर लिखा
होता जीत का सफर
पहले अपने आपको
बुलन्द तो तू कर।



 

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