रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति का अनुमान और आशंका

Samachar Jagat | Thursday, 12 Apr 2018 09:59:15 AM
Estimates and apprehensions of the Reserve Bank Monetary Policy Committee

दुनिया के बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दाम से लगातार महंगाई बढ़ने को लेकर चिंतित रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि लग रहा था कि नए वित्तीय वर्ष 2018-19 की पहली मौद्रिक नीति में रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में कमी करेगा। पर उसने ऐसा नहीं करके आर्थिक विश्लेषकों को चौंका दिया। केंद्रीय बैंक को खाद्यान्नों के दाम बढ़ने और राजकोषीय लक्ष्यों के हासिल नहीं होने की चिंता भी सता रही है। हालांकि उसने कहा कि 2018-19 में आर्थिक वृद्धि दर बढक़र 7.4 फीसदी हो जाएगी। रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के नेतृत्व में मौद्रिक नीति समिति को उम्मीद है कि निवेश गतिविधियां बढ़ने से चालू वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि दर बढक़र 7.4 फीसदी तक पहुंच जाएगी। पिछले वित्त वर्ष में इसके 6.6 फीसदी रहने का अनुमान है।

 मौद्रिक नीति समिति ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में खाद्यान्न के दाम में नरमी को देखते हुए खुदरा मुद्रास्फीति के 4.7 फीसदी से 5.1फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है। चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर को पूर्व स्तर पर बरकरार रखे जाने से आवास व वाहन के लिए कर्जदारों की मासिक किस्तों पर कोई असर नहीं होगा। हालांकि, बैंक अपनी संपत्ति देनदारी स्थिति को देखते हुए जमा और कर्ज की ब्याज दरों में बदलाव करने के लिए मुक्त है। मौद्रिक नीति ने लगातार चौथी बार रेपो दर में यथास्थिति बनाए रखी। इससे पहले पिछले साल अगस्त में रेपो दर में चौथाई फीसदी कटौती की गई थी। तब से यह छह फीसदी पर बनी हुई है। रेपो दर वह दर होती है, जिस पर अन्य बैंक, रिजर्व बैंक से अपनी फौरी जरूरतों के लिए अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। दूसरी तरफ रिवर्स रेपो दर भी 5.75 फीसदी दर टिकी रही। रिवर्स रेपो दर वह दर होती है, जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंकों से नकदी उधार लेकर उनके पास उपलब्ध अतिरिक्त नकदी सोखता है। मौद्रिक नीति समिति का निर्णय उसके तटस्थ रुख के अनुरूप है। समिति ने आर्थिक वृद्धि को समर्थन देते हुए मध्यम अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति को दो फीसदी ऊपर-नीचे घट-बढ़ के साथ चार फीसदी पर बनाए रखने का लक्ष्य रखा है। मौद्रिक नीति की यह समीक्षा ऐसे समय आई है, जब सरकार ने कहा है कि 31 मार्च को समाप्त पिछले वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा और राजस्व लक्ष्य प्राप्ति में कमी केंद्रीय बजट में दिए गए संशोधित अनुमान से कम होंगे। इस साल के बजट में पिछले साल के बजट अनुमानों को संशोधित कर बढ़ाया गया है।

 सरकार यह भी घोषणा की है कि चालू वित्तीय वर्ष की अप्रैल-सितंबर छमाही में उसकी बाजार में उधारी केवल 2.88 लाख करोड़ रुपए रहेगी। जबकि एक साल पहले इस अवधि में यह 3.72 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई थी। रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि फरवरी की मुद्रास्फीति उम्मीद से कम रही है, लेकिन फिर भी मौद्रिक नीति समिति ने भविष्य पर नजर रखते हुए निर्णय लेती है। मौद्रिक नीति समिति का मानना है कि मुद्रास्फीति के रास्ते में कई तरह की चुनौतियां है। पहले चुनौती खाद्यान्न के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर है।

इस साल के बजट में खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का नया फार्मूला रखा गया है। इसके अमल में आने से मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है। हालांकि इसका सही प्रभाव आने वाले महीनों में ही पता चला पाएगा। मौद्रिक नीति समिति के अनुसार विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा कर्मचारियों के आवास किराए भत्ते में की जाने वाली वृद्धि का भी मुद्रास्फीति पर असर पड़ सकता है। तीसरे केंद्रीय बजट 2018-19 के अनुमानों से अगर वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति में कोई कमी रहती है, तो इसका मुद्रास्फीति परिदृश्य पर प्रतिकूल प्र्रभाव पड़ेगा। कुल मिलाकर सब अनुमानों और संभावनाओं पर आधारित है। ठोस रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता और इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता कि महंगाई की मार आम आदमी को ही झेलनी है।



 

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