इलेक्ट्रिक वाहनों की नीति बनाने को वैश्विक सम्मेलन

Samachar Jagat | Saturday, 15 Sep 2018 04:32:22 PM
Global Conference on the Making of Electric Vehicles Policy

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पेट्रोल-डीजल के आसमान छूते दामों के बीच भारत में इलेक्ट्रिक और हाईब्रिड कारों को लेकर सरकार और कंपनियों की तैयारियां तेज हो गई है। कई बड़ी कंपनियां 2020 तक इलेक्ट्रिक कारें लांच करने वाली है, जबकि 7 साल के भीतर 349 मॉडल बाजार में दस्तक देंगे। ऐसे में जो लोग निकट भविष्य में कार खरीदने के इच्छुक है उनके लिए अच्छी खबर है। ग्लोबल मोबिलिटी सम्मेलन के बीच आई अंतरराष्ट्रीय शोध संगठन आईसीसीटी की रिपोर्ट से ये तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की तमाम कार कंपनियां इलेक्ट्रिक कारों के नए-नए मॉडलों को डिजाइन तैयार कर रही है। उम्मीद है कि 2025 तक इनकी कीमतें पेट्रोल कारों से भी कम हो जाएगी। नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिट प्लान 2013 के अनुसार 2020 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को 60-70 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य था। हालांकि 2018 में केंद्र सरकार ने कहा कि 2030 तक नई बिकने वाली कारों में 30 फीसदी इलेक्ट्रिक कारें होगी। 

रिपोर्ट के अनुसार बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ रही है। लासएजिलिस में सबसे ज्यादा एक लाख इलेक्ट्रिक कारें हैं। जबकि शंघाई, बीजिंग, ओस्तो और सैनफ्रांसिस्को में यह संख्या 50-50 हजार से अधिक हो चुकी है। 2019 में जो मॉडल आएंगे उनमें ऑडी ई-टॉन, स्पोट्र्स बैंक, जगुआर एक्सजे, मिनी-ई, टेस्ला-ॅमॉडल 3, वोल्वो एक्ससी-40, निसान, आईडीएस, ओडीक्यू-6 ई ट्रान, और पोर्स मिशन-ई शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बिजली चालित वाहनों के लिए बैटरी से लेकर उनके कलपुर्जे तक भारत में बनाने पर जोर दिया है। यह भारत की तात्कालिक जरूरत भी है, क्योंकि जितनी जल्दी पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों से मुक्ति पाई जा सके, उतना ही अच्छा है। लेकिन हकीकत यह है कि हम इस दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ पाए हैं। जबकि दुनिया के दूसरे मुल्क बिजली चालित वाहनों के इस्तेमाल में काफी आगे निकल चुके हैं।

 भारत में अभी किसी भी वाहन निर्माता कंपनी ने व्यावसायिक स्तर पर इसकी शुरुआत नहीं की है। इसके लिए जिम्मेदार खुद सरकार ही है। भारत में बिजली और वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहनों के लिए अभी तक कोई नीति नहीं है। हालांकि ग्लोबल मोबिलिटी समिट मूव में प्रधानमंत्री ने जल्द ही ऐसी नीति बनाने का भरोसा तो दिया है। लेकिन सवाल है कि कब नीति बनेगी, कैसे उस पर अमल होगा, इसके लिए अभी इंतजार ही करना होगा। बिजली चालित वाहनों का सपना इसलिए भी साकार नहीं हो पा रहा है क्योंकि हमारे यहां उसके लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं है। वाहन निर्माता कंपनियों का कहना है कि अगर सरकार बैटरी निर्माण और चार्जिंग स्टेशनों की समस्या का समाधान कर दे तो बिजली चालित वाहन बाजार में उतारे जा सकते हैं। 

जाहिर है कंपनियां तो तैयार है, लेकिन पहल सरकार को करनी है। बुनियादी सुविधाओं का बंदोबस्त सरकार को करना है और इसके लिए ठोस दीर्घावधि नीति की जरूरत है। बिजली चालित वाहनों के लिए जो नीति बने उसमें सार्वजनिक को केंद्र में रखना होगा। जब तक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरूस्त नहीं होगी और पूरी तरह बिजली वाहनों पर आधारित नहीं होगी, तब तक उस दिशा में किए जाने वाले प्रयास अपेक्षित नतीजे नहीं देंगे। आज जो हालात है, उसे देखते हुए तो लगता है भारत में बिजली चालित वाहनों की मंजिल अभी दूर है। यहां यह बता दें कि नीति आयोग ने देश भर में पेट्रोल-डीजल से चल रहे वाहनों से निकलने वाले धुआं कार्बन उत्सर्जन से निजात पाने के लिए बिजली से चलने वाले वाहनों की जरूरत, उनके निर्माण और इससे संबंधित जरूरी नीतियां बनाने के मकसद से दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें दुनिया की कई जानी मानी वाहन निर्माता कंपनियों ने शिरकत की। इसी सम्मेलन में उपरोक्त प्रस्तुत की गई थी। इस सम्मेलन से उम्मीद तो बंधी है कि आने वाले वक्त भारत बिजली से चलने वाले वाहनों के निर्माण को लेकर पहल करेगा।

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