खुश रहने का रहस्य

Samachar Jagat | Wednesday, 29 May 2019 10:55:26 AM
Mystery to be happy

आमतौर पर देखा जाता है कि व्यक्ति अपनी सारी खुशी भौतिक वस्तुओं में ही तलाशता रहता है और उनको प्राप्त करने में अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है, लेकिन बावजूद इसके वह अपनी पूरी जिंदगी दु:ख में ही रोते-रोते, शिकायत करते करते ही बिता देता है। वह किसी भी भौतिक चीज की प्राप्ति पर क्षणिक खुश होता है और फिर उसी दु:ख के रास्ते पर चल पड़ता है और इनके मूल में वह स्वयं है। समझिए इसे एक कहानी के माध्यम से। बहुत पहले एक महात्मा थे, वे बहुत खुश रहते थे। जब देखो तब उसके चेहरे पर मुस्कान बिखरी रहती थी। उसे कभी किसी ने दु:खी, निराश और शिकायती भाव में नहीं देखा था। यही कारण था कि उसके पास बहुत सारे लोग अपने दु:खों के समाधान के लिए आते थे।

लोगों के दु:ख-संकट हरने में, उन्हें दूर करने में वे बहुत अच्छा महसूस करते थे। एक दिन वे शाम को किसी गांव में गए। जब लोगों को महात्मा के आने का पता चला तो वे दौड़े-दौड़े उनके पास आए। सबके चेहरे लटके हुए थे, उनके चेहरों पर चिंता की लकीरे साफ दिख रही थी। महात्मा ने उनसे आने का कारण पूछा। वे सब एक साथ बोले- महात्मा जी, हम बहुत दु:खी है, हमें ऐसा कोई उपाय बताएं, जिससे हम खुश रह सकें।

महात्माजी ने उनसे कहा- भद्र पुरुषों, यदि तुम सच में अपने दु:खों का कारण जानना चाहते हो, अपने दु:खों को जड़ों से मिटाना चाहते हो तो फिर तुम लोगों को मेरे साथ चलना होगा। वे सब महात्माजी के साथ चलने के लिए तैयार हो गए। महात्माजी ने उनके हाथों में एक-एक पत्थर का टुकड़ा दिया और जंगल की तरफ चल दिए। महात्माजी उनसे बातें करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे। उन सबको यह कह रखा था कि पत्थर वाले हाथ को एकदम सीधा रखना है, मोड़ना नहीं है। वे काफी दूर तक चले गए, महात्माजी बड़े प्रसन्न थे लेकिन वे गांव वाले बहुत दु:खी और परेशान दिख रहे थे।

 अब गांव वालों से पत्थर वाले हाथ का दर्द सहन नहीं हो पा रहा था, उन्होंने महात्माजी से कहा कि हमारा दर्द अब हमारे नियंत्रण से बाहर हो चुका है, इन पत्थरों को हम डाल रहे हैं, और ऐसा कहकर उन्होंने पत्थरों को डाल दिया। इस पर महात्माजी ने कहा कि पत्थर के एक घंटे पकड़ने से कम दर्द, दो घंटे पकड़ने से उससे ज्यादा और अधिक पकड़ने से और ज्यादा दर्द होना स्वाभाविक है, उसी तरह अपने दु:खों को जितनी देर अपने मन मस्तिष्क में पकड़े रहोगे तो उतने ही दु:खी हो जाओगे। दु:ख चिंता को तुरंत छोड़ें, उसे पकड़े ना रखें वरना वह आपके जीवन को खा जाएगी।

प्रेरणा बिन्दु:- 
दु:ख आने स्वाभाविक जय कृष्णा
पकड़े रहना स्वभाव जय कृष्णा
चलना-मिलना-खिलना जीवन है
हंसना जीवन का भाव जय कृष्णा।



 

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