सकारात्मक सोच जीवन बदल देती है

Samachar Jagat | Wednesday, 26 Sep 2018 06:32:35 PM
Positive thinking transforms lives

कीसी चीज को देखकर एक बोला- अरे! यह तो सबसे बेकार है। ऐसा सुनते ही पास में खड़ा व्यक्ति तुरंत बोल पड़ा- अरे! इसी में तो सार है। अब एक दूसरा-एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने लगा और एक-दूसरे को नीचा दिखाने लगा। लोग कहां कम थे। दो दलों में बंट गए और युद्ध के लिए डट गए। भयंकर युद्ध हुआ, लेकिन न किसी की जीत हुई और न ही किसी की हार। हारकर एक जगह पधार कर निष्कर्ष निकाला कि सोच ही जीत है और सोच ही हार है, सोच ही नफरत है और सोच ही प्यार है। 

सकारात्मक सोच न केवल जीने का, रहने का, सेवा का, व्यवहार का और जीवन की दिशा को बदल देती हैं वरन् सम्पूर्ण जीवन को ही बदल कर उसे सार्थकता में बदल देती है। मनुष्य का जीवन ही ऐसा है कि उसे अवसर मिला है अपने पिछले जन्मों को समझने का और आगे के जीवनों से मुक्ति पाने का। ऐसा केवल मनुष्य के साथ ही है क्योंकि श्रीप्रभु ने उसे ऐसा सोचने-समझने-करने की शक्ति उसे दी है। लेकिन बावजूद उसके वह इस भौतिक संसार की चकाचौंध में चौंधिया जाए और अपने मूल उद्देश्य से भटक जाए और केवल धन दौलत को अंतिम लक्ष्य मान ले तो फिर उसका कल्याण नहीं होने वाला है।

व्यक्ति का सम्पूर्ण जीवन उसकी सोचकर निर्भर होता है। वह जैसा सोचता है वैसा ही वह बन जाता है। यदि वह सोचता है मैं बहुत अच्छा हूं, तो वह निश्चित है कि वह इस दिशा अर्थात् अच्छा बनने की दिशा में अवश्य आगे बढ़ेगा, इसके लिए बार-बार प्रयास करेगा और वह हर हाल में अच्छा बनकर रहेगा। 

क्योंकि उसने अच्छा बनने की सोची, फिर अच्छा करने की ठानी और इसके बाद उसने अच्छा करना शुरू किया, उसे अच्छा करने में आनंद का अनुभव होने लगा, औरों से कुछ अलग लगने लगा, महसूस होने लगा। और इन सब बातों से अच्छा करने की उसकी आदत पड़ जाएगी। और कहते है कि आदतों से चरित्र का निर्माण होता है, जीवन का निर्माण होता है। और यदि कोई व्यक्ति ठीक इसके विपरीत सोचता है तो कि अच्छा बनने में, अच्छे काम करने में, आदर्श काम करने में क्या रखा है? तो फिर वह अच्छा करने की बिल्कुल भी सोचेगा ही नहीं, करने का तो सवाल ही नहीं उठता और अच्छा बनने की तो फिर बात ही कहां आएगी। 

उसे पूरी दुनिया स्वार्थी नजर आएगी, बेईमान नजर आएगी और फिर वह भी ऐसे ही कार्यांे में लिप्त हो जाएगा। इस तरह से उसके जीवन की दिशा और दशा सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति से एक दम विपरीत होगी और इसी नकारात्मक सोच के कारण वह अपने जीवन को संकीर्ण कर लेगा, छोटा कर लेगा, तुच्छ कर लेगा और छोटे-छोटे स्वार्थांे में उलझकर रह जाएगा उसका जीवन। इसलिए यदि कोई युवा अपने केरियर को, अपने जीवन को बड़ा और बहुत बड़ा बनाना चाहता है तो इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण जो बात होगी वह अपनी सोच को इतनी बड़ी बनाना होगी कि उसमें पूरी दुनिया ही समा जाए।

प्रेरणा बिन्दु:- 
कर्म के कदम, प्रेम के कदम और जीवन के कदम व्यक्ति की सोच तय करती है, जैसी जिसकी सोच होगी वैसी ही उसकी जिंदगी भी होगी।



 

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