चुनाव के दौरान छापेमारी और बयानबाजी

Samachar Jagat | Wednesday, 17 Apr 2019 04:25:43 PM
Raiding and rhetoric during the elections

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भोपाल-इंदौर को केंद्रित कर हाल ही दिल्ली व गोवा में आयकर के जो छापे प्रवीण कक्कड़, अश्विनी शर्मा, आर.के. मिगलानी व प्रतीक जोशी के यहां मारे गए थे उसके बारे में आयकर विभाग ने अभी कुछ भी अधिकृत रूप से यह नहीं बताया है कि वहां क्या और कितना मिला है, लेकिन जाहिर है कि इसकी जानकारी विभाग ने केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तक पहुंचा दी है। सरकार की तरफ से यह कहा गया कि यह आयकर विभाग का सामान्य काम है, इसमें कोई राजनीतिक स्वार्थ या हस्तक्षेप नहीं है।

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तब फिर कैसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फौरन ही इन छापों को उनके चुनावी भाषणों में कांग्रेस के विरुद्ध आरोपों और चुनाव का मुद्दा बना लिया। कानूनी तौर पर मामला अभी उन चार-पांच व्यक्तियों का है जो किसी राजनीतिक दल में नहीं है। एक व्यक्ति अश्विनी जोशी इनमें बहुत कमजोर व्यक्ति व मोहरा बना दिख रहा है। उससे जो कहलवाया जा रहा है, वह बोलता जा रहा है। छापे के वक्त उसने प्रेस से कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा है तो कभी कहता है कि उसके यहां रुपया बरामद हुआ है, वह कक्कड़ का है। मोदी का इन छापों को फौरन ही चुनावी भाषण बना लेना साफ दर्शाता है कि छापे मोदी सरकार ने सरकार का दुरूपयोग कर उनके राजनैतिक हित में डलवाए और अब वे उसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं।

भारत के चुनाव आयोग ने भ यह कहा कि चुनाव के समय ऐसे छापों के बारे में आयोग को पहले से सूचित किया जाना चाहिए था। अब आयकर विभाग ने मध्यप्रदेश में मुख्य निर्वाचन अधिकारी व भारतीय चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेज दी है। मोदी ने इन छापों का राजनैतिक दृष्टि से नामकरण कर ‘तुगलक रोड घोटाला’ रखा दिया है। मुख्यमंत्री बनने से पहले जब कमनाथ लोकसभा सदस्य थे, उस समय से दिल्ली में एक तुगलक रोड पर रहते हैं और यह बंगला अभी भी उनके पास है। कांग्रेसाध्यक्ष राहुल गांधी भी तुगलक रोड पर 12 नंबर बंगले में रहते हैं। ऐसे में इन छापों को ‘तुगलक रोड’ नाम देना मोदी द्वारा सरकार व पद का दुरूपयोग और राजनैतिक तौर पर अनैतिक है। यह छापे साफ तौर पर राजनैतिक चाल व विद्वेषक रूप से नजर आते हैं। अभी तो छापों में लिप्त व्यक्तियों को यह बताना है कि उनके यहां से जो भी बरामदी हुई है, वह उनके पास कहां से और कैसे आई है।

मोदी ने इसे ‘तुगलक रोड’ घपला नाम देकर यह बता रहे हैं कि यही रुपया कांग्रेस का चुनावी खर्चों के लिए कालाधन है। वे ‘15 लाख’ की जुमलेबाजी की तरह यह भी कह रहे हैं कि इस कालेधन को ट्रांसफर उद्योग और बाल व महिला कल्याण की योजनाओं में घपला कर पार्टी फंड में लाया गया है। 281 करोड़ रुपए की राशि की जब्ती की बात अनौपचारिक रूप से कही जा रही है। कांग्रसे नेता व भोपाल के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अब तक अधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है तो भाजपा नेताओं को 281 करोड़ रुपयों की जानकारी कैसे हो गई। अब इसकी प्रतिक्रिया में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने शिवराज सिंह सरकार के समय ई-टेंडर में भारी घपले सरकारी व राजनैतिक स्तर पर होने का बताया है।

कुछ कंपनियों पर एफआईआर दर्ज की है, जिसमें शिवराज सिंह चौहान, मंत्रिमंडल के तीन जन स्वास्थ्य इंजीनियरिंग (पीएचई) की कुसुम मेहदेले, जल संसाधन विभाग के मंत्री रहे नरोतम मिश्रा और सार्वजनिक निर्माण विभाग के मंत्री रहे रामपाल सिंह के नाम इंगित करते हुए 7 कंपनियों पर एफआईआर दर्ज की गई है और इसमें 3000 करोड़ रुपए का घपला बताया जा रहा है। अब सरकार व पदों का दुरूपयोग कर पार्टियों द्वारा स्तरहीन चुनावों में भी घपलेबाजी की जा रही है।

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