देश में बढ़ती सडक़ दुर्घटनाएं

Samachar Jagat | Friday, 07 Sep 2018 12:43:36 PM
Rising road accidents in the country

सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल होने वाली औसतन साढ़े चार लाख सडक़ दुर्घटनाओं में डेढ़ लाख से भी ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय सडक़ संगठन के मुताबिक दुनिया भर में हर साल सडक़ हादसों की वहज से 12 लाख लोग मारे जाते हैं और करीब 50 लाख लोग प्रभावित होते हैं। इनमें से करीब 12 फीसदी सडक़ हादसे केवल भारत में होते हैं, जो दुनिया मेें किसी भी देश के मुकाबले सर्वाधिक है। इस बार मानसून के दौरान देश के आधे से अधिक हिस्सों में हुई भारी वर्षा और बाढ़ के कारण सडक़ों और पुलों की जो हालत हुई है, उसके कारण सडक़ हादसों में इजाफा होने की संभावनाएं बढ़ गई है। यहां यह बता दें कि देश में सडक़ हादसों में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण सडक़ों की गुणवता खराब होना है। इसके अलावा सडक़ दुर्घटनाओं बढ़ोतरी के कई कारण है। इनमें यातायात नियमों का पालन न करने और तेज गति से वाहन चलाना भी है। 

सडक़ों पर खड्डे होने के कारण तेज गति से चलाने वाले वाहनों से दुर्घटनाएं होने का अंदेशा और बढ़ जाता है। थकान व नशे की हालत में वाहन चलाने, नाबालिगों को वाहन चलाने की अनुमति देने, वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने और गाडि़यों में क्षमता से अधिक सवारियां भरने के कारा सडक़ दुर्घटनाएं होताी है। ऐसी जानलेवा दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाना इसलिए भी जरूरी है कि इस वजह से मानव संसाधन का व्यापक स्तर पर असमय विनाश हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र के एक अध्ययन के अनुसार सडक़ दुर्घटनाओं के कारण भारत को हर साल 58 अरब डालर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। यह राशि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के तीन फीसदी से अधिक बैठती है। यहां यह भी बता दें कि हमारे यहां जितने लोगों की मौत आतंकी घटनाओं की वजह से होती है, उससे कई गुना ज्यादा मौतों का एकमात्र कारण सडक़ दुर्घटनाएं है।

ऐसी दुर्घटनाएं कई बार लोगों के महत्वपूर्ण अंग खत्म हो जाते हैं और कृत्रिम विकलांगता का यह रूप आमतौर पर लोगों को आर्थिक रूप से लाचार बना देता है, जबकि किसी परिवार के कमाने वाले एक मात्र सदस्य की सडक़ दुर्घटना में मौत से परिवार बेसहारा हो जाता है। सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार सडक़ दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की संख्या सर्वाधिक यानी 46 फीसदी है। देश की आबादी में युवाओं की भागीदारी करीबन 65 फीसदी है। लेकिन कई युवा अपने वाहन की उच्च गति से समझौता नहीं करना चाहते, जिससे कई बार वाहन का नियंत्रण नहीं रह जाता और वे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि चालक अगर अपनी रफ्तार में अगर 5 फीसदी की कमी लाता है तो जानलेवा दुर्घटना की संभावना को 30 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

 किसी देश की आर्थिक एवं सामाजिक विकास की धुरी होती है सडक़े। इनसे न सिर्फ भौतिक वस्तुओं की ढुलाई आसान होती है, बल्कि इन्हीं सडक़ों पर गतिमान परिवहन के विविध साधनों ने देश के नागरिकों को सस्ती और घर-घर तक पहुंचाने वाली सेवाएं उपलब्ध कराई है। इसके अलावा अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सडक़ों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। हालांकि विकास की प्रक्रिया में उतरोत्तर वृद्धि के साथ एक तरफ जहां सडक़ों की गुणवता में काफी सुधार हुआ है। वहीं दूसरी तरफ नागरिकों के खूने से लथपथ होती सडक़ों ने विकास के आधुनिक मॉडल और नागरिकों के विवेक पर प्रश्न चिन्ह भी लगाए हैं। देश में सडक़ दुर्घटनाएं रोकने के लिए सरकारें लंबे समय से प्रयास करती रही है। लेकिन आधुनिक एवं भागदौड़ भरी जिंदगी के आगे यातायात नियमों के प्रति बढ़ती लापरवाही और गंतव्य स्थान तक पहुंचने की बेचैनी कई बार हमें मौत के दरवाजे तक ले जाती है। जाहिर है यातायात नियमों का पालन नहीं करके हम अपना जीवन खतरें में डाल रहे हैं।

 सडक़ अनुशासन का पहला नियम दो पहिया वाहन चलाते हुए हेलमेट और चार पहिया वाहनों की सवारी करते समय सीट बेल्ट का प्रयोग करना है। लेकिन दुर्भाग्य है कि लापरवाही की वजह से इन आदतों को हम एक संस्कृति के रूप में विकसित करने में विफल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हेलमेट का इस्तेमाल कर सडक़ दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के खतरे को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा हेलमेट दुर्घटना में गंभीर चोट लगने की संभावना को 70 फीसदी तक कम कर देता है। लेकिन आमतौर पर देखा जाता है कि दो पहिया वाहन चालक हेलमेट और चार पहिया वाहनों में सवार लोग सीट बेल्ट लगाने से बचते नजर आते हैं। इन माननीय चूकों या असावधानियों की वजह से सडक़ दुर्घटनाओं में जान गंवाने या गंभीर रूप से घायल होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। देश में शराब पीकर वाहन चलाने और गाड़ी चलाते समय फोन पर बात करने वालों की तादाद भी कम नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ बनाए गए कानून की अच्छी तरह पालना की जाए तो सडक़ दुर्घटनाओं में 20 फीसदी तक की कमी लाई जा सकती है।

 दुनिया भर में होने वाली सडक़ दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मई 2011 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2011-2020 की समयावधि को ‘सडक़ सुरक्षा दशक’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका लक्ष्य दशक के अंत तक यानी 2020 तक दुनिया भर में होने वाली सडक़ दुर्घटनाओं में 50 फीसदी यानी आधी कम किए जाने का है। संयुक्त राष्ट्र के इस अभियान के हिस्सेदार रहे दुनिया के 100 से अधिक देश अपने यहां सडक़ सुरक्षा प्रबंधन, सडक़ों की आधारभूत संरचना, वाहन सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को दुरूस्त करने पर जोर दे रहे हैं। देश में अधिकांश सडक़ दुर्घटना सडक़ सुरक्षा के प्रति लापरवाही, यातायात नियमों का उल्लंघन और मानवीय चूक की वजह से होते हैं। सरल यातायात नियमों का सहजता से पालन कर और वाहन चालकों और यात्रियों को जागरूक बनाकर सडक़ हादसों में कमी लाई जा सकती है।



 

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