दुनिया में प्रथम और परम मित्र हमारा शरीर है

Samachar Jagat | Friday, 11 May 2018 11:05:51 AM
The first and last friend in the world is our body

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कहा और सुना जाता है कि मनुष्य योनि पाने के लिए देवता भी लालायित रहे हैं, इस बात में कितनी सच्चाई है यह तो मैं नहीं जानता लेकिन मानव शरीर की संरचना सर्वश्रेष्ठ है, इसमें कोई दो राय नहीं है क्योंकि वह चल सकता है, दौड़ सकता है, चढ़ सकता है, रेंग सकता है, उछल सकता है अर्थात् रबर की तरह अपने शरीर को मन चाहा आकार बनाकर-कसरत करके उसे न केवल चुस्त-दुरूस्त रख सकता है बल्कि उसे लंबे समय तक निरोग भी रख सकता है क्योंकि स्वास्थ्य पर निर्भर करती है मनुष्य की पूरी जिंदगी।

एक बार एक व्यक्ति किसी संत से मिलने उसके आश्रम में गया। संत उस समय ध्यान में लीन थे। वह व्यक्ति संत के आकर्षक शरीर, चुस्त-दुस्त शरीर और चेहरे की शालीन चमक देखकर दंग रह गया। जब संत ने अपनी आंखे खोली तो वह व्यक्ति संत के चरणों में अभिवादन कर बोले- महाराज! आपकी उम्र कितनी है? संतश्री ने कहा- बेटा! 85 वर्ष हो गए हैं इस शरीर को पाए हुए। इस पर उस व्यक्ति ने कहा- महाराज जी! मैं तो 40 वर्ष की उम्र में ही बेडोल, अस्वस्थ्य और लुंज-पुंज हो गया हूं।

आपके स्वास्थ्य का राज क्या है? संतश्री ने कहा- बेटा! इस शरीर में इतनी क्षमताएं हैं कि इसे सौ साल तक आसानी से स्वस्थ रखा जा सकता है, बशर्ते संयमित शाकाहार लिया जाए, कसरत की जाए, योगा-प्राणायाम किया जाए, दिनचर्या निश्चित की जाए, भूख से दो ग्रास कम खाया जाए, सप्ताह में एक उपवास किया जाए, पैदल चला जाए, पानी खूब पीया जाए, खाने में भोजन के आवश्यक तत्व सही मात्रा में लिए जाए- प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज लवण और जल।

क्योंकि यदि आवश्यकता से अधिक भोजन लिया जाएगा तो उसे पचाने के लिए शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा शक्ति लगानी होती है, इसलिए जो ऊर्जा शरीर को स्वस्थ रखने में काम आनी चाहिए वह भोजन को पचाने में ही खर्च हो जाए तो यह अच्छी बात नहीं है।

एक उदाहरण:- एक ऐसा ट्रक है जो निर्धारित भार से लेकर समतल सडक़ पर चलता है, निर्धारित गति से चलता है तो उसका इंजन, टायर और पूरी बॉडी लंबे समय तक चलती है, खराब नहीं होती-टूटती-फूटती नहीं है। जबकि एक ऐसा ट्रक जो निर्धारित वजन से ज्यादा वजन भरकर, ऊबड़-खाबड़ सडक़ पर निर्धारित गति से अधिक गति से दौड़ाया जाता है तो वह समय से पहले ही बिखर जाता है। वह जब चलता है और थोड़ी सी चढ़ाई पर ही बहुत धुआं फेंकने लगता है।

ऐसी ही स्थिति मनुष्य की है, जो व्यक्ति संयमित शाकाहार लेता है, उसका शरीर लंबे समय तक स्वस्थ, लचीला और सुंदर बना रहता है और जो व्यक्ति ठूंस-ठूंस कर, जब चाहे, जो चाहे पेट में डालता रहता है और फिर पाचक गोलियां, चूर्ण और अन्य चीजें केवल भोजन को पचाने के लिए लेता रहता है, उसका शरीर अनेकों रोगों से जकड़ जाता है अकड़ जाता है और घुट-घुटकर कर वह न जीता है और न मरता है।

प्रेरणा बिन्दु:- 
संयमित भोजन शाकाहार
सादा जीवन उच्च विचार
कसरत योग करें प्राणायाम
ये ही भारत के संस्कार।

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