वेस्टेज सुख-शांति और समृद्धि को खा रहा है

Samachar Jagat | Wednesday, 08 May 2019 04:33:50 PM
Vestes is eating happiness and prosperity

आंधी आती सबको दिखती है लेकिन आंधी खुद को नहीं देख पाती है, खुद की शक्ति का अंदाज नहीं लगा पाती है या यौं कहें अपनी बुद्धि को काम में नहीं ले पाती है और यही कारण होता है कि वह अपने अंधेपन से बहुत नुकसान कर देती है। चलो, आंधी को छोडि़ए, व्यक्ति के अंधेपन पर गौर करें क्योंकि उसे सब कुछ दिखता है लेकिन बावजूद इसके वह अपने सम्पूर्ण जीवन में कितना वेस्टेज कर देता है इसका अनुमान लगाना बड़ा मुश्किल सा है। एक सीधा सा अनुमान यही लगाया जाता है, भारतीय परिवारों में जितने सदस्य होते हैं, उनके बराबर ही रखना वेस्टेज होता है, सब्जी वेस्टेज होती है और इनसे जुड़ी हुई चीजें जैसे गैस, फ्रीज-मिक्सी-पंखों के माध्यम से बिजली का वेस्टेज होना, पानी का वेस्टेज होने सहित और भी भोजन से संबंधित बहुत सी चीजें होती हैं जो हमारी नासमझ से वेस्ट हो जाती हैं और यहां तक कि किसी जानवर के भी काम में नहीं आती हैं।

आज महंगे से महंगे मोबाइल फोन खरीदे जा रहे हैं क्योंकि उनमें अनेक फंक्शन होते हैं, लेकिन उन अनेक फंक्शनों में से अधिकांश फंक्शन कभी काम में नहीं लिए जाते हैं। ऐसे ही महंगी कारें खरीदी जाती हैं जिनकी गति 300-400 किसी प्रति घंटा तक होती है, लेकिन एवरेज स्पीड 70 किमी प्रति घंटा ही आता है। घर में अनेक भौतिक चीजों को ले लिजिए उनका अधिकतम दुरूपयोग ही होता है। एलईडी में अनेक फंक्शनों को काम में लेने के लिए दौ सौ चैनलों से उसे जोड़ा जाता है, क्या सभी चैनलों के प्रसारण देख पाना संभव है? इसी प्रकार घर के शो केस में या बक्से, आलमारी में कपड़ों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है उनमें से कितने कपड़े ऐसे होते हैं जिनका उपयोग हो पाता है-बहुत कम।

किसी समारोह-उत्सव को ले लिजिए कितना वेस्टेज सडक़ और सडक़ के किनारे फेंक दिया जाता हैं गायों को मारने के लिए। फुटवियर को ही ले लिजिए एक व्यक्ति के पास कई जोड़ी मिल जाती हैं लेकिन उपयोग में बहुत कम आती हैं। इन सब चीजों का उदाहरण इसलिए दिया जा रहा है कि व्यक्ति भी गुणों की खान है लेकिन यह अफसोस की बात है कि वह अपने गुणों और क्षमताओं का भी भौतिक चीजों की तरह वेस्ट करता है। आइए, हम अपने भीतर के सभी गुणों और क्षमताओं को अच्छे से काम में लें।

प्रेरणा बिन्दु:- 
खाना इतना बना हुआ है
वक्त नहीं है खाने का
धन दौलत से भरी आलमारी
लेकिन वक्त आ गया जाने का।
 



 

यहां क्लिक करें : हर पल अपडेट रहने के लिए डाउनलोड करें, समाचार जगत मोबाइल एप। हिन्दी चटपटी एवं रोचक खबरों से जुड़े और अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें!

loading...
रिलेटेड न्यूज़
ताज़ा खबर

Copyright @ 2019 Samachar Jagat, Jaipur. All Right Reserved.