हिमालय क्षेत्र में बढ़ता पर्यटन जैव सांस्कृतिक विविधता के लिए चुनौती

Samachar Jagat | Friday, 24 Aug 2018 11:20:44 AM
Challenges for biodiversity cultural diversity in the Himalayan region

नई दिल्ली। हिमालय क्षेत्र में पर्यटन 6.8 प्रतिशत वार्षिक दर से बढ़ रहा है और उसके कारण ठोस कचरा, पानी, यातायात, जैव-सांस्कृति विविधता के लिए बड़ी चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। नीति आयोग द्बारा हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास पर गुरुवार को जारी जांच रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। हिमालयी क्षेत्र के राज्यों में वर्ष 2025 तक पर्यटकों की संख्या दोगुनी होने के अनुमान के मद्देनजर रिपोर्ट में कचरा प्रबंधन और जल संकट जैसे महत्वपूर्ण विषयों के साथ-साथ पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों से संबंधित अन्य विषयों के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता बतायी गयी है।

हिमालय की विशिष्टता और निरंतर विकास की चुनौतियों को समझते हुए नीति आयोग ने पांच क्षेत्रों में कार्य करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से पिछले वर्ष जून में पांच कार्य दलों का गठन किया था। इनमें आविष्कार और जल सुरक्षा के लिए हिमालय में झरनों को फिर से चालू करना, भारतीय हिमालय क्षेत्र में निरंतर पर्यटन, कृषि की ओर बढ़ने के लिए परिवर्तनीय ­दृष्टिकोण, हिमालय में कौशल और उद्यमिता परिदृश्य को मजबूत बनाना तथा बेहतर फैसले के लिए डाटा/जानकारी शामिल है। पांच कार्य दलों की रिपोर्टों में इसके महत्व, चुनौतियों, वर्तमान कार्यों और भविष्य के रोडमैप के बारे में चर्चा की गई है।

रिपोर्ट में विषय संबंधी सभी पांच क्षेत्रों की चुनौतियां बताई गई हैं। लोगों की जल सुरक्षा की ­­दृष्टि से महत्वपूर्ण करीब 30 प्रतिशत झरने सूख रहे है और 50 प्रतिशत में बहाव कम हुआ है। पूर्वोत्तर में फसल को काटने और जलाने की प्रक्रिया जारी रहने के मद्देनजर रिपोर्ट में पर्यावरण, खाद्यान्न और पोषण सुरक्षा को देखते हुए इनका समाधान करने पर जोर दिया गया है। इन रिपोर्टों में पर्वतीय राज्यों में अकुशल कार्य बल को भी चुनौती बताते हुए कहा गया है कि इसके कारण युवा पलायन कर रहे हैं और इसको रोकने को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आंकड़ों की उपलब्धता, आंकड़ों की प्रामाणिकता, आंकड़ों की गुणवत्ता, वैधता, हिमालयी राज्यों के लिए यूजर शुल्कों से जुड़ी चुनौतियों से भी निपटने की आवश्यकता बतायी गयी है।-एजेंसी 



 

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