हर मौसम में यहां रहता है प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा

Samachar Jagat | Friday, 12 Jan 2018 05:16:02 PM
There is a gathering of migratory birds in every season

इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के भरतपुर में स्थित है केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान। यह एक प्रचलित पक्षी अभयारण्य है। यहां पर हजारों की संख्या में दुर्लभ और विलुप्त जाति के पक्षी पाए जाते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां साईबेरिया से सारस आते हैं। यहां 230 प्रजाति के पक्षी पाए जाते हैं। अब यह बहुत बड़ा पर्यटन स्थल है जो पर्यटकों को बहुत लुभा रहा है। इस अभयारण्य को 1971 में संरक्षित पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया था और 1985 में इसे विश्व धरोहर घोषित किया गया है। अगर आप पक्षी प्रेमी है तो यहां जरूर आएं। यहां का नज़ारा आपको बहुत पसंद आएगा।

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गर्मियों के मौसम में यह पक्षी अभयारण्य 230 से ज्यादा प्रजाति के हजारों पक्षियों के लिए एक घर है। इस पार्क को केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान के तौर पर भी जाना जाता है और बड़ी तादाद में पक्षी विज्ञानी सर्दियों के मौसम में इस ओर आकर्षित होते हैं। एक बहुत बड़ा पर्यटन आकर्षण होने के साथ ही यह जगह यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल भी घोषित की गई है।

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सन् 1971 में इस पार्क को संरक्षित पार्क घोषित किया गया था। यह एक वेटलैंड है जिसे भरतपुर क्षेत्र को अक्सर आने वाली बाढ़ से बचाने के लिए बनाया गया था। पहले इस जगह का इस्तेमाल जलपक्षी के शिकार के लिए होता था और अब यह गांवों के मवेशियों के लिए चारागाह जमीन के तौर पर इस्तेमाल होता है।

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स्थानीय तौर पर इसे घाना कहा जाता है और 28 किलोमीटर वाले इस पार्क में वेटलैंड, सूखी घास के जंगल, जंगल और दलदल हैं। इस पार्क के विभिन्न पशु पक्षियों में 230 किस्मों के पक्षी, 50 प्रजाति की मछली, सात प्रजाति के उभयचर, 13 किस्मों के सांप, सात प्रजाति के कछुए, पांच प्रजाति की छिपकली और अन्य हैं। इसके अलावा 379 किस्मों के फूल केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मिलते हैं। सर्दियों में हजारों प्रवासी जलपक्षी यहां प्रजनन और थोड़े दिन ठहरने के लिए आते हैं। 

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